पेट्रोल और डीजल के जरिये आम लोगों को लूट कर कारपोरेट्स की जेंबे भर रही है सरकार

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एक ओर देश की हर हिस्से में पेट्रोल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर पार कर चुके हैं या फिर 100 के आंकड़े के बेहद नजदीक हैं और डीजल के दाम पेट्रोल से लगभग 10 रुपए प्रति लीटर कम हैं। कहा जा सकता है कि 100 रुपए प्रति लीटर अब एक सामान्य दाम है जिस पर पेट्रोल बिक रहा है। आर्थिक तबाही झेल रहे देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से चतुर्दिक मंहगाई बढ़ रही है। कोरोना की मार से पहले से ही गरीबी, बेरोजगारी झेल रही देश की लगभग तीन चौथाई आबादी भुखमरी के कगार पर पहुंच रही है। दूसरी ओर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के कार्पोरेट्स दोस्त, प्राइवेट बैंक के चेयरमैन, कम्पनियों के प्रमोटर और देश के बड़े एनबीएफसी की दुरभिसन्धि से देश के आम आदमी के जमा पैसों को लूट रहे हैं। ताजा मामला सीजी पावर और अवंता ग्रुप के गौतम थापर और दूसरे आरोपियों के खिलाफ स्टेट बैंक से 2435 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने में दर्ज़ एफआईआर का है, जो क्रोनी कैपिटलिज़्म का बहुत ज्वलंत उदाहरण है।   

इसे ही क्रोनी कैपिटलिज़्म कहा जाता है जिसमें बैंक के चेयरमैन, कम्पनियों के प्रमोटर और एनबीएफसी एक कार्टेल बना कर एक दूसरे की कंपनियों में हजारों करोड़ की राउंड ट्रिपिंग करते हैं। कभी इस पैसे को कर्ज के रूप में दिखाया जाता है तो कभी शेल कम्पनियों के मार्फ़त हेराफेरी की जाती है। इसका खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ता है और बैंकों में जमा उसका पैसा एनपीए की भेंट चढ़ जाता है या कार्पोरेट्स के कर्ज माफ़ी से उसकी गाढ़ी कमाई से वसूले टैक्स की अपरोक्ष लूट कर ली जाती है।

केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने सीजी पावर ओर अवंता ग्रुप के गौतम थापर और दूसरे आरोपियों के खिलाफ बैंक से 2435 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज कर छापेमारी की है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई स्थित एक प्राइवेट कंपनी के खिलाफ शिकायत मिलने पर सीबीआई ने ये मामला दर्ज किया है। इससे पहले भी गौतम थापर पर यस बैंक से 466 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है, जिसकी जांच चल रही है।

एसबीआई ने अपनी शिकायत में कहा है कि गौतम थापर और दूसरे आरोपियों ने अपनी मुंबई स्थित कंपनी (सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन लिमिटेड) की फर्जी ऑडिट रिपोर्ट दिखाकर लोन के लिए अप्लाई किया। जैसे ही लोन पास हो गया तो उन्होंने सारा पैसा दूसरी कंपनियों में डायवर्ट कर दिया। जब एसबीआई को इसका पता चला तो उन्होंने तुरंत सीबीआई को इसकी जानकारी दी और मामला दर्ज कराया। इसके बाद एजेंसी ने दिल्ली, मुबंई और गुरुग्राम की कुछ जगहों पर छापेमारी की।

सीबीआई ने सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन लिमिटेड, तत्कालीन सीएमडी गौतम थापर, के.एन. नीलकंठ, तत्कालीन सीइओ और एमडी, माधव आचार्य, तत्कालीन कार्यकारी निदेशक और सीएफओ वेंकटेश राममूर्ति, तत्कालीन सीएफओ बी हरिहरण, तत्कालीन डायरेक्टर ओमकार गोस्वामी, तत्कालीन नॉन गैर-कार्यकारी निदेशक और दूसरे अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं गौतम थापर के खिलाफ ये नया मामला है। इससे पहले 9 जून को भी सीबीआई ने गौतम थापर और दूसरे अन्य आरोपियों के साथ एस बैंक के साथ 466 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर देश भर में 14 जगहों पर छापेमारी की थी।

सीजी पॉवर की सबसे बड़ी कम्पनी क्राम्पटन ग्रीव्स थी जिसे कुछ साल पहले गौतम थापर ने बेच दिया, कुछ दिन पहले गौतम थापर पर यस बैंक के मामले में 466 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। गौतम थापर का यह केस इस बात का बहुत अच्छा उदाहरण है कि प्राइवेट बैंकों ओर एनबीएफसी के जरिए क्रोनी कैपिटलिज़्म भारत में कैसे खेल खेल रहा है, कैसे मनी लांड्रिंग होती है कैसे राउंड ट्रिपिंग की जा रही है।

आर्थिक मामलों के जानकार गिरीश मालवीय के अनुसार यह कहानी है दिल्ली के सबसे पॉश इलाके लुटियंस जोन के अमृत शेरगिल मार्ग पर 1.2 एकड़ जमीन पर बने बंग्ला नंबर 40 की। यह बंग्ला सालों से गौतम थापर के आधिपत्य में था जब गौतम थापर कर्ज में घिरने लगे तो उन्होंने यह बंग्ला आईसीआईसीआई बैंक के पास गिरवी रख दिया था। 2016 में इसे अवंता समूह को दिए गए 400 करोड़ रुपए के ऋण के बदले यस बैंक के पक्ष में जारी कर दिया गया। यस बैंक ने यह ऋण 2016 में पट्टे के किराये के एवज में मंजूर किया। यह करार अवंता रीयल्टी और उसके समूह की एक अन्य कंपनी बिल्ट ग्राफिक्स पेपर प्राइवेट लि. के बीच किया गया। यह एक हास्यापाद किराया करार था क्योंकि किराया मूल्य को एक करोड़ रुपए सालाना से बिना किसी आधार के बढ़ाकर 65 करोड़ रुपए कर दिया गया। बिल्ट से अवंता रीयल्टी को कोई किराया नहीं मिला। लेकिन इस करार के बहाने यस बैंक ने अवंता ग्रुप को नया 600 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट लोन पास कर दिया।

यानी यही से इस घोटाले की शुरुआत हो गयी थी उस वक्त यस बैंक के राणा कपूर देश के सफलतम बैंकर्स की लिस्ट में शामिल थे। यह 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी का जुमला भी राणा कपूर का ही है जिसे बाद में मोदी ने लपक लिया।

अवंता ग्रुप के कर्ज बढ़ते जा रहे थे गौतम थापर मुश्किलों से घिरे हुए थे उन्होंने यह बंग्ला बेचने का फ़ैसला कर लिया लेकिन यह तो पहले से ही गिरवी था। अब राणा कपूर का असली खेल शुरू हुआ, राणा कपूर की पत्नी बिंदु कपूर के नाम से 2017 में एक शेल कंपनी की स्थापना की गई जिसका नाम ब्लिस अडोब प्राइवेट लिमिटेड रखा गया। यस बैंक की तरफ से इस बंग्ले की बिक्री को लेकर ब्लिस अडोब लिमिटेड को बोली के लिए आमंत्रित किया गया। डील फाइनल हुई और राणा कपूर की पत्नी की कम्पनी ब्लिस अडोब लिमिटेड ने 380 करोड़ देकर बंग्ला खरीद लिया। इस डील के बदले में अवंता रियल्टी एंड ग्रुप कंपनीज को यस बैंक 1900 करोड़ रुपये का एक नया कर्ज और दे दिया।

राणा कपूर भी तब तक मुश्किलों से घिर चुके थे, इसलिए उन्होंने इस बंग्ले को तुरन्त ही इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लि. के पास 685 करोड़ रुपए के ऋण के लिए गिरवी रख दिया गया। 2018 में जब आरबीआई ने राणा कपूर के ऊपर कर्ज और बैलेंस शीट में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्हें चेयरमैन के पद से जबरन हटाया गया तब जाकर यह सारे मामले खुले कि किस तरह से यस बैंक ने एनपीए की वसूली प्रक्रिया धीमी कर बड़ी बड़ी कंपनियों को लाभ पुहंचाया।

यस बैंक के प्रमोटर राणा कपूर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में पता चला कि ऐसे ही दूसरे मामलों में रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी, एस्सेल ग्रुप के प्रमोटर सुभाष चंद्रा, जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल और इंडियाबुल्स के चेयरमैन समीर गहलोत तक शामिल हैं। इस बंग्ले से जुड़ी जांच के सिलसिले में नयी दिल्ली में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लि. के कार्यालय में भी छापेमारी की गई थी।

राणा कपूर का रोल डीएचएफएल के साथ भी सामने आया यह भी पता लगा कि वाधवान के साथ मिलकर डीएचएफएल कंपनी को यस बैंक के जरिए वित्तीय मदद पहुंचाई। इसके बदले में कपूर और उनके परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस काम के लिए कपूर परिवार की कंपनियों का इस्तेमाल हुआ।

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते खुदरा मूल्य पर मोदी के मंत्री कह रहे हैं कि सरकार के पास आय नहीं है, इसलिए पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती नहीं की जा सकती है। यह तर्क अपने आप में सरकार की आर्थिक नाकामी को दर्शाता है। ऐसा नहीं कि पेट्रोल और डीजल के दाम कोविड-19 के दौरान ही चर्चा का विषय बने हैं। इसके पहले से ही केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर बड़ा टैक्स वसूल रही थी। दरअसल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम बहुत घट गया था इसलिए केंद्र सरकार ने अपनी आमदनी बरकरार रखने के लिए समय समय पर टैक्स बढ़ाये, लेकिन जब कच्चे तेल का दाम बढ़ने लगा तो सरकार ने उसी अनुपात में बढ़ाये गये टैक्स को कम नहीं किया। अब कच्चे तेल का दाम जैसे जैसे बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में नेचुरल गैस की कीमतों में तेजी का रुख है। इसका असर जल्द ही घरेलू खनन क्षेत्रों से उत्पादित गैस पर भी दिखाई देगा। सरकार की तरफ से इस वर्ष पहली अक्टूबर को घरेलू गैस की नई कीमतों का निर्धारण होगा। तेल-गैस खनन क्षेत्र की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने कहा कि इस बार इनकी कीमत में 60 फीसद की वृद्धि लगभग तय है। ओएनजीसी के सीएमडी सुभाष कुमार के अनुसार क्रूड व गैस की कीमतें भी बढ़ रही हैं और सरकार ने ग्राहकों को दी जाने वाली सब्सिडी भी समाप्त कर दी है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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