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Categories: बीच बहस

आरोग्य सेतु किसके हेतु?

आरोग्य सेतु के 100 मिलियन डाउनलोड हो गए हैं। सरकार ने इसे सरकारी, निजी कर्मचारियों के साथ-साथ रेल यात्रियों के लिए भी अनिवार्य कर दिया है जैसे-जैसे लॉकडाउन खुलता जाएगा सरकार इसे सभी के लिए अनिवार्य कर देगी लेकिन आप नहीं जानना चाहेंगे कि आपके स्वास्थ्य के लिए बनाई गई सेतु किसका हेतु कर रही है।

आप सबको मोबाइल फोन पर अचानक से बहुत से ऑनलाइन मेडिसिन कंपनी विज्ञापन आ रहे होंगे क्योंकि आरोग्य सेतु का डाटा इन विदेशी कंपनियों के साथ शेयर किया जा रहा है। संघ के स्वदेशी जागरण मंच ने इस बात पर घोर आपत्ति उठाई है कि 100 मिलियन नागरिकों का डाटा विदेशी ऑनलाइन फार्मा कम्पनियों को क्यों दिया जा रहा है। संघ ने नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है और उनसे इस्तीफा मांगा है।

सरकार कितना बाजारवादी शक्तियों के हाथों में खेल रही है वो इस बात का प्रमाण है कि रेल यात्रियों के आरोग्य सेतु को अनिवार्य कर दिया गया है लेकिन इस देश मे केवल 55% स्मार्ट फोन यूजर हैं। बाकी 45% लोगों के पास फीचर फ़ोन है जिसमें यह एप नहीं चल सकता है। इन 45 फीसदी लोगों में भी 30 फीसदी लोगों के पास केवल 1000 रुपये की कीमत वाले बेसिक फोन हैं। क्या सरकार  बेसिक औऱ फ़ीचर फोन वालों को स्मार्टफोन पर डायवर्ट करना चाह रही है? स्मार्ट फोन और डाटा बेचने वाली कंपनियों के हाथ में खेल रही है ?

सरकार से इंटरनेट फ्रीडम के लोगों द्वारा आरटीआई लगाकर आरोग्य सेतु एप का सोर्स कोड माँगा गया तो सरकार ने गोपनीयता का बहाना बना कर यह कोड देने से मना कर दिया। इससे पहले गृह मंत्रालय ने तो यह बोल दिया कि हमें तो पता ही नहीं कि यह आरटीआई किसके अधिकार में आता है। बार-बार पारदर्शिता का दावा करने वाली सरकार सोर्स कोड देने से इसलिए डर रही है क्योंकि वो जानती है अगर सोर्स कोड मिल गया तो उनकी सारी पोल खुल जाएगी।

सरकार से कुछ सवाल हैं क्या बेसिक फोन वाला गरीब मजदूर किसान रेल यात्रा नहीं कर पायेगा? जिस मजदूर के पास आटा खरीदने का पैसा नहीं है वो डाटा कैसे खरीद पायेगा ?लोगों के हेल्थ का डाटा विदेशी ऑनलाइन कंपनी को क्यों दिया जा रहा है। सरकार लोकल को वोकल कर रही है लेकिन डाटा ग्लोबल क्यों कर रही है?

हर किसी के लिए हजारों करोड़ के पैकेज आ गये। ट्विटर पर आत्मनिर्भरता वाले ट्वीट की बाढ़ आ गयी है। मगर शहरों से अपने घरों को लौटते मजदूरों के लिए एक बस ना आ सकी….एक ट्रेन ना आ सकी…आरोग्य सेतु से केवल राहु केतु जैसी विदेशी कम्पनियों का हेतु हो रहा है।

(अपूर्व भारद्वाज डाटा विशेषज्ञ हैं और डाटा वाणी नाम से सोशल मीडिया पर अपना कार्यक्रम चलाते हैं। आप इस समय इंदौर में रहते हैं।)

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This post was last modified on May 17, 2020 8:47 am

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