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Categories: बीच बहस

अनुयायियों के लिए हिप्नोटिज्म और “दुर्जनों” के लिए गन है जिसका हथियार

जनचौक ब्यूरो

(सनातन संस्था पर जारी श्रृंखला में पेश है दूसरी कड़ी-संपादक)

सनातन संस्था और एचजेएस की स्थापना 1995 में बाबरी मस्जिद के ध्वंस की पृष्ठभूमि में हुई। पेशे से एक डॉक्टर और हिप्नोथेरेपिस्ट जयंत अठावले ने सबसे पहले सनातन संस्था और एचजेएस की नींव रखी। शुरुआत उन्होंने श्यूडोसाइंस, आध्यात्म और धार्मिक रहस्य के प्रवचन से की। मुंबई में सियोन के रहने वाले अठावले ने अपनी पत्नी के साथ 1971 से 1978 के बीच इंग्लैंड में हिप्नोथेरेपी पर रिसर्च किया है। सनातन संस्था को स्थापित करने से पहले उन्होंने 1978 से 1990 के बीच सियोन में हिप्नोथेरेपिस्ट की क्लीनिक खोल रखी थी। बताया जाता है कि गोवा के रहने वाले एक साइकियाट्रिसट आशुतोष प्रभुदेसाई ने संस्था के आध्यात्मिक सिद्धांत को तैयार करने और उसके प्रसार में उनकी मदद की थी।

संगठन का प्राथमिक आधार गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में है। इस बात का विश्वास हो जाने पर कि उनकी आध्यात्मिक शिक्षा ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को आकर्षित कर रही है। अठावले ने लड़ाकू हिदू राष्ट्र के विचार को लोगों के दिमाग में पिरोना शुरू कर दिया। हालांकि शुरुआती चरण में संगठन ने लोगों को अपनी रक्षा करने के तरीके और 1999 में हथियारों का प्रशिक्षण देने से की। अनुयायियों को ये बताया गया कि समाज में दुर्जनों को सबक सिखाने के लिए हथियारों का प्रशिक्षण बहुत जरूरी है। यहां ये बताने की जरूरत नहीं है कि दुर्जनों में मुस्लिम, ईसाई और यहां तक कि पुलिस और सेना भी शामिल हैं।

सनातन संस्था ने अपने अनुयायियों को ये शिक्षा दी कि “शारीरिक स्तर पर केवल 5 फीसदी लड़ाई है। इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि 5 फीसदी साधक हथियारों का प्रशिक्षण लें। ईश्वर कुछ लोगों के जरिये उन्हें हथियार मुहैया कराएगा।” इसने उन्हें गन के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया। अठावले ने अपनी एक किताब में लिखा है कि “फायरिंग का प्रशिक्षण लेना कोई जरूरी नहीं है।

लेकिन अगर ईश्वर का नाम लेकर कोई बुलेट फायर करता है तो निशाना बिल्कुल सटीक बैठेगा।” अपने अनुयायियों की आत्मरक्षा के लिए संगठन ने धर्मशक्ति सेना का गठन किया। इस बात के फोटो के तौर पर कई सबूत हैं कि कैसे उसने अपने अनुयायियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण सैन्य वर्दियों में दी। उसके मुखपत्र सनातन प्रभात ने 16 अगस्त 2005 को अठावले का एक फोटो छापा जिसमें वो सैन्य वर्दी में थे और उन्होंने अनुयायियों से अपील किया था कि “कांग्रेस जैसी सेकुलर ताकतों के हाथों देश का खंड-खंड बंटवारा होने से रोकने के लिए हिंदू राष्ट्र का निर्माण बहुत जरूरी हो गया है।”

दूसरी तरफ सनातन संस्था सभी हिस्से के लोगों और विशेष कर महिलाओं को आकर्षित करने के लिए अपने अच्छे चेहरे को सामने रखती है। अपने ब्राह्मणवादी मूल्यों और चतुर्वण व्यवस्था में विश्वास करने के बावजूद सनातन संस्था ने मध्य जातियों और दूसरे पिछड़े वर्गों के एक बड़े हिस्से को अपना अनुयायी बनाने में सफल रही है। स्त्री और पुरुष कैसे कपड़े, गहने पहने, हिंदू त्योहार कैसे मनाएं, ईश्वर की पूजा कैसे करें आदि विषयों पर उन्होंने ढेर सारी किताबें लिखी हैं।

संगठन ने अपने ईश्वर को खुद परिभाषित किया है। उसका मानना है कि मौजूदा समय में हिंदू भगवानों की जो तस्वीरें और मूर्तियां हैं उन्हें उचित तरीके से डिजाइन नहीं किया गया है। सनातन संस्था द्वारा तैयार किए गए चित्र इच्छाओं की पूर्ति करेंगे। एक खास आध्यात्मिक स्तर हासिल कर लेने के बाद उनके साधक सपनों में इन चित्रों को देखते हैं। संस्था के पास बाल झड़ने से लेकर सेक्सुअल समस्याओं तक हर चीज का समाधान है। जिसे वो हिप्नोटिज्म के जरिये हल कर सकती है।

लैंगिक “समस्यानवार स्वासम्मोहन उपचार” किताब में अठवाले ने एक नपुंसक शख्स का इलाज करने के साथ ही एक गे को सीधे मनुष्य में तब्दील करने का दावा किया है। संगठन आम लोगों के घरों में प्रवेश कर कपूर, धूप की लकड़ियां और धार्मिक साहित्य बेचने का काम करता है। वो निश्चित तौर पर शांत, विनम्र और कोई वितंडा न खड़ा करने के चलते लोगों को आकर्षित करते हैं। भारत जैसे देश में कोई भी आध्यात्मिक गुरु किसी राजनीतिक नेता के मुकाबले ज्यादा अनुयायी हासिल करने में सफल होता है। इसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है।

सामान्य महिलाओं के लिए समाज में पुरुषों से सोशलाइज होने का सत्संग एक रास्ता है। सनातन संस्था इसका कोई अपवाद नहीं है। इसने भी ढेर सारी ऐसी महिला अनुयायियों को हासिल कर लिया जो अपने घरों को छोड़कर अपनी इच्छा से आश्रम में रहने स्वीकार कर लीं। उन्होंने अपने माता-पिता से सारा रिश्ता तोड़ लिया और कभी न लौटने के लिए आश्रम में गायब हो गयीं। इस तरह के कुछ माता-पिता सामने आए हैं और उन्होंने बांबे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सनातन संस्था पर पाबंदी लगाने की मांग की है।

पहली कड़ी यहां पढ़ी जा सकती है:

https://janchowk.com/Beech-Bahas/sanatan-sanstha-dabholkar-hindu-rashtra-gauri-lankesh/3559

जारी…

This post was last modified on December 3, 2018 6:57 am

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Published by
Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi