Saturday, October 16, 2021

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हवाला के पैसे से बीजेपी ने लड़ा केरल में चुनाव!

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केरल में भाजपा का खाता भी नहीं खुला और पार्टी के अस्तित्व पर ही गंभीर प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा है। एक ओर राजमार्ग डकैती के एक मामले की कथित हवाला केस के रूप में हो रही जांच के साथ कई अन्य विवादों ने भाजपा की केरल इकाई को हिलाकर रख दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने केरल इकाई को मुहैया कराए गए चुनावी फंड के वितरण और उनके इस्तेमाल की जाँच के लिए  तीन सदस्यीय ‘स्वतंत्र’ समिति का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट पार्टी आला कमान को भेज दी है। केरल में भाजपा के कई नेताओं की केरल पुलिस द्वारा 3.5 करोड़ रुपये की राजमार्ग डकैती के संबंध में जांच की जा रही है, जिसके बेहिसाब चुनावी फंड होने का संदेह है और इसके तार हवाला रैकेट से जुड़ा माना जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ सुरेंद्रन के निजी सहयोगी से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है।

दूसरी और केरल के कासरगोड जिले की एक अदालत ने सोमवार को पुलिस को राज्य बीजेपी प्रमुख के. सुरेंद्रन और पार्टी के दो अन्य नेताओं के खिलाफ एक शिकायत पर चुनाव कानूनों के तहत मामला दर्ज करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने यह अनुमति एक उम्मीदवार के उस आरोप पर दी है, जिसमें उसने कहा है कि उसे 6 अप्रैल की विधानसभा चुनाव में अपना नामांकन वापस लेने के लिए पैसे दिए गए थे।

बीएसपी उम्मीदवार के. सुंदरा ने पिछले हफ्ते मीडिया के सामने स्वीकार किया था कि उन्हें मंजेश्वरम सीट से चुनाव लड़ने के लिए 2.5 लाख रुपये और एक स्मार्टफोन दिया गया था, जहां से सुरेंद्रन चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि सुरेंद्रन के जीतने पर उन्हें कर्नाटक में 15 लाख रुपये, एक घर और एक वाइन पार्लर की पेशकश की गई थी। हालांकि, जब 2 मई को वोटों की गिनती हुई, तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ उम्मीदवार ए.के.एम. अशरफ ने सुरेंद्रन को 745 मतों के अंतर से हराया। इस मामले में मंजेश्वरम से सीपीएम उम्मीदवार वी.वी. रामेसन शिकायतकर्ता हैं, जो तीसरे स्थान पर रहे। कासरगोड के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट ने सुरेंद्रन और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी है। हालांकि, उसने फिलहाल किसी भी गिरफ्तारी से इंकार किया है।
बीएसपी प्रत्याशी के खुलासे के बाद से सत्तारूढ़ सीपीएम के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है। हालांकि, सुरेंद्रन और उनकी पार्टी ने इस आरोप का तुरंत खंडन किया।

दरअसल 2016 के विधानसभा चुनावों में, सुरेंद्रन 89 मतों के मामूली अंतर से हार गए थे और उस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले सुंदरा को 467 वोट मिले थे। बीजेपी को लगा कि इस बार सुंदरा के बीएसपी उम्मीदवार के रूप में आने से उनका नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में सुरेंद्रन के नाम के ठीक पहले आएगा और यह सुरेंद्रन की किस्मत को खराब कर सकता है। हालांकि सुंदरा ने नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन अपने पद से इस्तीफा देते हुए नाम वापस ले लिया था।

भाजपा आला कमान द्वारा समिति के तीनों सदस्य- रिटायर सिविल सेवा अधिकारी सीवी आनंदा बोस, जैकब थॉमस और ई. श्रीधरन फिलहाल पार्टी से जुड़े हुए हैं और तीनों ही सदस्यों से हाल ही में समाप्त हुए चुनाव से ठीक पहले भाजपा की केंद्रीय इकाई द्वारा राज्य इकाई को भेजे हुए फंड के बारे में विभिन्न नेताओं और प्रत्याशियों से बात करके एक रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया था। जैकब थॉमस एक पूर्व आईपीएस अधिकारी और श्रीधरन दिल्ली मेट्रो के पूर्व प्रमुख के रूप में अप्रैल में हुए चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, इससे पहले वे पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं थे और इसलिए उन्हें किसी खास खेमे से जुड़ा हुआ नहीं माना जा रहा है। वहीं, सीवी आनंदा बोस एक रिटायर आईएएस अधिकारी हैं। इनमें से कम से कम एक ने इंडियन एक्सप्रेस को पुष्टि की है कि रिपोर्ट जमा कर दी गई है। बताते हैं कि रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने मांगी थी।

चुनाव में अपमानजनक प्रदर्शन के बाद गुटबाजी से त्रस्त राज्य इकाई में नेतृत्व परिवर्तन की शिकायतों और मांगों से घिरे पार्टी नेतृत्व ने राज्यसभा सांसद सुरेश गोपी को राज्य के नेताओं से सूचना एकत्र करने के लिए भी कहा है। स्वतंत्र मानी जाने वाली टीम से रिपोर्ट लेने का शीर्ष नेतृत्व का कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष राज्य मामलों के प्रभारी थे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब केरल में भाजपा नेताओं के एक वर्ग ने बीएल संतोष के खिलाफ शीर्ष नेतृत्व से शिकायत की है, जिस पर उन्होंने राज्य इकाई के प्रमुख के. सुरेंद्रन के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट का पक्ष लेने का आरोप लगाया है।

प्रदेश पार्टी नेतृत्व को इसके बाद और शर्मिंदगी का सामना तब करना पड़ा जब जनथिपथ्य राष्ट्रीय सभा के एक नेता ने दावा किया था कि उनकी पार्टी के प्रमुख सीके जानू ने सुरेंद्रन से 10 करोड़ रुपये की मांग की थी और आखिरकार 6 अप्रैल के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में लौटने के लिए 10 लाख रुपये पर समझौता किया गया था। हाल ही में समाप्त हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा अपनी एकमात्र सीट नेमोम, माकपा से हार गई और उसका वोट प्रतिशत भी 2016 में 14.46 प्रतिशत से घटकर 2021 में 11.30 प्रतिशत पर आ गया है।

कोडकारा थाने में 7 अप्रैल को डकैती की एक रिपोर्ट दर्ज की गई, उसमें बताया गया कि 3 अप्रैल को कोझिकोड-कोच्चि राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक कार से बदमाशों ने 25 लाख रुपये लूट लिए हैं। बाद में जब इस मामले की जांच हुई तो पता चला कि लूटी गई राशि पच्चीस लाख नहीं बल्कि 3.5 करोड़ थी। लेफ्ट सरकार ने आरोप लगाया है कि भाजपा इस पैसे का इस्तेमाल चुनावी खर्च में करने वाली थी। कांग्रेस ने भी इस मामले की न्यायिक जांच करवाने की मांग की है।

केरल की सत्ताधारी पार्टी सीपीआई (एम) ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसने केरल विधानसभा चुनावों में हवाला के पैसे का इस्तेमाल किया है। कोडाकारा डकैती मामले में लेफ्ट द्वारा कहा जा रहा है कि वे पैसे भाजपा के चुनाव प्रचार के लिए ले जाए जा रहे थे। इस पर भाजपा ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा है कि सीपीआई (एम) भाजपा से राजनीतिक बदला ले रही है।भाजपा के बड़े नेताओं ने आरोप लगाया है कि कोडाकारा में हाइवे पर डकैती करने वाले आरोपी लेफ्ट पार्टियों से जुड़े हुए हैं और केरल पुलिस, सत्ताधारी पार्टी सीपीआई(एम) की आज्ञानुसार एक राजनीतिक ऑपरेशन चला रही है।

इस मामले पर केरल भाजपा की कोर टीम ने उसके नेताओं को बदनाम करने का आरोप लगाया है।कोडाकारा डकैती में सीपीआई (एम) का हाथ होने की बात कहते हुए भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन का समर्थन किया है और कहा है कि लेफ्ट पार्टियाँ उनसे व्यक्तिगत खुन्नस निकाल रही हैं और उनके परिवार के प्रति लगातार झूठा प्रचार कर रही हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि पुलिस डकैती करने के आरोपियों की कॉल लिस्ट निकालने की बजाय, जिस उद्योगपति धर्मराजन ने शिकायत की थी उसकी कॉल लिस्ट जांच रही थी।  डकैतों से पैसे रिकवर करने की बजाय पुलिस इस बात की रिसर्च कर रही थी कि जिस आदमी की कार से डकैती हुई है, जिसके पैसे गए हैं, वो कैसे भाजपा को चुनावों में मदद पहुंचा रहा था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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