Saturday, November 27, 2021

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रेणु की जन्मशती पर सिमराहा से लेकर दिल्ली तक कार्यक्रमों की झड़ी

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नई दिल्ली। हिंदी के अमर शब्द शिल्पी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सहयोगी फणीश्वरनाथ रेणु  की सौवीं  जयंती पर कल उनकी कहानी “संवदिया” पर बनी फिल्म उनके गांव में रिलीज होगी। इसके साथ ही दिल्ली रेणुजी पर दस पत्रिकाओं के विशेषांकों का लोकार्पण भी होगा।

रेणु की कहानी” तीसरी कसम अर्थात मारे गए गुलफाम” पर 1966 में  राज कपूर और वहीदा रहमान की क्लासिकल फिल्म “तीसरी कसम” बनी थी। इसके बाद उनकी चर्चित कहानी “पंचलैट” पर फिल्म बनी थी। संवदिया रेणु की कहानियों पर बनने वाली तीसरी फिल्म है।

कोलकाता की  प्रतिष्ठित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था नीलांबर ने इस फ़िल्म का निर्माण भी किया है ‘संवदिया’ में एक बिखरते संभ्रांत परिवार की बड़ी बहू के अभावग्रस्त जीवन और उनके उससे जूझने की विभिन्न मनोदशाओं को केन्द्र में रखा गया है। साथ ही ठेठ गंवई संवदिया की संवेदना को भी इसमें व्यक्त करने की कोशिश की गई है। यह फ़िल्म उस दौर के जीवन की इन्हीं संवेदनाओं के ताने-बाने को समकालीन समय के करघे पर बुनने की कोशिश है। यह एक साहित्यिक कहानी के पन्ने से पर्दे तक की यात्रा भी है।

इस फिल्म के कई दृश्यों का फिल्मांकन रेणु के पैतृक गाँव सिमराहा एवं उसके आसपास के अंचलों में किया गया है।  इससे पहले रेणु की कहानी ‘तीसरी कसम’ पर बासु भट्टाचार्य के निर्देशन में गीतकार शैलेंद्र ने फिल्म का निर्माण किया था। 2017 में उनकी कहानी ‘पंचलाइट’ पर ‘पंचलैट’ फिल्म का निर्माण कोलकाता के निर्देशक प्रेम मोदी ने किया था। इसी कड़ी में नीलांबर द्वारा निर्मित फिल्म ‘संवदिया’ को देखा जा सकता है।

ज्ञातव्य हो कि इसके पहले इस संस्था ने ऋतेश कुमार के निर्देशन में वंदना राग की कहानी ‘क्रिसमस करोल’, चंदन पांडेय की कहानी ‘जमीन अपनी तो थी’, मन्नू भंडारी की कहानी ‘अनथाही गहराइयां’ विनोद कुमार शुक्ल की कहानी ‘गोष्ठी’ पर शॉर्ट फिल्में बनाई हैं जो खासी सराही गई हैं। ऋतेश कुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म के मुख्य कलाकारों में मृणमोई विश्वास, दीपक ठाकुर, विमलेश त्रिपाठी, आशा पांडेय, पूनम सिंह एवं आदित्य प्रियदर्शी आदि शामिल हैं। फिल्मांकन किया है विशाल पांडेय ने।

रेणु के गांव में आयोजित प्रीमियर शो के समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे पद्म पराग वेणु, दक्षिणेश्वर रेणु, राकेश बिहारी एवं विनय कुमार।

4 मार्च को गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में रेणु पर 10 पत्रिकाओं के विशेष अंकों  का एक साथ लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही उन पर दो संपादित पुस्तकों “रेणु प्रसंग” (संपादक प्रज्ञा तिवारी)और” रेणु के उपन्यास”(राकेश रेणु)का भी लोकार्पण किया जाएगा । समारोह का आयोजन राजेंद्र भवन, रजा फाउंडेशन और मैला आंचल ग्रुप ने किया है। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक एवं संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपाई करेंगे। समारोह में मृदुला गर्ग, प्रयाग शुक्ल और मैत्रीय पुष्पा भाग लेंगी।

गांधी शांति प्रतिष्ठान ,रजा फाउंडेशन ,राजेंद्र भवन और मैला आंचल ग्रुप द्वारा आयोजित इस समारोह में “कथादेश”, “लमही”  “पाखी,” “नवनीत,” समवेद” , “बनास जन” ,”प्रयाग पथ”, “माटी” “सृजन सरोकार “,और” सृजन लोक” पत्रिका का रेणु विशेषांक का लोकार्पण किया जाएगा ।

चार मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कालेज में रेणु पर एक संपादित किताब का विमोचन होगा। इसका संपादन हंसराज कालेज की प्राचार्य डॉक्टर रमा ने किया है।

इसके अलावा भारत, जर्मनी और उज़्बेकिस्तान के संयुक्त तत्वावधान में अप्रैल 2021 में एक अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया जाएगा जिसमें उज़्बेकिस्तान से शिराजुद्दीन नर्मतोव; श्रीलंका से उपुल रंजीत; मॉरिशस से गुलशन सुखलाल; चीन से ग फू फिंग, तंग पिंग, वांग ली; फ्रांस से क्रिस्टीना सोजानकी; जापान से इशिदा हिदेयकी; अमेरिका से रिचर्ड डेलेसी, ऑस्ट्रेलिया से इयान वुलफोर्ड; डेनमार्क से एलमार रैनर, पोलैंड से टेरेसा मियाज़ेक, रूस से इंदिरा गाजिएवा, बुल्गारिया से आनंद वर्धन शर्मा, पुर्तगाल से शिव कुमार सिंह और भारत से प्रेमकुमार मणि, के एस राव, भारत यायावर, बद्रीनारायण, मणिन्द्र नाथ ठाकुर, हितेंद्र पटेल, आदि लेखक, इतिहासकार राजनीति विज्ञानी, समाजशास्त्री अध्येता भाग लेंगे।

तीनों देशों के कार्यक्रमों के संयुक्त संयोजक देवेन्द्र चौबे (भारत), राम प्रसाद भट्ट (जर्मनी) और उल्फत मुहीब (उज़्बेकिस्तान) ने बताया कि 3 और 4 अप्रैल 2021 को रेणु पर आयोजित इस परिसंवाद में उनके लेखन के बहाने समकालीन भारत, भारतीय गांव, ग्रामीण इतिहास, ग्रामीण जीवन और रेणु की भाषा एवं कथा की कला आदि को समझने का प्रयास किया जाएगा। 

कार्यक्रम में गणपत तेली, प्रदीप कुमार (भारत); क्रिस्टीना मेट्ज़, लक्ष्मी शर्मा (जर्मनी) और  शर्मातोवा गुलियारा, नीलुफर खोदजायेवा (उज़्बेकिस्तान) जैसे युवा अध्येता एवं विद्वान भी शामिल होंगे।

हिंदी साहित्य में पहली बार किसी लेखक की जन्म शताब्दी पर इतने सारे विशेषांकों का एक साथ लोकार्पण किया जा रहा है ।गौरतलब है कि हाल के वर्षों में  जैनेंद्र ,अज्ञेय  , रामविलास शर्मा ,नागार्जुन ,मुक्तिबोध आदि कई यशस्वी लेखकों की जन्म शती मनाई गई पर किसी की जन्मशती के मौके पर इतनी पत्रिकाओं के विशेषांक नहीं निकाले गए। गौरतलब है कि किशन कालजयी द्वारा संपादित  “संवेद” पत्रिका में देश के 106 लेखकों ने रेणुजी के साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर लिखा है। 570 पृष्ठों की इस पत्रिका में रेणु की सभी 63 कहानियां और उनके सभी उपन्यासों आदि पर लेख हैं ।इस तरह” बनास जन “में भी करीब 45 लोगों और “प्रयाग राज ” में “30” लोगों तथा “माटी” में 40 लोगों ने रेणुजी के साहित्य की विभिन्न आयामों पर लेख लिखे हैं।

इसके अलावा रेणु के पैतृक गांव औराही हिंगना (रेणु ग्राम) में चार मार्च को रेणु की चर्चित कहानी “संवादिया” पर बनी फिल्म भी जारी की जाएगी ।इसे कोलकाता की साहित्यिक संस्था “नीलांबर” ने तैयार किया है।

रेणु के जन्मशती वर्ष में लॉकडाउन के कारण ऑफलाइन कार्यक्रम तो आयोजित नहीं किया जा सका पर साल भर सोशल मीडिया पर कई  ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें मैला आंचल ग्रुप ने साठ व्याख्यान आयोजित किए ।साथ ही केंद्रीय साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं अन्य संस्थाओं ने भी रेणु की स्मृति में समारोह आयोजित किए।

हिंदी के प्रसिद्ध लेखक शिव मूर्ति ने अपने गांव में रेणु जी  की स्मृति में एक आयोजन किया है। इस वर्ष रेणुजी पर जर्मनी विश्वविद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय वेबिनार भी हुआ और तीन तथा चार अप्रैल को एक और अंतरराष्ट्रीय वेबिनार होने वाला है।

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