Thursday, October 28, 2021

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कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी उतरी भारत के नागरिकता कानून के खिलाफ

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नागरिकता संशोधन कानून का विरोध देश के साथ-साथ विदेशों में भी रफ्तार पकड़ गया है। अमरीका के कुछ विश्वविद्यालयों में शिक्षारत भारतीय छात्रों ने रोष प्रदर्शन किया है। अब कानून के विरोध में कनाडा से पुरजोर आवाज बुलंद हो रही है।

कनाडा में भारतीय पंजाबी, खासतौर से सिख बड़ी तादाद में रहते हैं और सरकार में भी उनकी उल्लेखनीय भागीदारी है। कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी, जिसके वहां 24 सांसद हैं, ने भारत की केंद्र सरकार की ओर से पारित नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ वक्तव्य जारी करते हुए आंदोलन करने का निर्णय किया है।

न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह ने अपने ताजा ट्विट और बयान में कहा है कि भारत सरकार का नागरिकता संशोधन कानून जानबूझकर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव की नीति के तहत वजूद में लाया गया है और उनकी पार्टी इसकी सख्त आलोचना करती है। 

गौरतलब है कि 24 सांसदों वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी कनाडा में अच्छा जनाधार रखती है और अब उसके तमाम सांसद दूसरी पार्टियों के साथ तालमेल करके नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ कनाडा के साथ-साथ दूसरे देशों में जाकर भी इसके खिलाफ मुहिम चलाएंगे।

यह पहली बार नहीं है कि विदेशी सरजमीं से इस कानून के खिलाफ पुरजोर आवाज उठी हो। जिन-जिन देशों में भी पंजाबी और भारतीय अल्पसंख्यक समुदाय हैं, वहां-वहां इसके विरोध में रोज प्रदर्शन, रैलियां और समागम हो रहे हैं।

कनाडा, ब्रिटेन, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और इटली के कई बड़े गुरुद्वारे और उनकी प्रबंधक कमेटियां इस कानून के विरोध में प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं या करने वाली हैं।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद भी नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध टिप्पणी कर चुका है। परिषद ने कहा था कि, “हमें चिंता है कि भारत का नया नागरिकता संशोधन कानून 2019, मूल रूप से पक्षपाती है। हमें उम्मीद है कि भारत की सुप्रीम कोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के मद्देनजर इस कानून पर पुनर्विचार करेगी।”

साफ है कि केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विदेशों में उठ रही विरोध की आवाजें भारत की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक छवि पर अहम सवालिया निशान लगा रही हैं। तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विदेशों में इसका विरोध और तेज होगा। विदेशी मीडिया भी इस कानून पर प्रतिकूल संपादकीय टिप्पणीयां कर रहा है और लगातार निष्पक्ष रिपोर्टिंग भी।

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल जालंधर में रहते हैं।)

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