Friday, August 19, 2022

गुजरात विधानसभा चुनाव:आम आदमी पार्टी की पहली सूची और जमीनी पड़ताल

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अहमदाबाद। इस वर्ष के अंतिम महीने दिसंबर में गुजरात विधान सभा के चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां अपनी अपनी तैयारियों में लगी हैं। मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने अपने 10 उम्मीदवारों की सूची जारी कर मीडिया की सुर्खियों को बटोर लिया। केजरीवाल ने जिन 10 सीटों पर उम्मीदवार जारी किए हैं वह इस प्रकार हैं।

1- भेमा भाई चौधरी – देयोदर सीट ( प्रदेश उपाध्यक्ष )

2- जगमल वाला- सोमनाथ सीट ( प्रदेश उपाध्यक्ष )

3- अर्जुन राठवा- छोटा उदयपुर सीट ( पार्टी का आदिवासी चेहरा )

5 – सागर राबड़ी- बेचराजी सीट ( एक्टिविस्ट , किसान नेता )

5 – वश्राम सगठिया- राजकोट ग्रामीण ( 2017 वि.स. में 2179 वोटों से हारने वाले कांग्रेसी उम्मीदवार, कांग्रेस के कद्दावर नेता और बड़े कारोबारी इंद्रनील राजगुरु के साथ हाल ही में सागठिया ने भी आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली थी।)

6 – राम धनुक – कामरेज सीट से ( प्रदेश सचिव )

7 – शिवलाल ब्रास्ला- राजकोट दक्षिण सीट ( प्रदेश ट्रेड विंग अध्यक्ष )

8 – सुधीर वाघानी-गरियाधर सीट ( प्रदेश सह सचिव )

9 – राजेन्द्र सोलंकी- बारडोली सीट( लोकसभा इंचार्ज)

10- ओम प्रकाश तिवारी-नरोड़ा सीट ( 2017 में इसी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार थे।)

देयोदर , सोमनाथ, छोटा उदयपुर , बेचराजी कांग्रेस के पास है। जबकि अन्य छह सीटें बीजेपी के पास हैं। प्रचार-प्रसार में भी आम आदमी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस से एक कदम आगे दिख रही है। जिस कारण पक्ष-विपक्ष दोनों आप को लेकर दुविधा में हैं।

जब भाजपा को चुनावी संकट होता है तो गोदी मीडिया भाजपा को मजबूत दिखाने में जी जान लगा देती है। भाजपा को संकट से बाहर निकालने के लिए टीवी से झूठ परोसना शुरू हो जाता है। गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने अब कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी एक बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस हमेशा से चुनौती देती आई है। 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन ने 81 सीट पर जीत हासिल की थी। बहुमत से मात्र 11 सीटें कम मिली थीं। पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी छोड़ बीजेपी में चले गए हैं। अब भी कांग्रेस के पास जिग्नेश मेवानी को मिलाकर 66 विधायक हैं।

चुनाव से पहले गुजरात की जमीनी हकीकत

उत्तर गुजरात जहां से कांग्रेस प्रदेश प्रमुख जगदीश ठाकोर और दलित नेता जिग्नेश मेवानी आते हैं। कांग्रेस उत्तर गुजरात के कुछ जिलों को मजबूती से बचाए हुए है। सौराष्ट्र में कोली और पाटीदार वोटरों का दबदबा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने सौराष्ट्र की 48 सीटों में से 29 सीटों पर कब्जा किया था। यहां त्रिकोणीय मुक़ाबले की संभावना है। कच्छ के क्षेत्र में दलित और मुस्लिम वोटरों की अच्छी संख्या होने से कांग्रेस का राजनैतिक गणित बैठ सकता है। मध्य गुजरात में 2017 के परिणाम को दोहराना कांग्रेस के लिए चुनौती है। आदिवासी बेल्ट में भी कांग्रेस ठीक ठाक कर सकती है। क्योंकि कांग्रेस ने विपक्ष का नेता सुखराम राठवा को बनाया है। जो एक आदिवासी नेता हैं। 

अहमदाबाद , सूरत , बड़ौदा , राजकोट , भावनगर और जामनगर महानगर पालिका में बीजेपी की सत्ता है। बीजेपी को मजबूत माना जा रहा है। संगठनात्मक तौर पर कांग्रेस को ही बीजेपी का विकल्प मना जा रहा है। लेकिन इस चुनाव में आम आदमी पार्टी भी एक बड़ा प्लेयर है। जिसे कोई भी हल्के में नहीं ले रहा है।

2017 में कांग्रेस सत्ता में आ जाती लेकिन….

1) 50 से अधिक शहरी विधान सभा सीटों में से कांग्रेस को मात्र चार विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। शहरी मतदाताओं ने ही बीजेपी की सत्ता को बचाया था।

2) दक्षिण गुजरात में कांग्रेस का निराशाजनक प्रदर्शन। भरूच से लेकर वापी के बीच कांग्रेस को मात्र 4 सीटें ही मिल पाई थीं। जिसके चलते कांग्रेस सत्ता तक नहीं पहुंच पाई।

3) बीजेपी ने एक रणनीति के तहत कांग्रेस के अधिकतर वरिष्ठ नेताओं की घेराबंदी कर विधानसभा चुनाव हरा दिया। जिसके बाद पूरे पांच वर्षों तक कांग्रेस पार्टी के भीतर सीनियर और जूनियर नेताओं की उठा पटक चलती रही और कांग्रेस कमज़ोर होती गई।

बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा 2022 का विधानसभा

2022 में बीजेपी मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तुलना में आम आदमी पार्टी को बड़ी चुनौती मान रही है। महानगर पालिकाएं बीजेपी का मजबूत गढ़ हैं। पिछले साल नगर पालिका चुनाव में आम आदमी पार्टी को सूरत के सिवाय कोई बड़ी जीत नहीं मिली। लेकिन छह महानगर पालिकाओं में आम आदमी पार्टी को 14% वोट मिले। जो बीजेपी को चिंता में डाले हुए हैं। पिछले 27 वर्षों में बीजेपी को शहरी क्षेत्रों में चुनौती नहीं मिली थी। लेकिन इस चुनाव में बीजेपी को आम आदमी पार्टी शहरी और कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौती दे रही है।

केजरीवाल गुजरात के चुनावी दौरे में सबसे आगे और राहुल गांधी सबसे पीछे

2017 विधानसभा चुनाव के समय जो हवा कांग्रेस की बनी थी। कांग्रेस पार्टी उस सत्ता विरोधी लहर को जीवित रखने में नाकामयाब रही है। तीन युवा नेताओं के चक्कर में कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व अर्जुन मोथवाडिया, भरत सोलंकी , आदिवासी नेता तुषार चौधरी, पटेल समुदाय के सिद्धार्थ पटेल, कोली नेता बावलिया को ठिकाने लगा दिया। जिन तीन नेताओं को संभालने में शीर्ष नेतृत्व ने अपनी सारी ऊर्जा लगा दी उनमें से अब केवल जिग्नेश मेवानी ही कांग्रेस के साथ रह गए।

हार्दिक और अल्पेश बीजेपी में हैं। कांग्रेस और बीजेपी से एक कदम आगे चलते हुए आम आदमी पार्टी ने अपने 10 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है। दिल्ली लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल द्वारा सिंगापुर जाने के लिए अनुमति न मिलने से नाराज़ केजरीवाल ने 1, 6, 7 और 10 अगस्त को गुजरात दौरे की घोषणा की है। 1 अगस्त से पहले भी केजरीवाल कई बार गुजरात आ चुके हैं। मोदी और शाह भी लगातार गुजरात आ रहे हैं। जबकि राहुल गांधी का इस वर्ष मात्र दो दौरा हुआ है।

चमत्कारी हो सकता है 300 यूनिट बिजली मुफ्त का वादा

आम आदमी पार्टी द्वारा 300 यूनिट इलेक्ट्रिसिटी मुफ्त देने का मुद्दा बड़ा बनता जा रहा है। गुजरात में महंगी बिजली एक बड़ा मुद्दा है। मध्यम वर्ग जो भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। महंगाई से त्रस्त मध्यम वर्ग को 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा आम आदमी पार्टी को  लुभा रहा है। बीजेपी भी मुफ्त बिजली देने का वादा कर सकती है। आम आदमी पार्टी द्वारा जनता को दिए इस लुभावने वादे के बाद गुजरात सरकार ने एक कमेटी बनाकर 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने पर सरकारी कोष पर बढ़े बोझ का आकलन किया है। आकलन के अनुसार 300 यूनिट मुफ्त बिजली दिए जाने पर 7700 करोड़ का बोझ बढ़ेगा।

आम आदमी पार्टी ने बेरोज़गारी भत्ता और 10 लाख नौकरी का वायदा 

आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह केजरीवाल के चेहरे और दिल्ली मॉडल पर चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी गुजरात के बेरोजगारों को 3000 रुपये प्रति माह बेरोज़गारी भत्ता देने का  वादा कर रही है। इसके अलावा 10 लाख नई सरकारी नौकरी भी देने का वादा है। कांग्रेस अपने संगठनात्मक कार्यों में लगी हुई है। कांग्रेस के पास भले ही पूरे गुजरात में संगठन हो। लेकिन जो ऊर्जा आम आदमी पार्टी में दिख रही है। वह कांग्रेस में नजर नहीं आ रही है।

केजरीवाल ने पकड़ी व्यापारियों की नब्ज़

जीएसटी विभाग द्वारा व्यापारियों को प्रताड़ित करने को भी अरविंद केजरीवाल एक बड़ा मुद्दा बनाने में सफल दिख रहे हैं। गुजरात व्यापारियों से मिलकर अरविंद केजरीवाल ने जीएसटी विभाग से जुड़ी समस्याओं को सुनने के बाद कुछ वादे भी किए। जो व्यापारियों को पसंद आया।वह आश्वासन निम्न है।

1- जीएसटी विभाग द्वारा बनाए गए डर के माहौल को समाप्त करेंगे

2 – कारोबारियों को इज़्ज़त देंगे।

3 – भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाएंगे।

4- VAT रिफंड 6 महीने में।

5 – जीएसटी सरल करेंगे।

6 – कारोबारियों को सरकार का साथी बनाएंगे।

जनता को रेवड़ियां पसंद हैं

2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने घर नुं घर का वायदा किया था। इस वादे के अनुसार उन सभी महिलाओं को मकान देने का वादा किया था जिनके पास मकान नहीं है। गुजरात की जनता ने कांग्रेस के इस वादे पर भरोसा भी किया था। सैंपल के तौर पर एक मकान भी बनाया था। जिसके बाद राज्य की 28 लाख महिलाओं ने कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी आवेदन को भी भरा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता का मूड भांपते हुए 60 लाख मकान (रेवड़ी) का वादा कर दिया। मोदी के इस वादे ने गुजरात की जनता का मूड बदल दिया। 65 विधायकों वाली कांग्रेस ने अभी तक गुजरात की जनता के सामने किसी प्रकार की रेवड़ी नहीं रखी है। यदि कांग्रेस घर नूं घर की रेवड़ी का वादा फिर से करती है तो यह एक लुभावना वादा हो सकता है।

बीजेपी v/s कांग्रेस v/s आम आदमी पार्टी

गुजरात में अब तक कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला होता आया है। लेकिन इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। कांग्रेस जाति आधारित राजनीति कर रही है। कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ जाति समीकरण बैठाते हुए 7 लोगों को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। संभवतः कांग्रेस अपनी पुरानी KHAM थियरी से ही चुनाव लड़ेगी। क्योंकि 2017 में जो पाटीदार वोटों का एक हिस्सा कांग्रेस से जुड़ा था। वह खिसक चुका है। आम आदमी पार्टी दिल्ली मॉडल पर स्वास्थ्य , शिक्षा और बिजली के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। बीजेपी अपने परंपरागत सांप्रदायिक मुद्दे पर ही चुनाव लड़ेगी।

तीनों दलों ने दीवारों पर पेंटिंग से किया चुनावी प्रचार का श्री गणेश….. जहरीली शराब पर घिरी बीजेपी

बीजेपी ने शहर की दीवारों पर कमल के फूल की पेंटिंग से अपना प्रचार शुरू किया तो कांग्रेस ने भी बची दीवारों को पंजे से पेंट कर डाला। ओवर ब्रिज पर झाड़ू की पेंटिंग ने कब्ज़ा कर लिया। 

वर्तमान में जहरीली शराब के मुद्दे पर जिसमें 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। पुलिस और प्रशासन जहरीली शराब कांड को केमिकल कांड बताकर सरकार को चुनावी साल में बचाने का प्रयत्न कर रहा है। लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने प्रशासन और  सरकार को घेर रखा है। अहमदाबाद में शराब के अलावा ड्रग्स भी एक बड़ा मुद्दा है। आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली पाने के लिए 9725097250 पर मिस कॉल के द्वारा अपनी सदस्यता बढ़ाने का काम कर रही है। बीजेपी मोदी के चेहरे को आगे कर देश निर्माण के लिए 7878182182 पर मिस कॉल करवा रही है। कांग्रेस पार्टी की सदस्यता अभियान का कोई भी नंबर नहीं है। इन सब के बीच जहरीली शराब के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने गांधी आश्रम में एक बड़ा प्रदर्शन ज़रूर किया। कांग्रेस नेताओं ने जहरीली शराब और ड्रग्स के मुद्दे पर गृह मंत्री का इस्तीफा मांगा।

भाजपा के पक्ष में इंडिया टीवी ने फैलाया झूठ

जमीनी हकीकत को भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भांप चुका है। इसी लिए अब गोदी मीडिया गुजरात की जमीनी हकीकत को छिपाकर भाजपा के पक्ष में वातावरण बनाने तथा गुजरात की जनता को वास्तविक मुद्दे से भटकाने के प्रयत्न में लगी हुई है।

29 जुलाई को इंडिया टीवी द्वारा प्राइम टाइम समय में एक राजनैतिक सर्वे प्रसारित किया गया। सर्वे का उद्देश्य था कि यदि आज चुनाव होता है तो किस दल की क्या परिस्थिति रहेगी। देश के अलावा इंडिया टीवी ने गुजरात पर भी राजनैतिक सर्वे और आंकड़े दिए।

सर्वे के अनुसार यदि आज चुनाव होता है तो बीजेपी को 108 , कांग्रेस को 55 , आम आदमी पार्टी को 16 और अन्य को 3 सीटें मिलेंगी। आम आदमी पार्टी सर्वे में 16 सीटें पाकर गदगद है। तो बीजेपी रणनीति बनाने में लग गई। क्या किया जाए कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस के ही वोटों में सेंध मारी करे।

गुजरात में कांग्रेस खराब से खराब परिस्थिति में  55-60 सीटें लाती आई है। आम आदमी पार्टी को यदि इंडिया टीवी द्वारा 16 सीटें मिलने का अनुमान है। तो 2022 में भाजपा खतरे में है। क्योंकि यह सीटें सूरत और राजकोट से निकल सकती हैं। जो भाजपा का गढ़ है। 2017 में भी बीजेपी इन दोनों गढ़ को बचाने में सफल रही थी।

गुजरात का व्यापारी वर्ग और मध्यम वर्ग ही बीजेपी की रीढ़ रहा है। इन दोनों वर्गों में केजरीवाल ने कुछ हद तक सेंध मारी शुरू कर दी है। ऐसी परिस्थिति में आम आदमी पार्टी बीजेपी को अधिक नुकसान करती दिख रही है। 2017 में पाटीदार वोट कुछ हद तक बीजेपी से छिटका था लेकिन पिछले पांच वर्षों में भाजपा अपने इस वोट पर मजबूती बनाने में कामयाब ज़रूर रही है। नरेश पटेल को लेकर मीडिया में हो हल्ला समाप्त होने के बाद वोटर बीजेपी के साथ दिख रहा है। लेकिन केजरीवाल की भी इस वोट बैंक में थोड़ी बहुत घुसपैठ ज़रूर देखी जा सकती है।

सर्वे में सबसे बड़ी चालाकी जो की गई है। वह वोट प्रतिशत को लेकर। इंडिया टीवी के अनुसार बीजेपी को 48% , कांग्रेस को 33% , आम आदमी पार्टी को 16% और अन्य को 3%। वोट प्रतिशत और सीटों की संख्या का मिलान करने पर सर्वे फर्जी होने का यकीन हो जाएगा। 

2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 49.1% वोट और 99 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 41.4% वोट और 77 सीटें मिली थीं। अन्य को 4.3% वोट

किसी भी परिस्थिति में वोट प्रतिशत के अनुसार सीट संख्या का आकलन ठीक नहीं बैठता। क्योंकि आम आदमी पार्टी केवल कांग्रेस का वोट काटेगी यह संभव नहीं है। 

यह सर्वे सही नहीं लगता है इस सर्वे का मात्र उद्देश्य कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक में आम आदमी पार्टी सेंध मारेगी ऐसा परसेप्शन बनाना है। 

इस सर्वे की एनालिसिस के लिए इंडिया टीवी ने कुछ एनालिस्ट को चर्चा के लिए बैठाया था। जो लोग बैठे थे उनकी कोई अपनी पहचान नहीं थी। इनका उद्देश्य था कि कैसे जनता को भ्रमित किया जाए।

मनोज नाम के व्यक्ति के अनुसार ” आने वाले चुनाव में आम आदमी पार्टी को मात्र मुस्लिम और प्रवासी ही वोट करेंगे। गुजरात में मुस्लिम और प्रवासी ही केजरीवाल के वोटर हैं। ” इस प्रकार के विश्लेषण से गोदी मीडिया लगातार जनता के दिमाग में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की छवि को मुस्लिम तरफदार दिखाने का प्रयत्न कर रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि सूरत में आम आदमी पार्टी के 27 पार्षद हैं। जिनमें एक भी मुस्लिम नहीं है। आम आदमी पार्टी के अधिकतर पार्षद वराछा और कतार गाम से जीते हैं। इस इलाके में मुस्लिमों की संख्या बहुत कम है और पाटीदार समुदाय का दबदबा माना जाता है। 2015 में हुए पाटीदार अनामत आंदोलन के समय वराछा आंदोलन का केंद्र था।

कैसे बीजेपी विपक्ष को हिन्दू विरोधी और प्रो मुस्लिम दिखाने का षड्यंत्र करती है

पंजाब चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी द्वारा अहमदाबाद के निकोल में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान का एक रोड शो रखा गया था। केजरीवाल का रोड शो तो सफल रहा। लेकिन इस रोड शो के पहले बीजेपी ने अपने अल्पसंख्यक मोर्चे द्वारा दाढ़ी टोपी वाले मुस्लिम और बुर्क़े वाली महिलाओं को केजरीवाल की रैली में भेजने का षड्यंत्र किया था। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे ने गरीब मुस्लिम बस्तियों (अकबर नगर छपरा, कलंद्री मस्जिद की झुग्गी और जनरल हॉस्पिटल की झुग्गी) से दाढ़ी टोपी वाले मुस्लिम और बुर्क़े वाली महिलाओं  को 300 रू. की दहाड़ी से केजरीवाल की रैली में भेजा था। बीजेपी के नेताओं ने इन गरीब मुस्लिमों के बीच 1500 इस्लामी टोपी बांटी थी। उन्हें एक नारा सिखाया गया था। ” हर मुसलमान का नारा है केजरीवाल हमारा है।” बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के लोग मुस्लिम भीड़ के साथ थे।

बीजेपी वाले दाढ़ी टोपी वालों को केजरीवाल के रथ के आस पास पहुंचा कर “हर मुसलमान का नारा है केजरीवाल हमारा है।” नारा लगवाकर गोदी मीडिया से आम आदमी पार्टी की छवि भी मुस्लिम समर्थक और हिन्दू विरोधी बनाने षड्यंत्र कर रही थी। लेकिन पुलिस और आईबी को इस षड्यंत्र के बारे में पहले से मालूम हो चुका था। दाढ़ी टोपी वालों को रथ से दूर रखा फिर मीडिया ने यह खबर चलाई कि बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने केजरीवाल का स्वागत किया। आम आदमी पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष बब्लू राजपूत का कहना है। आम आदमी पार्टी ने अभी अभी अल्प संख्यक मोर्चा बनाया है। बीजेपी के पास मुसलमान और पाकिस्तान के अलावा कुछ नहीं है। मुस्लिम के नाम से ही बीजेपी के सारे षड्यंत्र तैयार होते हैं। जहां बीजेपी की सोच खत्म होती है वहां से आम आदमी पार्टी की सोच शुरू होती है। बीजेपी का कोई भी षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा।”

इसी प्रकार से AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी जब भी गुजरात आते हैं बीजेपी की मशीनरी ओवैसी के लिए भीड़ इकट्ठा करती है। ताकि कांग्रेस के वोटों को बांटा जा सके। बीजेपी अपने वोटों को एकजुट करने के साथ विरोधियों के वोटों को बांटने में सफल होती है।

(अहमदाबाद से कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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