Monday, August 15, 2022

किसानों को आंदोलन का अधिकार लेकिन सड़कों को बाधित करना ठीक नहीं, समाधान खोजे सरकार: सुप्रीम कोर्ट

ज़रूर पढ़े

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के तहत दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किसानों द्वारा सड़कों को अवरुद्ध करने पर आपत्ति जताई। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है, उन्हें आंदोलन करने का अधिकार हो सकता है लेकिन सड़कों को अनिश्चित काल के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है। पीठ ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को इसका समाधान निकालने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि आपको समाधान खोजना होगा। समाधान भारत संघ और संबंधित राज्यों के हाथों में है।

पीठ ने भारत संघ, यूपी और हरियाणा सरकारों से इसका समाधान खोजने को कहा। पीठ नोएडा की रहने वाली मोनिका अग्रवाल द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अपनी मार्केटिंग नौकरी के लिए नोएडा से दिल्ली की यात्रा करना उसके एक बुरा सपना बन गया है, क्योंकि सड़क नाकाबंदी के कारण 20 मिनट के सफर में 2 घंटे का समय लगता है।

पीठ ने कहा कि यह कहा गया कि याचिकाकर्ता को कुछ समस्या है। समाधान भारत संघ और राज्य के हाथों में है। यदि विरोध जारी है, तो यातायात को किसी भी तरह से नहीं रोका जाना चाहिए, ताकि लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो।

जस्टिस कौल ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि आप इसका समाधान क्यों नहीं ढूंढ सकते? उन्हें विरोध करने का अधिकार है, लेकिन यातायात का प्रवाह और बहिर्वाह को बाधित नहीं किया जा सकता है।

तुषार मेहता ने कहा कि हम दो यूनियनों के नाम दे सकते हैं जिन्हें इस केस में पक्षकार बनाया जा सकता है। इस पर जस्टिस कौल ने कहा कि तब कोई और यूनियन आएगी और कहेगी कि हमारा पक्ष नहीं रखा गया है। जस्टिस कौल ने कहा कि हम इस बात से चिंतित नहीं हैं कि आप इस मुद्दे को कैसे सुलझाते हैं, चाहे राजनीतिक रूप से, प्रशासनिक रूप से या न्यायिक रूप से।लेकिन हमने पहले भी यह कहा है कि सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए।यह जनता है, जिसे सड़क जाम के कारण कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है।एसजी ने हरियाणा और यूपी राज्यों के निहितार्थ के लिए अनुरोध किया, जिसे अदालत ने दोनों राज्यों को नोटिस जारी करने की अनुमति दी।

इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे को हल करने का प्रयास कर कर रही है और दो सप्ताह का समय चाहिए। इसके बाद पीठ ने केंद्र को और समय दिया था। अब इस मामले की सुनवाई 20 सितंबर को होगी।

संसद द्वारा 2020 में पारित तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 19 जुलाई, 2021 को उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य और हरियाणा राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था कि कैसे सड़कों की नाकाबंदी को खत्म किया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार, उत्तर प्रदेश राज्य ने अपने हलफनामे में कहा था कि वह किसानों को यह समझाने के लिए सभी प्रयास कर रहा है कि सड़कों को अवरुद्ध करने के उनके घोर अवैध कार्य से यात्रियों को गंभीर असुविधा हो रही है।प्रदर्शनकारियों में अधिकतर बड़ी उम्र के और वृद्ध किसान हैं।यूपी सरकार ने कहा है कि गाजियाबाद / यूपी और दिल्ली के बीच महाराजपुर और हिंडन सड़कों के माध्यम से यातायात की सुचारू आवाजाही की अनुमति देने के लिए डायवर्सन बनाया गया है, क्योंकि एनएच 24 अभी भी अवरुद्ध है।जनवरी, मार्च और फिर अप्रैल में किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा एनएच 24 को बार-बार अवरुद्ध किया गया।

गौरतलब है कि 29 मार्च, 2021 को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किया था कि सड़क क्षेत्र को साफ रखा जाए ताकि एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का मार्ग प्रभावित न हो।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

जश्न और जुलूसों के नाम थी आज़ादी की वह सुबह

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी अपनी बड़ी...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This