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Categories: बीच बहस

किसान आन्दोलन का अडानी-अंबानी पर असर: एक ने दी सफाई, दूसरा पहुंचा ट्राई

तीन नये कृषि कानूनों के विरुद्ध चल रहे किसान आन्दोलन का असर भले ही मोदी सरकार पर प्रत्यक्ष रूप से न पड़ता दिखायी दे लेकिन जिस तरह से सरकार के अडानी-अंबानी प्रेम पर किसानों ने आक्रामक रवैया अपनाया है उससे अडानी-अंबानी में घबराहट फ़ैल गयी है। एक हफ्ते के भीतर जहां अडानी समूह ने उत्तर भारत समेत पंजाब के प्रकाशनों में पूरे पृष्ठ के विज्ञापन देकर अपने खिलाफ चल रहे कथित अभियान को दुष्प्रचार के साथ ही झूठा भी करार दिया है, जिसमें कहा जा रहा है कि अडानी समूह किसानों से सीधे तौर पर खरीद करता है और जमाखोरी करता है। वहीं पांच दिन पहले मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने वोडाफोन-आइडिया (वीआई) और भारती एयरटेल के खिलाफ टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के पास शिकायत दर्ज करा के आरोप लगाया है कि ये किसान आंदोलन का फायदा उठाकर उसके खिलाफ निगेटिव कैंपेन चला रही हैं।

मोदी सरकार के विवादित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन में अपना नाम गूंजने के बाद अब अडानी समूह ने सफाई दिया है। समूह ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसान कल्याण के लिए काम करने वाली कंपनी को निहित स्वार्थों द्वारा बदनाम किया जा रहा है। अडानी समूह ने लोगों से इस दुष्प्रचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।

पूरे पृष्ठ के विज्ञापनों में अडानी समूह ने अपने खिलाफ चल रहे कथित अभियान को दुष्प्रचार के साथ ही झूठा भी करार दिया है, जिसमें कहा जा रहा है कि अडानी समूह किसानों से सीधे तौर पर खरीद करता है और जमाखोरी करता है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अडानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए किसानों का शोषण कर रहे हैं। इसके अलावा अडानी समूह द्वारा बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का अधिग्रहण करने के बारे में भी खूब बातें हो रही हैं।

पूरे पृष्ठ के विज्ञापन में अडानी समूह ने स्पष्ट किया है कि कंपनी की भंडारण की मात्रा तय करने और अनाज के मूल्य निर्धारण में कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि वह केवल एफसीआई के लिए एक सेवा बुनियादी ढांचा प्रदाता कंपनी है। एफसीआई किसानों से खाद्यान्न खरीदता है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से निर्मित साइलो में इन्हें संग्रहीत करता है। निजी कंपनियों को भंडार स्थान के निर्माण और भंडारण के शुल्क का भुगतान किया जाता है, लेकिन इनके स्वामित्व के साथ-साथ इसके विपणन और वितरण का अधिकार, एफसीआई के पास है।

बंदरगाह से लेकर ऊर्जा कारोबार से जुड़ी कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अडानी समूह किसानों से अनाज खरीदने में संलग्न नहीं है और न ही वह अनुबंध खेती में शामिल है। इसके अलावा यह बात भी स्पष्ट की गई है कि वह कृषि भूमि का अधिग्रहण भी नहीं करता है। समूह ने कहा है कि वह न तो किसानों से खाद्यान्न खरीदता है और न ही खाद्यान्न का मूल्य तय करता है। वह केवल अनाज भंडारण के लिए साइलो विकसित करती है और इसे संचालित करती है।

मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने वोडाफोन-आइडिया (वीआई) और भारती एयरटेल के खिलाफ टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास शिकायत दर्ज कराई है। जियो ने वीआई और एयरटेल पर आरोप लगाया है कि ये टेलीकॉम कंपनियां किसान आंदोलन का फायदा उठाकर उसके खिलाफ निगेटिव कैंपेन चला रही हैं। जियो ने कहा कि वीआई और एयरटेल उत्तर भारत के कई हिस्सों में ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए जियो के खिलाफ निगेटिव कैंपेन चला रही हैं।

अपनी शिकायत में जियो ने कहा कि किसान आंदोलन से उपजे आक्रोश का फायदा उठाने के लिए दोनों कंपनियां झूठे प्रचार का सहारा ले रही हैं। ये कंपनियां ग्राहकों के बीच जियो की छवि को नुकसान पहुंचाना चाह रही हैं। ये कंपनियां ग्राहकों को लालच देकर रिलायंस जियो से पोर्ट आउट कराने की कोशिश कर रही हैं। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी कैंपेन के लिए कई सोशल प्लेटफार्म्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। जियो के ग्राहकों को एयरटेल और वीआई पर पोर्ट करने को कहा जा रहा है। वोडा-आइडिया और एयरटेल अपने को किसानों का हितैषी और रिलायंस जियो को किसान विरोधी बता कर आंदोलन को हवा देने का काम कर रहीं है। रिलायंस जियो ने आरोप लगाया है कि दोनों कंपनियां पूरे देश में जियो के विरुद्ध झूठा प्रचार करने में लगी हैं। इससे रिलायंस जियो की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 19, 2020 4:25 pm

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