Tuesday, March 21, 2023

किसान अन्दोलन की नाव से पार उतरने की कोशिश में ओमप्रकाश चौटाला

जगदीप सिंह सिंधु
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25 सितम्बर को जींद में देवी लाल जयंती पर हुयी सम्मान रैली में जुटी भीड़ और अप्रत्याशित रुप से पहुंचे भाजपा नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह द्वारा मंच से ताऊ देवी लाल की प्रशंसा करते हुये प्रधानमंत्री के पद को किसी और के लिये त्याग करने की उनकी कुर्बानी को प्रेरणा का स्रोत बता कर हरियाणा राजनीति के ठहरे पानी में गहरी हलचल पैदा कर दी । ज्ञात रहे कि वीरेंद्र सिंह के पुत्र ब्रिजेंदर सिंह वार्तमान में हिसार लोकसभा से भाजपा के सांसद हैं ।

अगस्त 2014 में वीरेंद्र सिंह ने जींद में ही हरियाणा चुनाव से ऐन पहले हुयी भाज पा की रैली में मोदी लहर के चलते अपनी चार दशक पुरानी कांग्रेस पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। पहली मोदी कैबिनेट में वीरेंद्र सिंह ने केन्द्रीय मंत्री का पद प्राप्त किया। 2019 में अपने बेटे को हिसार लोकसभा से प्रत्याशी बनाने में सफल हुये । दिसम्बर 2020 आते आते 3 नये कृषि कानूनों के विरोध में आरम्भ हुये किसान आंदोलन के पक्ष में बोलते हुये कहा के ये आंदोलन ‘प्रत्येक आमजन’ का अन्दोलन है । किसान अन्दोलन के 9 माह पूरे होने पर वीरेंद्र सिंह ने कहा था कि समय आ गया है कि एक गलती को सुधारा जाये , सरकार को कोई सौहार्दपूर्ण हल निकलना चाहिये।

वीरेंद्र सिंह के यूँ ईनेलो की रैली मे पहुँचने को एक ओर जहां अचरज से देखा जा रहा है वहीं कई तरह की अटकलें भी राजनीतिक गलियारों में रेंगने लगी हैं। कृषि कानूनों के विरुद्ध उपजे आंदोलन के विस्तार मे हरियाणा के किसानों , ग्रामीण वर्ग व शहरी आमजन का जिस प्रकार योगदान हुआ उसने प्रदेश के अन्य राजनीतिक दलों की चिंतायें बढ़ा दी हैं । किसान आंदोलन के शांतिपूर्वक रहते हुये इतना लम्बा खिंच जाने से चिंतायें केन्द्रीय सरकार व ‘प्रधान सेवक ‘ की भी बढ़ी हुयी हैं ।अन्य प्रदेशों में होने वाले चुनावों विशेषकर उतर प्रदेश में किसान अन्दोलन के प्रभावों को कम करने के लिये मोदी व भाजपा कई रणनितियों पर समानान्तर काम कर रही हैं ये भी अनदेखा नहीं किया जा सकता ।
पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की 108वीं जयंती के मौके पर शनिवार को जींद में इनेलो ने ओमप्रकाश चौटाला की अगुवाई मे अपनी ‘खोयी हुयी राजनीतिक जमीन ‘ को फिर से हासिल करने के लिये सम्मान दिवस रैली का आयोजन किया था ।शिक्षकों की नियुक्ति मे भ्रष्टाचार के मामले मे अपनी सजा पूरी कर चुके 86 वर्षीय चौटाला एक बार फिर से राजनीति में सक्रिय हो गये हैं । ईनेलो का समर्थक मतदाता आधार अधिकतर किसान कमेरा मजदूर व ग्रामीण वर्ग में ही है । ओमप्रकाश चौटाला ने फिर से अपने परम्परागत वोट बैंक को केन्द्रित किया है ।

देवी लाल के पौत्र और ओम प्रकाश चौटाला के पुत्र अभय सिंह चौटाला ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुये वर्तमान सरकार के द्वारा अपनाये गये असंवेदनशील रुख व हठधर्मिता के खिलाफ फरवरी 2021 में हरियाणा विधान सभा से त्यागपत्र दे दिया था । लेकिन विगत में ओम प्रकाश चौटाला भाजपा से समझौता करके प्रदेश में मुख्यमंत्री बन कर सरकार चला चुके हैं यह भी भूलने योग्य नहीं है ।

रैली में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ,जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी, वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह,जैसे बड़े नेताओं ने शिरकत की। रालोद के जयंत चौधरी , पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा , समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव ईनेलो की रैली में नहीं पहुँचे। ओम प्रकाश चौटाला एक गैर कांग्रेस गैर भाजपा तीसरा मोर्चा बनाने के प्रयासों मे लगे हैं । जिन राजनीतिक दलों को चौटाला एकजुट करने में लगे हैं वो सभी दल मूलरुप से कांग्रेस के विरोधी रहे हैं।

कृषि कानूनों पर हस्ताक्षर कर और इनके लाभों की व्याख्या करने वाले पंजाब के अकाली दल ने प्रदेश के पिछले चुनावों में बेअदबी मामले मे पंथक वोट चुकने के बाद अपने मजबूत किसान वोट को पंजाब में खो लिया है । पंजाब मे भाजपा के साथ अकाली दल का भी भारी विरोध किसानों द्वारा किया जा रहा है। अब अकाली दल द्वारा गैर कांग्रेस गैर भाजपा तीसरे मोर्चे को बनाने का आह्वान करना समान्य समझ से परे है ।

रैली में बोलते हुये चौटाला ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने साजिश और षड्यंत्र के तहत मुझे 10 साल के लिये जेल भिजवाया। अब भविष्य में प्रदेश में ईनेलो की सरकार बनेगी। चौटाला ने कहा कि किसान अन्दोलन कभी फेल नहीं हुये। किसान अन्दोलन ने भाईचारे को मजबूत किया है । अब एकजुट हो कर इस वर्तमान लुटेरी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना है । चौटाला ने आगे कहा कि ऐलनाबाद के उपचुनाव में इनेलो की जीत के बाद प्रदेश सरकार में भगदड़ मच जायेगी ओर जो लोग इनके साथ गठबंधन मे हैं वो इनको छोड़ कर वापस हमारे साथ शामिल हो जायेंगे। ये सरकार अल्पमत में आ जायेगी तब निश्चित रुप से मध्यावधि चुनाव होंगे ।

चौटाला ने अपने संबोधन में कांग्रेस पार्टी पर खास तौर पर निशाना साधा ।कांग्रेस पार्टी ने आरम्भ से ही किसान आंदोलन को समर्थन की खुली घोषणा कर दी थी । किसानों के हितैषी होने का दावा करने वाले चौटाला पूरे संबोधन में मोदी सरकार द्वारा लाये गये तीनों कृषि कानूनों के प्रावधानों से भविष्य में होने वाले प्रभावों पर बोलने से बचते रहे । रैली से एक दिन पहले टाइम्स ऑफ इंडिया के सवाल के जवाब में चौटाला ने दुष्यंत चौटाला की ईनेलो में वापसी की संभावनाओं को भी पूर्ण खारिज नहीं किया। यहां याद रखना लाज़िमी हो जाता है कि जजपा ने 2019 में भाजपा मोदी खट्टर व कांग्रेस के विरोध को ही अपना आधार बना कर चुनाव लड़ा था और जीतने के बाद भाजपा को समर्थन देकर प्रदेश में भाजपा की गठबंधन सरकार बनवायी थी ।

कुछ दिन पहले बसपा हरियाणा के अध्यक्ष रहे जगदीश झींडा अचानक फिर से सक्रिय हो गये और करनाल में एक गुरुद्वारा में प्रेस वार्ता करने को लेकर गुरुद्वारा प्रबंधन से तकरार करके माहौल को अस्थिर करने के प्रयास किये जिसमें स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप करके मामले को संभाला। किसानों के मुआवजे में किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी द्वारा कथित अनियमितताओं के आरोप लगाये । कैथल करनाल कुरुक्षेत्र यमुनानगर अम्बाला में सिख किसानों की बहुतायत है ।

सत्ता की शतरंज में प्यादों की चाल को समझना उतना ही महत्वपूर्ण जितना खेलने वाले की मंशा को जानना। बिसात को नियंत्रित करने के लिये भ्रम की चालें अक्सर यहाँ चली जाती हैं ।
सत्ता को नियंत्रंण मे रखने के लिये कई राजनीतिक संधियां प्रत्यक्ष व अप्रतयक्ष रुप में की जाती हैं । सत्ता के दूत अलग अलग खेमों में सत्ता अनुकूल धारणायें बनाने में समय समय पर अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।
(जगदीप सिंह सिंधु वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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