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Thursday, August 5, 2021

भाषणजीवी प्रधानमंत्री ने असहमत नागरिकों को बताया आंदोलनजीवी, विपक्ष ने कहा शर्मनाक

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सदन में प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि “सरकार एमएसपी पर कानून बना दे। तीनों कृषि कानून वापस ले ले तो हम आंदोलन खत्म कर देंगे।”

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि “MSP पर क़ानून बने यह किसानों के लिए फायदेमंद होगा। अगर PM मोदी बातचीत करना चाहते हैं तो हमारा मोर्चा और कमेटी बातचीत करने के लिए तैयार हैं। हमारा पंच भी वहीं है और मंच भी वहीं है।” 

किसान नेता राकेश टिकैत ने आगे कहा कि ” कानून के अभाव में किसानों को लूट रहे व्यापारी। अभी एमएसपी पर कानून नहीं होने से व्यापारी किसानों को लूट रहे हैं। हमने कब कहा है कि एमएसपी खत्म हो रहा है। हम कह रहे हैं कि इस पर एक कानून बनना चाहिए। देश में भूख से व्यापार करने वालों को बाहर निकाला जाएगा। देश में अनाज की कीमत भूख से तय नहीं होगी।”

बता दें कि पीएम मोदी ने राज्यसभा में सदन को संबोधित करते हुए किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की है और कहा है कि “न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था बनी रहेगी। एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी रहेगा। किसानों को आंदोलन खत्म करना चाहिए।” 

पीएम मोदी की इस अपील के बाद सिंघु बॉर्डर पर धरना दे रहे किसान नेता सतनाम सिंह साहनी ने कहा “प्रधानमंत्री तुरंत मीटिंग बुलाएं, हम जाने के लिए तैयार हैं। हम उनकी बात मानेंगे, वह हमारी बात मानें। प्रधानमंत्री बहुत देर बाद इस मुद्दे पर बोले हैं। किसानों को बदनाम किया गया है। मंडिया कैसे रहेंगी, ये बड़ा सवाल है। इस एक्ट में बहुत सारी खामियां हैं। पहले कृषि मंत्री माफी मांगें, वो किसान आंदोलन को बदनाम करते हैं। हम कृषि कानूनों को रद्द करने की बात पर अभी भी अडिग हैं। ये देश सभी धर्मों का है। सभी धर्मों ने बहुत कुछ किया है। ये आंदोलन सभी धर्मों का है।”

कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “राज्यसभा में पीएम मोदी के भाषण में कोई सार नहीं था। उन्होंने 3 कृषि कानूनों की कमी पर कांग्रेस के प्रस्ताव की अनदेखी की और किसानों, विद्वानों और वैज्ञानिकों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि किसी को कुछ भी पता नहीं है। क्या हम सब मूर्ख हैं ?” 

वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा कि “किसान चाहते हैं कि MSP की गांरटी कानून में हो। जब मोदी साहब गुजरात के मुख्यमंत्री थे और कमेटी के अध्यक्ष थे उस वक्त उन्होंने ही लिखित में कहा था कि किसानों को MSP लिखित में मिलनी चाहिए। आज मोदी साहब खुद प्रधानमंत्री हैं तो MSP की गांरटी कानून में क्यों नहीं दे रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आंदोलन करने वालों को आंदोलनजीवी, परजीवी कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआईएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि “मोदी ने असहमतिपूर्ण आवाज़ों, न्याय के लिए लड़ने वाले नागरिकों, अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया शब्द ‘आंदोलनजीवी ‘ गढ़ा है। असहमति का यह अवमूल्यन तानाशाही शासन की एक क्लासिक लकीर है। किसान आंदोलन इस तानाशाही अहंकार को हराएगी!”

दिल्ली कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनिल चौधरी ने संसद भवन में एमएसपी पर प्रधानमंत्री मोदी की झांसेबाजी की क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा है “पहले मोदी जी सबके अकाउंट में 15 लाख देंगे। फिर 10 करोड़ बेरोज़गारों को नौकरी देंगे। फिर पूरे भारत को स्वच्छ बनाएँगे। फिर देश से काला धन खत्म करेंगे। फिर किसानों को MSP भी देंगे। समझ गए ना?” 

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मोदी के ‘आंदोलनजीवी’ का काउंटर करते हुए मोदी को ‘भाषणजीवी’ बताते हुए कहा है “170 किसान आंदोलन में शहीद हो गए वो कड़कती ठंड में पानी की बौछारें ओर आँसू गैस के गोले झेल रहे हैं भाजपा के नेता अन्नदाताओं को आतंकवादी ओर ख़लिस्तानी बोल कर अपमानित कर रहे हैं और आज हमारे भाषण वीर प्रधानमंत्री ने किसानों को आन्दोलन जीवी कह कर उनका मज़ाक़ उड़ाया #भाषणजीवीPM। “

युवा राजद के ट्विटर पेज से सदन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘आंदोलनजीवी’ शब्द को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से संबद्ध करते हुए  कहा गया है कि -“आन्दोलनजीवी’ तो महात्मा गांधी भी थे! पूरा स्वतंत्रता संग्राम ही आंदोलनजीवी था! अब समझ आया कि अंग्रेजों के खबरियों को आंदोलन शब्द से नफरत क्यों है!

आंदोलन तो सत्ता के दमन और अहंकार के विरुद्ध नागरिकों की अभिव्यक्ति है! बिना अभिव्यक्ति और संवाद के कैसा लोकतंत्र?”

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा है, “हम अपने पीएम की ओर देख रहे थे लेकिन उन्होंने निराश किया। आंदोलनों के माध्यम से लोकतंत्र गहरा हो जाता है। बीजेपी का जन्म जनसंघ से हुआ था, जिसने कभी कोई आंदोलन नहीं किया, बल्कि उन पर कुठाराघात किया। मुझे यह अप्रिय लगता है कि पीएम भारत के अपने लोगों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।”

कांग्रेस नेता व पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि “ये शर्मनाक है कि प्रधानमंत्री मोदी असंतुष्टों,आंदोलनकारियों को इस तरह अपमानित कर रहे हैं। असहमति लोकतंत्र का सार है। बीजेपी कहती है कि मेरा रास्ता या आप राष्ट्रविरोधी है। मानवाधिकार कोई सीमा नहीं जानता। प्रधानमंत्री द्वारा फडीआई  को ‘विदेशी विनाशकारी विचारधारा’ के रूप में विरूपित करते देखकर निराशा हुई।”

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मीडिया प्रभारी रंदीप सिंह सुरजेवाला ने अपने तरीके से पीएम मोदी की घेरेबंदी की। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि मैथलीशरण जी आज होते तो मोदी सरकार के लिये यूँ कहते,

“आपने अवसर सिर्फ़ पूँजीपतियों के लिए गढ़ा है,

किसान तो चौराहे पर चुपचाप महीनों से अपने हक़ माँगता पड़ा है,

आपका कर्मक्षेत्र सत्ता के स्वार्थों से भरा है,

पल-पल है अनमोल, अरे भारत उठ, आँखें खोल..”

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये,

वक्तव्यों और व्यवहार में ये अंतर क्यों है,

ये जवाब दीजिये?

1) क्या ये सही नहीं कि सत्ता संभालते ही 12 जून, 2014 को मोदी सरकार ने राज्यों द्वारा समर्थन मूल्य के ऊपर दिए जा रहे ₹150/क्विंटल बोनस बंद करवा दिया?

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये -:

2) क्या ये सही नहीं कि मोदी सरकार ने दिसंबर 2014 में किसानों के हक़ के भूमि के ‘उचित मुआवज़ा कानून’ को एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाकर पूंजीपतियों के हक़ में बदलने की षड्यंत्रकारी कोशिश की?

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये-:

3) क्या ये सही नहीं कि आपने सुप्रीम कोर्ट में फरवरी 2015 में शपथ पत्र देकर कहा कि किसानों को अगर लागत + 50% से ऊपर समर्थन मूल्य दिया तो बाज़ार ख़राब हो जाएगा अर्थात् आप पूँजीपतियों के पक्ष मे खड़े हो गए थे।

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब  दीजिये-:

4) क्या ये सही नहीं कि खरीफ 2016 से प्रारंभ ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में साल 2019 तक ₹26,000 करोड़ का मुनाफ़ा ‘निजी कंपनियों’ को पहुँचाया गया, अन्यथा ये राशि भी किसानों के खाते में जाती?

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये-:

5) क्या ये सही नहीं कि PM किसान निधि के नाम पर ₹6,000 सालाना किसानों के खाते में डालने के क़सीदे तो पढ़े जा रहे हैं पर दूसरी और पिछले 6 सालों में ₹15,000 प्रति हेक्टेयर खेती पर ‘टैक्स’ लगा दिया?

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये-:

6) क्या ये सही नहीं कि 73 साल में पहली बार खेती पर GST लगाया – खाद पर 5%, कीटनाशक दवाईयों से लेकर कृषि यंत्रों पर 12% से 18 प्रतिशत तक?

डीज़ल पर 820% एक्साइज क्यों बढ़ाई?

भारत की आँखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये-:

7) क्या मंडी ख़त्म करने से MSP प्रणाली ख़त्म नहीं हो जाएगी? किसान को MSP कौन देगा, कैसे देगा?

क्या सही नहीं है कि इन तीनों कृषि विरोधी काले कानूनों में जमाखोरों को असीमित मात्रा में जमाखोरी की छूट दी गई है?

किसान के होठों पर वही है जो उसके दिल में है।

किसान के साथ छल नहीं न्याय कीजिए।

किसान के साथ धोखा नहीं, धर्म निभाइये।

किसानों की राह में कीलें-काँटे नहीं,

काले क़ानून ख़त्म करने का साहस दिखाइये।

#RajyaSabha

लफ़्फ़ाज़ी और जुमलेबाजी के अलावा #RajyaSabha में कुछ ठोस नहीं कह पाए #Modi जी।

न 75 दिन से आंदोलनरत किसानों के लिए कोई ठोस आश्वासन और ना सीमा में घुसपैठ किए चीन पर एक शब्द।

आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री वास्तव में पीएम नहीं, “प्रचारक” की भूमिका में नज़र आए।

दुर्भाग्यपूर्ण सत्य ।

आंदोलनकारी किसानों की राह में कीलें बिछाकर #मोदी जी #RajyaSabha में किसानों से कह रहे हैं कि बात करिए, आंदोलन खत्म करिए..

ये दाढ़ियाँ, ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं,

हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं।

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार,

सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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