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Thursday, September 16, 2021

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दावत, जहां मेजबान और मेहमान में गुफ्तगू तक नहीं!

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दावत चाहे किसी धन कुबेर की हो या किसी निर्धन की, उसमें एक गर्म जोशी होती है, मिलने मिलाने का सिलसिला होता है और मेहमान और मेजबान के बीच संवाद होता है। पर कुछ दावतें ऐसी भी होती हैं जिनमें मेहमान और मेजबान के बीच गुफ्तगू तक नहीं होती है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों बंगाल में इसी तरह की दावत में हिस्सा ले रहे हैं।

अपने बोलपुर के दौरे में अमित शाह ने अन्य भाजपा नेताओं के साथ गायक वासुदेव दास बाउल के घर पर भोजन किया। कई तरह के व्यंजन तैयार किए गए थे। कुल मिलाकर शाही इंतजाम था बस केले का पत्ता और मिट्टी की थाली में ग्रामीण संस्कृति की झलक मिल रही थी। आप कयास लगाओगे कि वासुदेव एक समृद्ध व्यक्ति हैं, लेकिन हकीकत तो यह है कि उनके पास टीचर ट्रेनिंग कोर्स में अपनी बेटी का दाखिला कराने के लिए पैसे तक नहीं हैं।

उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय गृहमंत्री उसकी पीड़ा सुनेंगे। पर उन्होंने तो भोजन करने के बाद बाउल संगीत सुना और चले गए। वासुदेव से उनकी कोई बात ही नहीं हुई। अब यह बात दीगर है कि इस दावत के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता अणुव्रत मंडल को इस बाउल गायक का ख्याल आया और उन्होंने उनकी बेटी के दाखिले का इंतजाम कर दिया। इसी दौरे में उन्होंने पूर्व मिदनापुर के बलाजुरी गांव में सनातन सिंह के घर पर भोजन किया था। अपने पिछले दौरे में उन्होंने बांकुड़ा में एक आदिवासी परिवार के घर में भोजन किया था। पर हर घर की यही कहानी है-

उठते हुए दर्द को दबाना ही पड़ा

चेहरे को शगुफ्ता बनाना ही पड़ा

हमने सोचा था वे साथ रोएंगे

पर मुस्कुराए तो मुस्कुराना ही पड़ा

अमित शाह ने भोजन के बाद बाउल गीत भी सुना था। बाउल गीत बंगाल का लोकगीत है और कुछ जिलों में यह काफी लोकप्रिय भी है। अब बाउल गीत अमित शाह ने क्या सुना, क्या समझा यह तो खुदा ही जाने पर उन्हें रविंद्र संगीत से काफी प्रेम हो गया है। अमित शाह ने यह भी कहा है कि वह 7 दिनों का अवकाश लेकर रविंद्र संगीत सुनना चाहते हैं। अब यह बात दीगर है कि उन्हें बांग्ला का ब भी नहीं आता है। रविंद्र नाथ टैगोर और शांति निकेतन से अमित शाह और भाजपा नेताओं के प्रेम को बताने के लिए उस पोस्टर का जिक्र करना मौजू होगा जो अमित शाह के स्वागत में लगाए गए थे।

इनमें रविंद्र नाथ टैगोर के पोट्रेट के ऊपर अमित शाह की तस्वीर लगा दी गई थी। बहरहाल काफी छीछालेदर के बाद यह पोस्टर हटा दिए गए। बाउल गीत और रविंद्र संगीत से प्रेम, शांति निकेतन में रहने की ख्वाहिश और गरीब परिवारों के साथ भोजन करने का सिलसिला तो विधानसभा चुनावों तक चलता रहेगा। पर नरेंद्र मोदी ने 2014 में राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए क्या कहा था जरा इस पर गौर कीजिए। उन्होंने कहा था, कांग्रेस के नेता भुखमरी का पर्यटन करते हैं, वे गरीबों के घर पर जाकर उनके साथ भोजन करते हैं और तस्वीरें खिंचवाते हैं। अब मोदी जी अमित शाह के बारे में क्या कहेंगे नहीं मालूम क्योंकि पूर्व में अपने कहे से  मुकर जाना उनकी फितरत में शामिल है।

(जेके सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल कोलकाता में रहते हैं।)

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