चीनी घुसपैठः पीएम के झूठ का सच बता कर रक्षा मंत्रालय ने मारी गुलाटी

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रक्षा मंत्रालय ने चार अगस्त को अपनी वेबसाइट पर चार पन्नों का एक डॉक्यूमेंट अपलोड किया और आधिकारिक रूप से पहली बार स्वीकार किया कि लद्दाख के कई इलाकों में चीनी सेना द्वारा घुसपैठ की गई थी। साइट पर अपलोड किए गए इस डॉक्यूमेंट में रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया कि मई महीने से चीन लगातार एलएसी (Line of Actual Control) पर अपनी घुसपैठ बढ़ाता जा रहा है। खासतौर से गलवान घाटी पैंगोंग त्सो गोगरा हॉट स्प्रिंग (पीपी-17ए) जैसे क्षेत्रों में।

रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज़ के मुताबिक, चीन ने 17 से 18 मई के बीच लद्दाख में कुंगरांग नाला, गोगरा और पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर घुसपैठ (Transgression) की है। पांच मई के बाद से चीन का यह आक्रामक रूप LAC पर नजर आ रहा है। पांच और छह मई को ही पैंगोंग त्सो भारत और चीन की सेना के बीच में झड़प हुई थी।

डॉक्युमेंट में कहा गया था कि मौजूदा गतिरोध लंबा चल सकता है और जो हालात पैदा हो रहे हैं, उन पर त्वरित कार्रवाई की जरूरत हो सकती है।

राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री के झूठ पर सवाल खड़े करते ही रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से हटाया गया डॉक्युमेंट
वेबसाइट पर डॉक्युमेंट अपलोड करने के दो दिन बाद ही प्रतिकूल प्रतिक्रिया मिलती देख मंत्रालय ने इस दस्तावेज़ को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। दरअसल छह अगस्त की सुबह 10:35 पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ख़बर का लिंक शेयर करते हुए ट्विटर पर पूछा, “प्रधानमंत्री झूठ क्यों बोल रहे हैं?”

राहुल गांधी के इस प्रश्न पूछक ट्विट के बाद ही रक्षा मंत्रालय ने उक्त डॉक्युमेंट को अपनी वेबसाइट से हटा दिया।

डॉक्युमेंट हटाए जाने के बाद राहुल गांधी ने एक दूसरा ट्वीट करके सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा, “चीन के खिलाफ खड़े होने की बात तो भूल ही जाइए, भारत के प्रधानमंत्री में उनका नाम लेने तक की हिम्मत नहीं है। चीन के हमारे इलाके में होने से इनकार करने और वेबसाइट से डॉक्युमेंट हटा लेने से तथ्य नहीं बदल जाएंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वदलीय बैठक में क्या कहा था
गौरतलब है कि गलवान घाटी में भारत और चीनी सेना के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 जवानों की मौत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने देश के सामने संदेश में कहा था, “…….न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है….।”

हालांकि प्रधानमंत्री के बयान की चौतरफा आलोचना होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री ने जब कहा कि कोई घुसपैठ नहीं हुई है तो उनका मतलब 15 जून से था। 15 जून को घुसपैठ की कोशिश हुई थी जिसे हमारे जांबाजों ने नाकाम कर दिया।

प्रधानमंत्री का बयान चीन का ढाल बना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘न कोई घुसा है’ वाला बयान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुचर्चित हुआ। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये बयान चीन की ढाल बना और इससे चीन को बड़ी सहूलियत मिली। चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान का इस्तेमाल अतंरार्ष्ट्रीय स्तर पर अपने बचाव में किया। उसने बार-बार उनके बयान को अपने पक्ष में कैश कराया जैसा कि खुद भारत के प्रधानमंत्री कह रहे हैं चीन ने भारतीय सीमा में प्रवेश नहीं किया, न ही कुछ भी गलत किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मई के आखिर में अपने एक टेलिविजन इंटरव्यू में कहा था कि चीन के सैनिक बड़ी संख्या में ‘उस इलाके में अंदर तक आए थे, जहां वे पहले नहीं आया करते थे।’ रक्षामंत्री के बयान के बाद जैसे ही सरकार घिरी आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि बयान का यह गलत मतलब न निकाला जाए कि जैसे चीनी सैनिक एलएसी पर भारतीय क्षेत्र में घुस आए हैं।

प्रधानमंत्री के बयान के बाद पूर्व सैन्य अधिकारियों ने दी थी तीखी प्रतिक्रिया
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल रामेश्वर रॉय ने पीएम मोदी के भाषण को सुनने के बाद लिखा, “आज बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण दिन है। मैं अपने तीन स्टार्स को धन्यवाद देना चाहूंगा कि आज मैं रिटायर्ड हूं और मेरा बेटा आर्मी में नहीं है। मैंने 40 साल तक अपने देश की सेवा की है। सिर्फ एक लक्ष्य के लिए कि मैं अपने देश की सीमाओं और देश की संप्रभुता को सुरक्षित रख सकूं। मैं ये सुनकर चूर-चूर हो गया हूं कि भारत ने चीन के LAC पर बदले हुए दावों को स्वीकार कर लिया है। मेरे जैसे सैनिक के लिए ये बेहद दुखद दिन है।”

वहीं रक्षा मामलों पर लगातार लिखने वाले अजय शुक्ला ने लिखा, “क्या मैं ये देख रहा हूं हूं कि पीएम मोदी ने भारत-चीन सीमा की एक नई लकीर खींच दी। मोदी ने कहा कि भारतीय क्षेत्र में कोई नहीं घुसा है। क्या उन्होंने हमारा गलवान नदी घाटी और पेनगॉन्ग ताशो में फिंगर 4-8 वाला इलाका चीन को दे दिया है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)   

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