बाप-बेटे की क्रूर हत्या: तमिलनाडु की बर्बर पुलिस और नकारा ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट

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मद्रास हाईकोर्ट।

तमिलनाडु में लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में पकड़े गए एक बाप और उनके बेटे, जयराज और बेनिक्स की पुलिस हिरासत में पिटाई और यौन यातना से मौत की घटना को लेकर पूरे राज्य में आक्रोश और मद्रास हाईकोर्ट द्वारा इस मामले का स्वत:संज्ञान लेने के बाद तमिलनाडु की अद्रमुक सरकार रक्षात्मक मोड में आ गयी है।मुख्यमंत्री के. पलनीसामी ने कहा है कि सरकार ने तूतीकोरिन में पिता-पुत्र की मौत के मामले को सीबीआई को सौंपने का फ़ैसला लिया है। मद्रास हाईकोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा। 

इस मामले में स्वतः सज्ञान लेते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के जस्टिस पीएम प्रकाश और बी पुगालेंधी की खंडपीठ ने मामले की जांच के आदेश देते हुए पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि पुलिसकर्मियों की क्रूरता कोरोना वायरस की महामारी की तरह बढ़ रही है और वे इस मामले को हल्के में नहीं लेंगे।

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इस बीच मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के. चंद्रू ने कहा कि पुलिस हिरासत में मौत का मामला और मजिस्ट्रेट का आचरण न्यायिक कदाचार का एक स्पष्ट मामला है और गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु मामले में दिए गये  दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। आरोपियों की जांच करना एक न्यायिक मजिस्ट्रेट का कर्तव्य है। उनसे पूछा जाना चाहिए था कि वे क्यों घायल हुए क्योंकि उनके शरीर से खून बह रहा था, क्या पुलिस ने रिमांड से पहले उनके रिश्तेदारों को सूचित किया था, और क्या उनके पास एक वकील था? जस्टिस चंद्रू ने कहा इन प्राथमिक संवैधानिक अधिकारों को मजिस्ट्रेट द्वारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

दरअसल एस जोसेफ जो कि जयराज की बहन जया से शादीशुदा हैं, ने बताया कि जब जयराज और बेनिक्स को मजिस्ट्रेट की अदालत में लगभग 11.45 बजे लाया गया था, तब वे दोनों वहां मौजूद थे। मजिस्ट्रेट की अदालत वर्तमान में उनके घर से ही चल रही है। जोसेफ के अनुसार वे देखने में बुरी तरह घायल नजर आ रहे थे और उनके कपड़ों से खून रिस रहा था। दोनों गेट के पास, कॉम्प्लेक्स के प्रवेश द्वार पर सात-आठ पुलिसकर्मियों से घिरे हुए थे। उन्हें अंदर नहीं ले जाया गया। मजिस्ट्रेट पहली मंजिल पर दिखाई दिए और पुलिसकर्मियों की तरफ हाथ लहराया । जयराज और बेनिक्स के साथ एक अधिकारी चिल्लाया, कोविलपट्टी, रिमांड और मजिस्ट्रेट ने इसे वहीं खड़े-खड़े मंजूरी दे दी। 

अब सवाल है कि जब उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था तो मजिस्ट्रेट को चोटों की जानकारी लेनी चाहिए थी। उन्हें मेडिकल सर्टिफिकेट देखना चाहिए था। मजिस्ट्रेट ने ये सब क्यों नहीं किया? मजिस्ट्रेट को क्या डीके बसु मामले में दिए गये दिशानिर्देश का ज्ञान नहीं है ? क्या कोरोना के नाम पर तमिलनाडु में नियमों परिनियमों और क़ानूनी प्रावधानों की न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं? 

सवाल यह भी है कि क्या जेलर को ये नहीं देखना चाहिए था कि वे कोविलपट्टी जेल में स्वस्थ थे या नहीं हैं? किसी घायल व्यक्ति को जेल में कैसे बंद किया जा सकता है? इस मामले में हर क़ानूनी चरण पर गंभीर ग़लतियां की गई हैं। जब कैदी जेल में अंदर लिए जाते हैं तो जेल में भी उनका मेडिकल परीक्षण होना अनिवार्य है तो क्या उनका मेडिकल परीक्षण हुआ था या नहीं। या तमिलनाडु में पुलिस इतनी शक्तिशाली है कि अधीनस्थ न्यायपालिका और जेल प्रशासन उसका गुलाम हो गया है और उसके इशारे पर नाचने के लिए मजबूर है?  

उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी अस्पताल की भूमिका पर भी सवाल उठाया है, जहां मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने से पहले जय राज और बेनिक्स को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया गया था। यहां तक कि दो एफआईआर दर्ज किए जाने के बावजूद, किसी अधिकारी पर हत्या के आरोप के लिए मामला दर्ज नहीं किया गया है। चार पुलिस अधिकारियों के निलंबन के अलावा, स्टेशन निरीक्षक का तबादला कर दिया गया है। न्यायिक जांच चल रही है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट मद्रास हाईकोर्ट को एक सीलबंद कवर में प्रस्तुत कर दी गई है, और हाईकोर्ट पुलिस से एक रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही है।

आरोप है कि पुलिस ने लॉकडाउन में देर तक दुकान खोलने के आरोप में 58 साल के पी जयराज और 38 साल के उनके बेटे बेनिक्स को गिरफ़्तार किया और हवालात में पीटा। पुलिस ने बाप और बेटे दोनों को नंगा कर के लाठियों से पीटा। चेहरों को दीवार से पटका गया। उन्हें जेल में एक ऐसी जगह पर ले जाया गया जहां पर कोई सीसीटीवी कैमरे न लगे हों। उनकी गुदा में लाठी डाली गई। उनके गुप्तांगों को चोट पहुंचाया गया। दरअसल चोट नहीं, उनके गुप्तांगों को चीर दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनके गुप्तांगों से भयावह खून बह रहा था। इतना खून कि सात लुंगियां खून से लथपथ हो गईं। बेनिक्स की बहन पेरसिस ने बताया कि दोनों के आगे और पीछे कुछ भी नहीं बचा था। मैं महिला और एक बहन होने के नाते इससे ज्यादा कुछ भी नहीं बता सकती। आरोप है कि बेनिक्स की मौत खून बहने की वजह से हुई जब उनके मलद्वार में लाठी डाली गई। दो दिन बाद दोनों की मौत हो गई। दोनों की मौत के बीच केवल कुछ घंटों का अंतर था।

लॉकडाउन के दौरान देश के कई हिस्सों से कथित तौर पर पुलिस की बर्बरता और यातनाओं की ख़बरें आती रही हैं। इस घटना ने पुलिस के रवैये को लेकर फिर बहस छेड़ दिया है। जयराज तूतीकोरिन ज़िले (थुतुकुड़ी) के सतानकुलम के निवासी थे।सतानकुलम में उनके बेटे बेनिक्स की एपीजे मोबाइल्स नाम से एक मोबाइल की छोटी दुकान है। शुक्रवार 19 जून को जब पुलिस इस इलाक़े में दुकानें बंद करवाने आई थी उस दौरान बेनिक्स की उनसे बहस हो गई थी। उसके बाद सतानकुलम पुलिस ने बेनिक्स और उनके पिता के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली जिसके बाद जयराज को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पिता के पीछे-पीछे बेनिक्स भी पुलिस स्टेशन पहुंच गए और उन्हें भी पिता के साथ हवालात में बंद कर दिया गया।

यह मामला अमेरिका के उस मामले से भी भयावह है जिसमें एक अफ्रीकी-अमेरिकी की हत्या एक पुलिस वाले द्वारा उसका गला घुटने से दबा कर कर दी गयी थी और जिससे अकेले अमेरिका ही नहीं विश्व में तूफान आ गया था। उसी तरह तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिसिया बर्बरता की वजह से जान गंवाने वाले बाप-बेटे जयराज और बेनिक्स का मामला पूरे देश में सुर्खियां बन गया है। यह भारत में व्याप्त बर्बर पुलिस राज और पुलिस की कहानी पर आम तौर पर अदालतों द्वारा भरोसा करके निर्दोष लोगों को जमानत न देने या उनकी गिरफ्तारी बढ़ाने या उन्हें प्रताड़ित करने का जीवंत उदाहरण है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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