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Categories: बीच बहस

राहुल के बढ़े आत्मविश्वास से खौफ़जदा हैं संघ-बीजेपी के कार्यकर्ता

संदीप नाईक

राहुल गांधी की आज की पत्रकार वार्ता जो इंदौर के सबसे महंगे होटल रेडिसन में हुई थी और सिर्फ चुने हुए पत्रकारों को जाने की और नाश्ते की इजाजत थी, अभी क्विंट पर सुनी।

राहुल सिर्फ परिपक्व ही नहीं बल्कि तार्किक भी हो गए हैं और उन्होंने अकेले भाजपा के मोदी-शाह कम्पनी से लेकर संघ को सोचने पर मजबूर कर दिया है। फलस्वरुप मोदी से लेकर शाह और छुट भैये गली मोहल्ले के टॉमी, कालू, शेरू, अनिता या सुनीता रूपी भक्त बौखला गए हैं और पढ़े लिखे जाहिल भी समझ नहीं पा रहे कि इस पप्पू को क्या जवाब दें।

मोदी से लेकर संघ का जमीनी कार्यकर्ता इसलिए अब ख़ौफ़ में है कि वो जवाब देने लगे हैं और इनके पप्पू कहने से बिदकते नहीं बल्कि पूरी दिलेरी से सूट-बूट की सरकार से लेकर चौकीदार ही चोर है कहने का साहस रखते हैं।

मोदी ने इतिहास मरोड़कर नेहरू से लेकर पटेल और सुभाष से लेकर गांधी तक को अपने गलत इरादों और बुरी नीयत से बदनाम करके थूकने की कोशिश की। वह उन सबके मुंह पर गिर रहा है यह लोग जान गए हैं, राहुल का जवाब देने के बजाय नेहरु को गाली देना कहां की बुद्धिमानी है?

महिलाओं के प्रति तीन तलाक से लेकर शबरीमाला के मंदिर में प्रवेश पर इनकी दो मुंही नीति सामने आ गई, शबरीमाला के केस में अमित शाह की सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी 5 राज्यों में चुनावों के दौरान हिन्दू कार्ड खेलने की है। बाकी कोई बात में दम नहीं है और इस बात को पढ़े-लिखे लोग ही नहीं समझते बल्कि एक अनपढ़ भी समझता है कि खीज कहां तक है।

असली बात यह है कि ये 5 साल में कुछ नहीं कर पाए और अब विदाई के समय देश को पुनः 1947 की तरह हिन्दू-मुस्लिम की आग में झोंककर कंगाल खजाने के साथ भाग जाना चाहते हैं – सारी संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद कर अब उजबक किस्म की बातें कर रहे हैं, एक कैमरामैन की रक्षा नहीं कर सकते जो आज मारा गया छग में तो देश की रक्षा क्या खाक करेंगे?

ये करोड़ो रूपये की मूर्ति बनवा सकते हैं एकता के नाम पर। अपनी पार्टी, संघ और अपने अनुषांगिक संगठनों की एकता ही बना लें तो बहुत है- शिवराज जी,  वसुंधरा, रमनसिंह जी, कैलाश भाई, उमा जी, तोगड़िया जी, गोविंदाचार्य जी, भागवत जी, आडवाणी जी, जोशी जी या सुषमा स्वराज जैसों को एकसाथ मोदी जी अपने हाथ से साथ बिठाकर चाय पिला दें वही बहुत है।

राहुल की परिपक्वता आश्वस्त करती है। कम से कम वो बगैर डर के बोल रहे हैं। काम कर रहें है, बाकी का विपक्ष तो नपुंसक बन गया है और कामरेड लोग शहनाई लेकर बैठे हैं कि कुछ हो और वो ज्ञान बांटें, राहुल को कांग्रेस के भीतरी लोगों से भी सतर्क रहने की जरूरत है।

खास करके शशि थरूर, मणिशंकर और दिग्विजय सिंह जैसे जो बनते महल पर मठ्ठा डालने में पारंगत हैं और माहिर हैं चाल बदलने में। साथ ही उन अवसरवादियों से जो टिकिट के बहाने दूसरे दलों की मदद कर रहे हैं अंदरूनी जानकारियां फ़ैलाकर और यहां-वहां बेचकर कांग्रेस के गड्ढे खोद रहे हैं।

(संदीप नाइक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और आजकल भोपाल में रहते हैं।)

This post was last modified on November 30, 2018 6:55 pm

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Published by
Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi