Thursday, December 9, 2021

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अंत नहीं, एक और नई ज़िंदगी की शुरुआत हैं तलाक और ब्रेकअप; संदर्भ टीना डाबी और आएशा

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बीते दिनों निजी संबंधों के न चल पाने के कारण टीना डाबी ने अपने पार्टनर अतहर से तलाक़ लिया। जिसके चलते वे सामाजिक उपहास का शिकार हुईं। कारण कि हमने तलाक़ और ब्रेकअप को सहज लेना सीखा ही नहीं। जिनके तलाक़ या अधिक ब्रेकअप हुए, उनके निर्णय इस समाज के पूर्वाग्रहों के हमेशा पीड़ित रहे हैं। तलाक़ और ब्रेक अप्स को “खोट” की तरह देखा गया। अगर किसी स्त्री ने तलाक़ लिया मतलब ज़रूर कुछ खोट होगा। किसी पुरुष के अधिक ब्रेकअप हुए तो मतलब ज़रूर वोमेनाइजर होगा। लेकिन इस तरह से कभी नहीं देखा गया कि ब्रेकअप और तलाक़ रिश्ते बनाने में हुईं अपनी ग़लतियाँ सुधारने के सहज निर्णय हैं। हमने आएशा को तलाक़ लेने लायक़ माहौल दिया ही नहीं। उसे दूर-दूर तक नहीं दिखा कि तलाक़ के बाद भी जीवन है। उसके बाद भी कोई उसका हाथ पकड़कर कह सकता है कि वो उससे प्रेम करता है। इसलिए इस बात को मैं बार-बार दोहराना चाहता हूं कि आएशा ने आत्महत्या नहीं की बल्कि हमारे पूर्वाग्रहों ने उसका क़त्ल किया है। 

जिन-जिन लोगों को आएशा के मरने पर दुःख हुआ है उनको ठीक से याद करके सोचना चाहिए कि पिछली बार उन्होंने किसी के अलग होने के निर्णय का स्वागत किस तरह किया था? तलाक़ और ब्रेकअप करने वाले लड़के-लड़कियों के लिए हमारे शब्दकोश में बदचलन, वोमेनाइज़र जैसे शब्दों से अधिक कुछ नहीं है। हमने कभी नहीं कहा कि तलाक बुराई नहीं बल्कि अपनी गलतियों को सही करने का एक सामान्य सा निर्णय है। हम खुद हर रोज़ अपने आसपास के न जाने कितने लोगों को आएशा बनने के लिए धकेलते हैं। इन मामलों में महिला जल्दी हार जाती है क्योंकि उनके लिए बनाई गई हमारी परिस्थितियाँ और अधिक निर्मम हैं। पुरुष आत्महत्या नहीं करते मगर सार्वजनिक आलोचनाओं का शिकार उन्हें भी होना पड़ता है।

जबकि किसी से जुड़ना, उनसे अलग होना, शादी करना, तलाक़ लेना नितांत निजी मसला है, पर सार्वजनिक आलोचना की परिधि में आकर नितांत निजी फैसले भी मुश्किल हो जाते हैं। इसलिए लोग, खासकर लड़कियाँ ब्रेकअप और तलाक को बचाने के लिए गंदे से गंदे रिश्ते में बनी रहती हैं या खुद को खत्म कर लेती हैं। टीना डाबी आर्थिक रूप से सक्षम थीं, मानसिक रूप से भी थीं। परिवार भी पहले से ही सक्षम था, इसलिए तलाक का फैसला लेना उनके लिए कुछ सरल रहा। हालांकि सोशल मीडिया ने उनके इस नितांत साहसिक फैसले की छीछालेदर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

आएशा के लिए दुःख मनाने वाले कई दोस्त टीना पर मीम्स बना रहे थे। हमें खुद को नुकसान पहुंचा लेनी वाली आएशा से सहानुभूति है मगर टीना से नहीं। यही दोहरापन लड़कियों को आएशा बनने के लिए खुली सड़क देता है। टीना के ब्रेकअप के बाद लिखा था कि ये वक्त बहुत अधिक सेंटी होने से अधिक तलाक़ पर बात करने के लिए सबसे माफ़िक़ वक्त है। वक्त है कि हम तलाक़ से जुड़े टेबू पर बात करें। 

वक्त है कि तलाक़ को बुरा कहना बंद कर दें, ब्रेकअप्स को बुरा मानना बंद कर दें। तलाक़-ब्रेकअप्स दुखद हैं लेकिन बुरे नहीं। तलाक़ को हमें अधिक से अधिक सहज बनाने की ज़रूरत है। हिंदी में कहीं पढ़ने को मिला था कि घर में घुटकर मरने वाली लड़कियों से तो भागने वाली लड़कियाँ अच्छी हैं। ऐसा ही मेरा मत रिश्तों को लेकर है, टॉक्सिक रिश्तों को खींचकर पाँच साल करने से अच्छा है कि 5 महीने में तब ही अलग हो जाएँ जब लगे कि आने वाला वक्त मुश्किल है। अगर गम्भीरता से सोचें तो तलाक़ इंड नहीं हैं बल्कि एक पुनर्विचार है। ज़रूरी नहीं कि जिनसे गले लगकर आपने भविष्य के सपने देखें हैं उन पर रिज़िड ही हुआ जाए।

मेरा मानना है कि कठोर से कठोर हृदय में भी प्रेम उपजने की पूरी गुंजाइश है फिर जिसने जीवन में एक बार भी प्रेम किया है तो उस मन में दोबारा प्रेम स्थापित होने की तो पूरी पूरी गुंजाइश बची रहती है। इसलिए एक ब्रेकअप या एक तलाक़ के बाद भी दूसरे ब्रेकअप और तलाक़ के लिए मन बनाकर रखना चाहिए। अक्सर देखता हूँ कि चार या पाँच ब्रेकअप की बात सुनकर लोग मुंह बनाते हैं, मुंह से भी अधिक पूर्वाग्रह बनाते हैं और आपको ये फ़ील कराते हैं कि ज़रूर आपमें ही कुछ ग़लत है, ज़रूर ही आप एक अच्छे पार्टनर नहीं रहे होंगे। लेकिन मेरा मानना है कि आप अच्छे पार्टनर थे इसलिए ही अपने आप को करेक्ट करने के लिए आपने तलाक़ चुना, ब्रेकअप चुना। ब्रेकअप हमारी कहानी के एंड नहीं बल्कि करेक्टिव मीजर्स हैं, एक opportunity हैं अपने आपको करेक्ट करने के लिए। 

किसी ने मुझसे पूछा तुम्हारे इतने ब्रेकअप हुए तुम शादी मत करना नहीं तो तलाक़ हो जाएगा। एक तरह से उनके प्रश्न में शादी को अंतिम चुनाव की तरह देखा गया था यानी शादी मतलब कि विकल्पों का अंत। तलाक़ मतलब सभी तरह से एंड। लेकिन मेरा जवाब था कि जिस तरह मैं ब्रेकअप के लिए सहज हूँ उसी तरह तलाक़ के लिए भी रहूँगा, एक बार तलाक़ के बाद दूसरे तलाक़ के लिए और दूसरे तलाक़ के बाद तीसरे, चौथे, पाँचवे तलाक़ के लिए। मैं क्यों अपनी पार्टनर को मेरे साथ रहने की ज़िद करूँगा और क्यों किसी की ज़िद के चलते किसी के साथ खुद रहना चाहूँगा। मैंने अपनी पार्टनर से हमेशा कहा है कि मेरी कोशिश रहेगी कि मैं हर अच्छे-बुरे में उनके साथ रहूँ फिर भी कभी उन्हें ऐसा लगे कि नहीं कुछ और है जो उनका इंतज़ार कर रहा है तो वे मुझे छोड़ने के लिए हमेशा स्वतंत्र हैं। उसकी कोस्ट ब्रेकअप हो चाहे फिर तलाक, उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है। 

कमिटमेंट साथ रहने के लिए नहीं, बल्कि इस बात के लिए होने चाहिए कि दोनों के लिए जो बेस्ट डिसीजन होगा वो लेंगे। कई बार बेस्ट डिसीजन साथ रहने की बजाय अलग-अलग रास्ते चुनने का साथ देते हैं इसलिए “forever” शब्द में बुनियादी खोट है ये प्रेम में चुनने और अपने आप को करेक्ट करने के अधिकार को ख़त्म करता है। जब दो लोग साथ रहना ही चाहेंगे तो स्वयं ही साथ रहेंगे उसमें अधिक गणित की आवश्यकता कहाँ? अगर दोनों में से कोई एक कुछ और सोचता है तो उसे जाने की अनुमति होनी चाहिए। जाना किसी भी कमिटमेंट की परिधि से बाहर रहना चाहिए। इसलिए एक बार लिखा था कि “तुम्हारे मिलने तक मेरा अपराधी होना जारी रहेगा” मतलब कि जब तक “तुम” न मिलोगी तब तक जितने चाहे ब्रेकअप हों, जितने चाहे तलाक़ हों, वे होंगे ही। टीना और अतहर के मामले में भी मेरा यही मत है। उन्हें प्रेम में अपना विश्वास खोने की ज़रूरत नहीं है, इस तलाक़ के बाद भी उन्हें फिर एक नई कहानी का इंतज़ार करना चाहिए, फिर किसी के प्रेम में पड़ना चाहिए, फिर किसी के साथ की सेल्फ़ियों पर लिखना चाहिए “Forever”।  

लेकिन अगर किसी चीज़ से नहीं डरना चाहिए तो वह है ‘छूटने’ से। इस तलाक़ के बाद भी उन्हें दूसरे तलाक़ से डरने की ज़रूरत नहीं है। और तब तक डरने की ज़रूरत नहीं है जब तक कि कोई ऐसा मिल जाए जो तुम्हारे forever कहने के बाद हमेशा के लिए तुम्हारे साथ रह जाए। तलाक़ हों चाहे ब्रेकअप, पहला हो चाहे चौथा, एक महीने का हो चाहे 6 साल पुराना हो। हर रिश्ता टूटने पर अपने हिस्से का दर्द देकर जाता है। पर मिलने-बिछुड़ने में जो छटपटाती सी देह है वही ज़िंदगी है। इसका अपना ही सुख है, अपना ही संगीत है पर इस पर कैसा दुखी होना?? इसे सेलिब्रेट करने की ज़रूरत है। एक कहानी ख़त्म हुई एक दिन दूसरी कहानी शुरू होगी फिर घबराना कैसा? हरिवंश राय बच्चन ने भी तो कहा है-

जीवन में एक सितारा था

माना वह बेहद प्यारा था

वह डूब गया तो डूब गया

अम्बर के आनन को देखो

कितने इसके तारे टूटे

कितने इसके प्यारे छूटे

जो छूट गए फिर कहाँ मिले

पर बोलो टूटे तारों पर

कब अम्बर शोक मनाता है

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम

थे उस पर नित्य निछावर तुम

वह सूख गया तो सूख गया

मधुवन की छाती को देखो

सूखी कितनी इसकी कलियाँ

मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ

जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली

पर बोलो सूखे फूलों पर

कब मधुवन शोर मचाता है

जो बीत गई सो बात गई।।।

(श्याम मीरा सिंह का लेख उनके फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)

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