बीच बहस

महाराष्ट्र और पंजाब भाजपा में भगदड़

जो खेल भाजपा अब तक दूसरे दलों के साथ खेलती आ रही थी वही खेल अब खुद उनके यहां भी शुरू हो चुका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद जहां भाजपा के 150 से अधिक नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था, वहीं महाराष्ट्र और पंजाब में भी भाजपा नेता दूसरे दलों में जाने लगे हैं।

साढ़े सात महीने लंबे किसान आंदोलन और राज्य में भाजपा नेताओं के विरोध के बाद पंजाब भाजपा में पहले से ही भगदड़ मची हुयी है वहीं महाराष्ट्र में भी 14 नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। दरअसल ये बग़ावत नरेंद्र मोदी कैबिनेट में विस्तार के बाद हुयी है। सांसद प्रीतम मुंडे खांडे को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल न किए जाने के विरोध में शनिवार (10 जुलाई, 2021) को महाराष्ट्र के बीड जिला के 14 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इन नेताओं में बीड बीजेपी जिला महासचिव सरजेराव तांडले और जिला युवा इकाई के उपाध्यक्ष विवेक पाखरे शामिल हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के सात सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया है।

सरजेराव तांडले के मुताबिक, “अगर हमारे नेता का ही सम्मान नहीं होगा, तो फिर संगठन में बने रहने का क्या मतलब है? हजारों पार्टी कार्यकर्ता टकटकी लगाए इंतजार कर रहे थे कि प्रीतम मुंडे खांडे को केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री पद मिलेगा। मंत्रियों की सूची में उनका नाम नहीं आने पर हम टूट गए थे।”

इस्तीफों पर मुंडे ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा था, “समर्थकों से हमारा बेहद गहरा नाता है। यह पुराना संबंध है, जो कि पद या पावर पर आधारित नहीं है। वे दुखी हैं…।” बीजेपी में अंदर खाने के एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पार्टी ने बीजेपी नेता भगावत कराड को मंत्री बनाया है और इस फैसले ने प्रीतम के समर्थकों को आहत किया।

बता दें कि कराड वंजारा समुदाय से आते हैं, जो कि ओबीसी श्रेणी में आती है। वह मराठावाड़ के औरंगाबाद से ताल्लुक रखते हैं। खाडे और उनकी बड़ी बहन प्रीतम मुंडे (नेशनल बीजेपी सेक्रेट्री) भी वंजारा समुदाय से हैं और महाराठावाड़ क्षेत्र में बीड का प्रतिनिधित्व करती हैं। कराड को सशक्त बनाने का पार्टी का फैसला यह संदेश देता है कि बीजेपी मराठवाड़ में खांडे और मुंडे को आंकने के लिए वैकल्पिक ओबीसी नेतृत्व बनाने का प्रयास कर रही है।

वहीं दूसरी ओर पंजाब भाजपा में बग़ावत के बाद पूर्व मंत्री अनिल जोशी को छह साल के लिए पार्टी के लिए बाहर निकालकर शेखी बघारा है। भाजपा पंजाब इकाई के बयान के मुताबिक, जोशी को केंद्र सरकार, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और उसकी नीतियों के खिलाफ बयानबाजी करने पर निकाला गया है। स्टेट यूनिट चीफ अश्विनी शर्मा के निर्देश पर उनके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गयी है। गौरतलब है पंजाब भाजपा ने इससे पहले सात जुलाई, 2021 को उन्हें “दल विरोधी गतिविधियों” को लेकर कारण बताओ नोटिस भी थमाया था। 

किसान आंदोलन पर पार्टी को घेरने वाले पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने प्रतिक्रिया देते हुये कहा है कि – उन्होंने (भाजपा) पार्टी में मेरी 37 साल की “तपस्या” को खत्म कर दिया। क्या पंजाबवासियों के बारे में बात करना गलत है? बीजेपी कार्यकर्ता पीटे जा रहे हैं। क्या किसान आंदोलन के हल के बारे में बात करना गलत है? पंजाब बीजेपी चीफ और उनकी टीम ने केंद्र को सही प्रतिक्रिया नहीं दी है। इन्हीं लोगों ने मुझे पार्टी से निकाला है, जबकि जो पार्टी को बचाने की बात कर रहा है, उसे बाहर फेंक दिया गया।

बता दें कि अनिल जोशी 2012-2017 के बीच शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और बीजेपी के गठबधंन वाली पंजाब सरकार में स्थानीय निकाय, मेडिकल शिक्षा और शोध मामलों के मंत्री रहे थे। 

This post was last modified on July 12, 2021 2:18 pm

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