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दिल्ली में अमेरिका से भी ज्यादा कोरोना संक्रमित!

दिल्ली में अमेरिका से अधिक है कोरोना का संक्रमण! यह ख़बर चौंकाने वाली है मगर सच है। थोड़ी देर के लिए आपको शायद यकीन ना हो, मगर यही सच है। आप सोच सकते हैं कि अमेरिका में कोरोना के मामले 40 लाख के करीब हैं और भारत में कुल कोरोना के मामले 12 लाख के करीब। ऐसे में भारत की राजधानी दिल्ली में भला अमेरिका से अधिक कोरोना का संक्रमण कैसे हो सकता है! अब भी हम कहेंगे हो सकता है।

नेशनल सर्वे फॉर डिजीज कंट्रोल यानी एनसीडीसी ने एक सर्वे किया है जिसे सीरो सर्वे कहा जा रहा है। इस सर्वे का नतीजा यह है कि दिल्ली में 23.48 प्रतिशत आबादी कोविड-19 का एंटीबॉडी बना चुकी है। इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली का करीब हर चौथा व्यक्ति कोरोना से लड़ चुका है और इस लड़ाई में जीत भी हासिल कर चुका है। अब दिल्ली की आबादी ठहरी 1.89 करोड़। मतलब ये कि इनमें से 42 लाख 26 हजार से ज्यादा लोगों को कोरोना हो चुका है। सिर्फ कोरोना हुआ ही नहीं है बल्कि वे कोरोना की जंग जीत भी चुके हैं। 27 जून से 10 जुलाई के बीच दिल्ली के सभी 11 जिलों में हुए सर्वे से ये नतीजे आए हैं और इसका सैम्पल साइज 21,387 है।

अमेरिका में 21 जुलाई तक 39 लाख 64 हजार से ज्यादा कोरोना के संक्रमण सामने आ चुके हैं। मगर, यह तादाद दिल्ली में एंटीबॉडी बना चुके लोगों की तादाद से कम है। यानी दिल्ली ने अमेरिका को कोरोना संक्रमण के मामले में पीछे छोड़ दिया है। न सिर्फ संक्रमण के मामले में बल्कि कोरोना से लड़ाई के मामले में भी अमेरिका से आगे निकल चुकी है दिल्ली। अब समझ में आयी बात।

वास्तव में दो खबरों ने एक साथ देश का ध्यान खींचा है। एक स्वास्थ्य मंत्रालय का यह दावा कि भारत में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोरोना के महज 837 मामले हैं। इस खबर का मतलब है कि घबराने की कोई बात नहीं है। दूसरे देशों के मुकाबले भारत में कोरोना का संक्रमण बहुत धीमा है। स्थिति नियंत्रण में है। वहीं दूसरी खबर है नेशनल सर्वे फॉर डिजीज कंट्रोल यानी एनसीडीसी का सर्वे। इसके अनुसार दिल्ली में 23.48 प्रतिशत आबादी में कोविड-19 की एंटी बॉडी बन चुकी है। यानी दिल्ली कोरोना से बहुत बुरी तरह से पीड़ित हुई लेकिन अभी घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि खतरा टल चुका है।

एक खबर झूठी दिलासा दिलाती है तो दूसरी खबर वास्तव में सुकुनू पहुंचाती है। एक खबर में स्वास्थ्य मंत्रालय जो आंकड़े बता रहा है वह सही तो है, मगर उससे सही तस्वीर पेश नहीं हो रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय जो आंकड़े दे रहा है उसके मुताबिक प्रति 10 लाख व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की स्थिति के पैमाने पर भारत 105वें नंबर पर है।

भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय देश में कोविड-19 की जो तस्वीर बता रहा है उसके मुताबिक कोरोना का प्रसार उतना नहीं हुआ है जितना बाकी देशों में हुआ है। यह बात एनसीडीसी के सर्वे के ठीक विपरीत है। सर्वे के नतीजे ये बताते हैं कि दिल्ली में जितने लोगों को कोविड-19 का संक्रमण हो चुका है वह तादाद दुनिया में नंबर वन कोविड संक्रमित देश संयुक्त राज्य अमेरिका से भी ज्यादा है।

एनसीडीसी के सर्वे की खासियत यह है कि अमेरिका से दिल्ली की बदतर स्थिति का सबूत देने के बावजूद यह सर्वे हमें डराता नहीं है, बल्कि इस सर्वे के नतीजे जानकर हमारा डर खत्म होता है। दिल्ली का हर चौथा आदमी कोरोना से लड़ चुका है और लड़कर जीत चुका है- यह बात हमें निडर बनाती है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले समय में कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों में बेहतर लड़ाई लड़ें। मगर, यही सर्वे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार के दावों को भी झूठा साबित करता है। इस सर्वे ने यह साबित किया है कि अधूरे आंकड़ों से झूठी तस्वीर पेश की जाती रही है।

10 जुलाई तक दिल्ली में कोरोना के संक्रमण का आधिकारिक आंकड़ा 1 लाख 9 हजार 140 था। इसका मतलब यह है कि सर्वे में 10 जुलाई तक कोविड-19 की एंटीबॉडी जितने लोगों की बन चुकी पायी गयी है वह तादाद यानी 42.26 लाख वास्तविक आंकड़े से 38.7 गुणा अधिक है।

स्वास्थ्य मंत्रालय यह बताने और जताने की कोशिश करता रहा है कि भारत में कोरोना की स्थिति नियंत्रण में है। उसका तर्क है कि आबादी के हिसाब से भारत कम से कम 104 देशों से बेहतर है। दुनिया की तो बात ही छोड़ दीजिए, इस भरोसे पर भारत में शायद ही किसी को यकीन हो। हालांकि आंकड़े यही कहते हैं। आखिर ऐसा क्यों है कि दुनिया को आंकड़े पर भी यकीन न हो।

वजह है टेस्टिंग। भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर 10,416 लोगों की टेस्टिंग हुई है। भारत में 10,416 लोगों की टेस्टिंग में 837 मामले कोविड-19 पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। इस हिसाब से अगर पूरी आबादी यानी 137 करोड़ लोगों की टेस्टिंग हो तो कोरोना के संभावित मरीजों की संख्या होगी करीब 11 करोड़। जितने लोगों की टेस्टिंग हुई है उनमें कोविड पॉजिटिव का प्रतिशत 8 आता है। इस हिसाब से कोरोना पॉजिटिव की अनुमानित संख्या 88 लाख हो जाती है। यह संख्या निश्चित रूप से भयावह है। मगर, जब हमें यह बात मालूम हो कि इतने लोगों में कोरोना का एंटी बॉडी तैयार हो चुका है तो यही स्थिति सुकून देने लग जाती है।

हालांकि बीते कुछ हफ्तों में जिस रफ्तार से कोरोना का संक्रमण बढ़ा है उस हिसाब से टेस्टिंग के मुकाबले कोविड-पॉजिटिव पाए जाने वालों की हिस्सेदारी 10 फीसदी से ज्यादा हो गयी है। यही कारण है कि आइएमए के डॉक्टरों ने कहा है कि अब यह मान लेना चाहिए कि सामुदायिक संक्रमण का दौर आ चुका है। सामुदायिक संक्रमण स्वीकार करें या न करें, यह सरकार की समस्या है। मगर, वास्तव में देश सामुदायिक संक्रमण के दौर से ही गुजर रहा है। वास्तविक आंकड़े हों या फिर सैम्पल से निकले नतीजे दोनों यह बता रहे हैं कि कोविड-19 संक्रमण के हालात सामुदायिक संक्रमण की परिभाषा को पूरा करते हैं।

दिल्ली के संदर्भ में कोरोना की स्थिति को समझें तो दिल्ली में अब तक मौत का आंकड़ा 3690 पहुंचा है। अगर अमेरिका से भी अधिक लोग दिल्ली में कोरोना के शिकार हुए और ठीक भी हो गये, तो इस स्थिति को देखते हुए मौत का यह आंकड़ा बहुत सुकून देने वाला है क्योंकि अकेले अमेरिका में कोरोना संक्रमण 1 लाख 43 हजार पार कर चुका है।

कोरोना संक्रमण से अनजाने में हम लड़ ले रहे हैं और हमें जीत मिल रही है तो इसकी वजह निश्चित रूप से हमारे खान-पान, परंपरा, स्वच्छता, जीने के तरीके और ऐसी ही वजहों में है। देश की बड़ी आबादी सूरज के सामने होती है। यह पाया गया है कि विटामिन डी की कमी होने पर कोरोना का संक्रमण अधिक होता है। सर्दी-खांसी-बुखार से लड़ने की हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति है। हम गार्गल करते हैं, हल्दी, अदरक जैसे एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करते हैं। काढ़ा पीते हैं।

आम तौर पर डॉक्टर के पास गये बगैर ही हम उपचार कर लेते हैं। भारत ऐसा देश है जहां बीसीजी का टीका अनिवार्य रूप से लगाया जाता है। यह पाया गया है कि बीसीजी का टीका जिन देशों में लगाए जा रहे हैं वहां कोरोना का असर कम है, मृत्यु दर भी कम है। भारत युवा देश है। इसका भी असर कोरोना संक्रमण में सकारात्मक समझा जाना चाहिए। देश में 35 साल से कम की 65 फीसदी आबादी है। निश्चित रूप से ऐसे ही कारण हैं जो बगैर लक्षण वाले कोरोना संक्रमण से गुजर जाने के बावजूद हम स्वस्थ हैं। दिल्ली में हुआ सर्वे यही सुखद अहसास हमें करा रहा है।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और दिल्ली में रहते हैं।)

This post was last modified on July 22, 2020 8:00 am

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