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चिदंबरम ईडी की हिरासत में जाना चाहते हैं, ईडी लेना नहीं चाहती

आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस के मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और ईडी के बीच शह और मात का खेल जारी है। चिदंबरम सीबीआई हिरासत में पूछताछ से जान गए हैं कि आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई और ईडी के पास कोई ठोस सबूत उनके खिलाफ नहीं हैं, इसलिए उन्होंने न्यायिक हिरासत में रहते हुए ईडी की हिरासत में जाने का प्रार्थनापत्र अदालत में डाल दिया और हकीकत जानते हुए ईडी ने उन्हें अपनी हिरासत में यह कहते हुए लेने से इंकार कर दिया की अभी इस मामले में उसे आधा दर्जन लोगों से पूछताछ करनी है। इस तरह प्रकारांतर से ईडी ने स्वीकार कर लिया कि उसके पास फिलवक्त ठोस सबूत नहीं हैं।

फिलवक्त इसी मामले में सीबीआई केस में चिदंबरम दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। चिदंबरम ने सीबीआई कोर्ट में सरेंडर प्रार्थनापत्र डालकर ईडी  के सामने सरेंडर करने की इच्छा जताई थी। लेकिन ईडी अचानक अपने रुख से पलट गया और कोर्ट से कहा कि  चिदंबरम से हिरासत में पूछताछ करने से पहले कुछ पहलुओं की जांच करने की जरूरत है। ईडी उचित समय पर चिदंबरम को गिरफ्तार करेगी। सीबीआई अदालत ने पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की सरेंडर याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, ईडी ने 12 सितंबर को कोर्ट से कहा था कि आईएनएक्स मीडिया मामले में चिदंबरम की गिरफ्तारी की जरूरत है और उचित समय पर ऐसा किया जाएगा।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा था कि भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में चिदंबरम पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं और सबूतों से छेड़छाड़ की स्थिति में नहीं हैं। वहीं चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि ईडी की दलील दुर्भावनापूर्ण है और यह उनके मुवक्किल को नुकसान पहुंचाने पर केंद्रित है।उन्होंने कोर्ट से यह भी कहा कि चिदंबरम जब चाहें समर्पण कर सकते हैं, यह उनका अधिकार है।सिब्बल ने कहा कि ईडी की टीम 20 और 21 अगस्त को चिदंबरम को गिरफ्तार करने के लिए उनके आवास पर गई थी, लेकिन अब वह ऐसा नहीं करना चाहती जिससे कि उनका न्यायिक हिरासत में रहना सुनिश्चित हो सके।

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने दलील दी कि चिदंबरम से हिरासत में पूछताछ करने से पहले कुछ पहलुओं की जांच करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एजेंसी चिदंबरम से हिरासत में सवाल पूछने से पहले 6 अन्य लोगों से पूछताछ करना चाहती है और वह मनी लॉन्ड्रिंग के ऐसे मामले की जांच कर रही है, जो देश के बाहर तक फैला हुआ है। हम उचित समय पर उन्हें गिरफ्तार करेंगे, क्योंकि उसके बाद ईडी के पास हिरासत में उनसे पूछताछ करने के लिए सिर्फ 15 दिन का वक्त रहेगा।

ईडी ने कहा कि फिलहाल हम उनकी हिरासत नहीं चाहते हैं। हम उपयुक्त समय पर इस अदालत का रुख करेंगे। हम 15 दिन का अधिकतम इस्तेमाल करना चाहते हैं।तुषार मेहता ने कहा कि 21 अगस्त से पहले यह मानने का कारण था कि उनको गिरफ्तार करने की जरूरत है और ऐसा आज भी है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद वे उनका सामना जुटाए गए साक्ष्यों से करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि इस समय पुलिस हिरासत प्रदान करने से एक परंपरा बन जाएगी और तब हर आरोपी अदालत के सामने आएगा और इससे जांच एजेंसी की कार्य स्वतंत्रता को बाधित करेगा।

ईडी की दलीलों का विरोध करते हुए सिब्बल और वकील अर्शदीप सिंह ने दावा किया कि एजेंसी चिदंबरम को परेशान करना चाहती है। उन्होंने कहा कि 21 अगस्त के बाद से क्या बदल गया जब वे उन्हें गिरफ्तार करना चाहते थे? ईडी को उन्हें हिरासत में लेने का निर्देश दिया जाना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि ईडी की टीम 20 और 21 अगस्त को चिदंबरम के आवास पहुंची थी, लेकिन अब उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहती। बस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वह न्यायिक हिरासत में रहें।

यहां तक कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष उसने (ईडी) कहा था कि वह उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है। आज का उसका रुख है कि उनकी गिरफ्तारी से पहले वह 6 अन्य से पूछताछ करना चाहती है, जिसका जिक्र पहले कभी नहीं किया गया। भ्रष्टाचार के मामले में 5 सितंबर को चिदंबरम को 19 सितंबर तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। उसी दिन अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चिदंबरम की समर्पण याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के विशेषज्ञ हैं।)

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