Saturday, November 27, 2021

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कर्नाटक में दिखने लगे हैं किसान विरोधी कानूनों से मंडी खत्म होने के पूर्व संकेत: योगेंद्र यादव

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संयुक्त किसान मोर्चा ने कर्नाटक से अपने एमएसपी दिलाओ अभियान की शुरुआत की है। गुलबर्गा और बेल्लारी की कृषि उपज मंडी में एमएसपी दिलाओ अभियान की शुरुआत जम्हूरी किसान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर सतनाम सिंह अजनाला, जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव और कर्नाटक के सभी किसान संगठनों के नेतृत्व में हुई।

बेंगलुरू की प्रेस वार्ता में एक बड़ा खुलासा करते हुए योगेंद्र यादव ने बताया कि कर्नाटक देश का पहला राज्य है जहां नए मंडी कानून से सरकारी मंडियों को होने वाले नुकसान का प्रमाण सामने आ गया है। कर्नाटक में सरकारी मंडी के बाहर प्राइवेट व्यापार की अनुमति देने वाला कानून पिछले साल 15 मई को ही लागू हो गया था और उस पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे का कोई प्रभाव नहीं हुआ है।

अगर प्रदेश की सभी मंडियों में 15 मई, 2020 से 28 फरवरी, 2021 के बीच हुई फसलों की आवक की तुलना पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुई आवक से की जाए तो मंडियों के बंद होने का पूर्वाभास मिलता है। नया कानून लागू होने के बाद पिछले साल की तुलना में इस साल मंडियों में धान की आवक 27% मक्का की आवक 26% तूर दाल की आवक 24% और चना की आवक 29% घट गई है। गौरतलब है कि इन चारों फसलों का उत्पादन पिछले साल की तुलना में बढ़ा है फिर भी मंडियों में आवक घटने का मतलब है कि व्यापार मंडियों के बाहर जाने लगा है। योगेंद्र यादव ने कहा “कर्नाटक में जो हुआ है वह पूरे देश में मंडियों के विनाश का पूर्व संकेत है।”

मंडियों में दौरे से यह भी उजागर हुआ की प्रदेश में अधिकांश फसलें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से बहुत नीचे बिक रही हैं। 5 मार्च को बेल्लारी मंडी में बिकी आठ में से सात फसलें सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से नीचे बिक रही थी। मक्का की फसल 1850 रुपए एमएसपी की बजाए केवल 1459 में बिकी, ज्वार की फसल 2640 की जगह ₹1728 में बिकी, बाजरा 2150 की जगह 1482 रुपए में और चना की फसल 5100 की जगह ₹4182 प्रति क्विंटल के भाव से बिकी। इस दौरे के बाद योगेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा “एमएसपी थी, है और रहेगी जैसे जुमले का क्या अर्थ है? अगर एमएसपी है तो किसान को मिलती क्यों नहीं? अगर नहीं है तो प्रधानमंत्री झूठा प्रचार करना बंद क्यों नहीं कर देते?” उन्होंने आह्वान किया कि प्रदेश की सभी मंडियों में किसानों को इसी तरह एमएसपी के झूठ का पर्दाफाश करना चाहिए।

पंजाब से आए किसान नेता सतनाम सिंह अजनाला ने पुष्टि करते हुए बताया की पंजाब में भी मक्का के किसान की इसी तरह लूट हुई है। कर्नाटक के कृषि मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रकाश कम्मारेडी ने पिछले वर्ष के आंकड़ों का हवाला देकर बताया कि प्रदेश में किसान अपनी 72% फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बेचने पर मजबूर होते हैं। इससे प्रतिवर्ष किसान को 3,119 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। अगर किसान को मिलने वाले दाम की तुलना स्वामीनाथन कमीशन द्वारा सुझाई गई एमएसपी से करें तो कर्नाटक के किसान को पिछले वर्ष 20,339 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार यदि प्रतिवर्ष 10,500 करोड़ रुपए खर्च करे तो प्रदेश के सभी किसानों को स्वामीनाथन कमीशन के मुताबिक एमएसपी दिलाई जा सकती है।

कर्नाटक में इस अभियान का आयोजन किसान मजदूर और दलित जन आंदोलनों के समन्वय “संयुक्त होराटा” ने किया। इसमें कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेता चमरास मलि पाटिल, बडकल नागेंद्र, अमजद पाशा, वीर संघैय्या, एच आर हीरेमठ, पूर्व विधायक बी आर पाटिल और हरियाणा जय किसान आंदोलन के महासचिव दीपक लांबा ने भी भाग लिया।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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