Subscribe for notification

हीरा सिंहः गोंडवाना सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलन के युग का अंत

रायपुर। गोंडवाना सांस्कृतिक, सामाजिक  एवं राजनीतिक आंदोलन के एक महान युग का अंत हो गया है। गोंडवाना आंदोलन को गांव और शहर ही नहीं देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंचा कर सरकार को गोंडवाना आंदोलन की ताकत और एकता का एहसास कराने वाले गोंडवाना रत्न, गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के महानायक, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष दादा हीरा सिंह मरकाम जी नहीं रहे।

गोंडवाना आंदोलन में दादा मोतीरावण कंगाली, पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी जी के बाद अब गोंडवाना रत्न दादा हीरा सिंह मरकाम जी के निधन से गोंडवाना आंदोलन में कमजोरी आई है। वहीं उन्होंने गोंडवाना आंदोलन का जो बीज बोया, सिंचित किया, देखरेख की और समाज के युवाशक्ति, पितृशक्ति-मातृशक्ति के हाथों में गोंडवाना आंदोलन के मजबूत आधार स्तंभ को सौंपा है, उस पर मंजिल पाने की जिम्मेदारी दी है।

बीते एक साल से अस्वस्थ चल रहे मरकाम को बिलासपुर के वंदना हॉस्पिटल में कुछ दिन पहले भर्ती कराया गया था जहां बुधवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। आदिवासियों के बीच दादा नाम से पुकारे जाने वाले हीरा सिंह मरकाम का जन्म 14 जनवरी 1942 को कोरबा जिले के तिवरता ग्राम में एक कृषक देवसाय के घर हुआ था। शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे एक प्राइमरी स्कूल में शिक्षक बने। यहां शिक्षकों के हक के लिए उन्होंने आंदोलन शुरू कर दिया। इस बीच वे गोंडवाना समाज को जोड़ने का काम भी करते रहे।

सन् 1980 में उन्होंने शिक्षक पद से त्याग पत्र दे दिया और भाजपा के टिकट से चुनाव लड़कर पहली बार तानाखार से विधायक बने। 1990 में उन्होंने भाजपा छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरी बार तानाखार से ही विधायक बने। उन्होंने गोंडवाना समाज के लिए बैंक बनाया था। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में इस बैंक में घोटाले के दर्जनों मामले सामने आए।

2003 में वे चुनाव हार गए। उन्होंने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी पार्टी का विस्तार किया। उनकी पार्टी से एक विधायक महाराष्ट्र में भी रहा। उनकी मांग लगातार गोंडवाना राज्य का निर्माण करने की रही। दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में उनकी गहरी पकड़ रही। कई बार वे मंच पर अजीत जोगी के साथ आए। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कोटमी, गौरेला में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ भी मंच साझा किया, लेकिन किसी भी दल से बाद में नहीं जुड़े। उनके समर्थकों का एक धड़ा राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी बनाकर अलग भी हो गया। इसके बाद उन्हें विधानसभा में जाने का दोबारा मौका नहीं मिला। पिछले एक वर्ष से उनके पुत्र तुलेश्वर मरकाम को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पैदल चलकर पहुंचाया देश भर में गोंडवाना आंदोलन
आपको बता दें कि गोंडवाना रत्न दादा हीरा सिंह मरकाम जी ने गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन को पूरे देश भर में पहुंचाने के लिए कभी साधन-संसाधन की सुविधा को महत्व नहीं दिया। कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर, बस, रेल, दुपहिया वाहन यहां तक कि जो भी साधन उन्हें मिला उससे उन्होंने सफर पूरा करते हुए कार्यक्रमों में पहुंचकर गोंडवाना आंदोलन को बढ़ाने में अपनी विशेष भूमिका निभाई है।

कभी थाली में अनाज का एक दाना नहीं छोड़ा
इतना ही नहीं कार्यक्रम के बीच रास्ते में एवं कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद उन्हें कब कैसा भोजन करने को मिलता था, इसका भी कोई निश्चित समय नहीं रहता था। देखने वालों ने यह जरूर देखा कि गोंडवाना रत्न दादा हीरा सिंह मरकाम जी ने कभी थाली या पत्तल में अनाज का दाना भी नहीं छोड़ा है। इससे यह समझ आता है कि प्रकृति की अनुपम देन और अन्नदाता की मेहनत अनाज का कितना सम्मान गोंडवाना रत्न दादा हीरा सिंह मरकाम करते थे।

सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक चेतना का किया संचार
हीरा सिंह मरकाम ने पूरे देश में गोंडवाना का नाम पहुंचा दिया। गोंडवाना आंदोलन के माध्यम से उन्होंने समाजिक, शैक्षणिक-सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक चेतना का लोगों में संचार किया। साधन संसाधन की कमी के बाद आज पूरे देश में गोंडवाना आंदोलन की आवाज गूंज रही है। देश की राजधानी में वन अधिकार अधिनियम को लेकर किए गए आंदोलन ने गोंडवाना आंदोलन की प्रमुख पहचान स्थापित की थी।

हीरा सिंह मरकाम गोंडवाना सम्मेलन में भाषण देते वक्त दोनों पैरों पर बराबर खड़े रहते थे। कभी किसी ने उन्हें पैरों का जोर बदलते नहीं देखा। भले ही यह भाषण पांच घंटे तक ही क्यों न चला हो। बीते दिनों विश्व आदिवासी दिवस पर उनके घर पर ही कार्यक्रम मनाया गया तो उन्होंने अपने हाथों से मुट्ठी बना कर एकता का संदेश दिया। कार्यक्रमों में संकल्प के दौरान भी वे मुट्ठी बनाने का आहवान करते रहे हैं तो वे हमेशा अंगूठा अंदर कर मुट्ठी बनाने को कहते रहे। वैसा ही मुक्का समाज के लिए हमेशा एकता का संदेश बन कर मजबूती का संदेश समाज को देता रहेगा।

(जनचौक के लिए रायपुर से तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on October 29, 2020 1:35 pm

Share