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Categories: बीच बहस

राजस्थान पर कांग्रेस का देशव्यापी प्रतिरोध, तीन पूर्व कानून मंत्रियों ने पत्र लिख कर सूबे के गवर्नर को किया आगाह

राजस्थान के संकटग्रस्त राजनैतिक हालातों में राजस्थान विधानसभा सत्र बुलाने में हो रहे विलंब के मद्देनज़र कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं (सभी पूर्व कानून मंत्री) कपिल सिब्बल, अश्वनी कुमार और सलमान खुर्शीद ने राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र लिखकर उन्हें आगाह किया है।

पत्र में लिखा गया है –

“मंत्रिपरिषद द्वारा राजस्थान विधानसभा का सत्र बुलाए जाने के लिए आपसे किए गए अनुरोध के बाद हुई देरी के मसले पर हम लोग इस पत्र को लिखने के लिए मजबूर हुए हैं। इसकी वजह से एक संवैधानिक गतिरोध पैदा हो रहा है जिसे टाला जा सकता था”।

पत्र में आगे लिखा गया है  “हम ये मानते हैं कि संविधान की परंपरा, संवैधानिक लोकतंत्र के उसूलों, संविधान के संबंधित प्रावधानों के आधार पर तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार राज्यपाल राज्य विधानसभा का सत्र बुलाने के मामले में मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य है। हाल के ‘नबाम रेबिया-2016’  के अलावा ‘शमशेर सिंह बनाम भारतीय संघ -1974’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच के फैसले में राज्यपाल की स्थिति, उसकी भूमिका और संवैधानिक न्यायिक क्षेत्र में उसकी सीमाओं की विस्तार से व्याख्या की गयी है। एक उच्च पद का अधिकारी होने के नाते आपको भलीभाँति मालूम है कि कोई भी संवैधानिक पदाधिकारी शपथ के मुताबिक संविधान को लिखित और उसकी पूरी आत्मा के साथ लागू करने के लिए बाध्य है। स्थापित संसदीय परंपराओं और संवैधानिक लोकतंत्र के नियमों के मुताबिक यह चीज गवर्नर को संसदीय लोकतंत्र में लोगों की इच्छाओं को प्रकट करने वाली एक चुनी गयी सरकार की बुद्धिमत्ता को मानने के लिए बाध्य कर देती है।

गवर्नर को लिखे अपने पत्र में तीनों पूर्व कानून मंत्रियों ने कहा कि “वास्तव में राज्यपाल का दफ्तर हमारे उन संवैधानिक नियमों के तहत आता है जिसमें वो तमाम किस्म की विभाजनकारी राजनीति की सीमाओं और उसके दबावों से ऊपर होने के साथ ही उससे मुक्त होता है। ऐसा इसलिए है जिससे उस पद पर बैठा व्यक्ति स्वतंत्र और साफ-सुथरे तरीके से काम करते हुए संविधान की रक्षा कर सके”।

“अलग-अलग समयों और दौरों में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के तौर पर काम करने के चलते और संवैधानिक कानून के छात्र के रूप में भी हम लोगों का यह बिल्कुल स्पष्ट मानना है कि स्थापित कानूनी स्थिति के तहत गवर्नर राज्य कैबिनेट की सलाह और उसके मुताबिक विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए बाध्य है”।

मौजूदा परिस्थिति में स्थापित संवैधानिक स्थिति से किसी भी तरह का विचलन जिससे कि बचा जा सकता है, आपके पद के शपथ पत्र का नकार होगा और यह एक संवैधानिक संकट को पैदा कर देगा। हम इस बात को शिद्दत से महसूस करते हैं कि अपने उच्च पद की सच्ची जरूरत के मुताबिक आप कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जो इस तरह का कोई नतीजा दे।

राजस्थान सरकार को अस्थिर करने के मसले को लेकर कांग्रेस का देशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ कैंपेन

राजस्थान में कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के साजिश में लगी केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ़ आज सोमवार को कांग्रेस ने ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ का देशव्यापी अभियान छेड़ते हुए विभिन्न प्रदेशों की कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के राज भवनों के सामने धरना दिया।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और AICC जनरल सेक्रेटरी के प्रभारी, पीएल पुनिया सहित सैकड़ों कांग्रेस नेताओं को राजभवन के सामने विरोध प्रदर्शन करने के चलते यूपी पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया है।

कैंपेन के तहत दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) ने भी राजनिवास पर प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार सहित सभी कार्यकर्ताओं को डिटेन करके नजदीकी थाने ले जाया गया ।

‘स्पीक अप फॉर डेमोक्रेसी’ कैंपेन के तहत हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों ने भी पंचकुला स्थित राजभवन के सामने धरना प्रदर्शन किया।

देश के सभी राज्यों में आज राजभवन के घेराव की अपील करते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कल ट्वीट कर कहा था कि कल (आज) ‘स्पीक फॉर डेमोक्रेसी कैंपेन’ के तहत कांग्रेसी देश के सभी राज्यों में राजभवन के सामने प्रदर्शन करेंगे।

गुजरात में भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजभवन के सामने प्रदर्शन किया।

शुक्रवार को राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने राजभवन में दिया था सांकेतिक धरना

24 जुलाई शुक्रवार को विधानसभा का सत्र बुलाए जाने की मांग को लेकर राजस्थान के कांग्रेस विधायकों ने राजभवन में सांकेतिक धरना दिया था। गहलोत सरकार का कहना है कि कैबिनेट के प्रस्ताव के बावजूद राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुला रहे हैं। जबकि राजभवन का कहना था कि प्रस्ताव में सत्र बुलाए जाने के कारणों का कोई उल्लेख नहीं था। जिसके बाद से ही राजभवन और गहलोत सरकार में तनातनी बनी हुई है।

राज्यपाल ने सीएम गहलोत को लिखी चिट्ठी, कहा- ‘मैं किससे मांगू सुरक्षा’

इससे पहले राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिट्ठी लिखकर राजभवन में धरना, नारेबाजी को लेकर सख्त नाराज़गी जताते हुए कहा था कि “आपकी सरकार मुझे भी सुरक्षा नहीं दे सकती, राजभवन में जो हुआ उसके लिए किससे सुरक्षा मांगें। क्या केन्द्रीय एजेंसी से संपर्क किया जाए?”

राज्यपाल ने लेटर में आगे लिखा था कि “गृह विभाग राज्यपाल की सुरक्षा भी नहीं कर सकता तो कानून व्यवस्था को लेकर आपका क्या मंतव्य है।”

दरअसल मुख्यमंत्री गहलोत की ओर से यह कहा गया कि विधानसभा सत्र नहीं बुलाया गया तो राजभवन का जनता घेराव कर लेगी। इस बात से राज्यपाल नाराज हुए। और कहा कि “राजभवन में धरना देना एक गलत परंपरा और दबाव की राजनीति की शुरुआत तो नहीं है। संवैधानिक मसलों पर निर्णय लेने का अधिकार मुझे संविधान ने दिया है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on July 27, 2020 6:43 pm

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