Wednesday, December 1, 2021

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केयर्न एनर्जी ने फ्रांस में भारत की 20 संपत्तियां जब्त की, अदालती आदेश के बाद हुई कार्रवाई

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दिग्गज स्कॉटिश एनर्जी कंपनी केयर्न एनर्जी  ने पेरिस में कई भारतीय संपत्तियों को जब्त कर लिया है। भारत सरकार के साथ टैक्स विवाद के बाद एक आर्बिट्रेज अदालत ने भारत सरकार को 1.7 अरब डॉलर का हर्जाना देने को कहा था। लेकिन भारत सरकार ने इससे इंकार किया था। फ़्रांसीसी अदालत में मुकदमे के दौरान केयर्न ने एयर इंडिया की विदेश स्थित संपत्तियों को जब्त करने का आदेश मांगा था। उसका कहना है था कि चूंकि एयर इंडिया भारत सरकार की कंपनी है इसलिए उसकी संपत्ति जब्त की जा सकती है। इस बीच, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केयर्न एनर्जी द्वारा पेरिस में अपनी कुछ संपत्तियों को जब्त करने पर भारत सरकार कानूनी सहायता लेगी।

फाइनेंशियल टाइम्स की खबर के मुताबिक केयर्न एनर्जी 2 करोड़ यूरो की इन संपत्तियों का मालिकाना ट्रांसफर करवाएगी। फ्रांसीसी अदालत की ओर से जब्ती के आदेश के बाद यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे पहले केयर्न एनर्जी ने कहा था कि अदालती आदेश के बाद इसने विदेश में भारत की ऐसी 70 अरब डॉलर की संपत्तियों की पहचान की है, जिन्हें जब्त किया जाना है। यह कीमत ब्याज और पेनाल्टी को लेकर है। केयर्न एनर्जी भारत सरकार की जिन संपत्तियों को जब्त करने के लिए चिन्हित किया है उनमें एयर इंडिया के विमान और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज भी शामिल हैं।

केयर्न एनर्जी ने एक फ्रांसीसी अदालत से फ्रांस स्थित भारत सरकार की 20 संपत्तियों को जब्त करने का आदेश हासिल किया था। फ्रांसीसी अदालत ने 11 जून को केयर्न एनर्जी को भारत सरकार की संपत्तियों के अधिग्रहण का आदेश दिया था।इनमें ज्यादातर फ्लैट शामिल हैं, और इस बारे में कानूनी प्रक्रिया बुधवार शाम को पूरी हो गई। एक आर्बिट्रेज अदालत ने दिसंबर में भारत सरकार को आदेश दिया था कि वह केयर्न एनर्जी को 1.2 अरब डॉलर से अधिक का ब्याज और जुर्माना चुकाए। भारत सरकार ने इस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार की संपत्ति को जब्त करके वसूली के लिए विदेशों में कई न्यायालयों में अपील की। फ्रांसीसी अदालत ने केयर्न एनर्जी को भारत सरकार की संपत्तियों के अधिग्रहण का आदेश दिया, जिनमें ज्यादातर फ्लैट शामिल हैं।

ब्रिटिश ऊर्जा कंपनी और भारत सरकार के बीच बकाया टैक्स को लेकर पहले से चल रहा विवाद और गहरा हो गया है। भारत को एक जोरदार झटका तब लगा जब एक फ्रांसीसी अदालत ने केयर्न एनर्जी को विदेशों में स्थित भारत की 20 संपत्तियों पर कब्जा कर लेने की इजाजत दे दी। फ्रांसीसी अदालत ने 11 जून को केयर्न एनर्जी को भारत सरकार की संपत्तियों के अधिग्रहण का आदेश दिया था, जिनमें ज्यादातर फ्लैट शामिल हैं, और इस बारे में कानूनी प्रक्रिया बीती शाम पूरी हो गई। जिसके बारे में वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केयर्न एनर्जी द्वारा पेरिस में अपनी कुछ संपत्तियों को जब्त करने पर भारत सरकार कानूनी सहायता लेगी। हालांकि,  वित्त मंत्रालय से कहा गया है कि फैसले के संबंध में फ्रांसीसी अदालतों से अभी तक कोई संचार या नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। अगर इस तरह का कोई नोटिस मिलता है तो उस पर वकीलों से राय मशविरा करके भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कानूनी कदम उठाया जाएगा।

जनवरी 2014 में जब केयर्न एनर्जी केयर्न इंडिया लिमिटेड में अपनी अंतिम हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही थी तब भारत के आयकर विभाग ने रेट्रोस्पेक्टिव या पिछले वर्षों से टैक्स जांच शुरू करने का फ़ैसला किया। नतीजतन, केयर्न को सूचित किया गया कि उसे केयर्न इंडिया लिमिटेड में अपने शेष 10 प्रतिशत शेयर बेचने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। आयकर विभाग ने बाद में इन 10 प्रतिशत शेयरों के अधिकांश हिस्से को बेच दिया और आय और लाभांश भुगतान हासिल कर लिया।

2014 की इन घटनाओं के बाद केयर्न ने 2015 में यूके-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत कार्रवाई शुरू की। कंपनी का कहना था कि 2014 की घटनाओं के बाद कंपनी और उसके अंतरराष्ट्रीय शेयर धारकों पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ा। ऐसा माना गया कि इस विवाद के कारण केयर्न को न केवल अपनी संपत्ति बेचनी पड़ी बल्कि बड़े निवेश स्थगित करने पड़े और अपने कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी करनी पड़ी।

पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद 22 दिसंबर 2020 को अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने केयर्न के पक्ष में एक सर्वसम्मत निर्णय दिया।अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने पाया कि भारत सरकार की 2014 में शुरू की गई कार्रवाई यूके-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि का उल्लंघन कर रही थी।न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने पिछले वर्षों के टैक्स संशोधन जारी किए वे बेहद अनुचित थे और संधि के निष्पक्ष और न्यायसंगत समाधान के मानकों का उल्लंघन करते थे।अपने फ़ैसले में न्यायाधिकरण ने कहा कि केयर्न के ख़िलाफ़ की गई प्रवर्तन कार्रवाई के एवज़ में उसे 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर का हर्जाना ब्याज और लागत के साथ दिया जाए।अप्रैल 2021 तक केयर्न को भुगतान में दी जानी वाली राशि 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर थी।

केयर्न एनर्जी एक ब्रिटिश एनर्जी कंपनी है, जिसने साल 2007 में अपनी कंपनी को सूचीबद्ध कराने के लिए आईपीओ पेश किया था। इससे एक साल पहले उसने केयर्न इंडिया के साथ भारत में अपनी कई इकाइयों का विलय कर दिया था। लेकिन इससे मालिकाना हक में कोई बदलाव नहीं हुआ था। साल-साल बाद भारत में कर विभाग की ओर से केयर्न को कैपिटल गेंस टैक्स का नोटिस भेजा गया, जिसमें कहा गया कि आईपीओ से पहले केयर्न ने अपनी इकाइयों को केयर्न इंडिया में मर्ज कर लिया। इससे पूँजीगत लाभ हुआ। इसलिए उसे कर देना होगा।

भारत में टैक्स डिपार्टमेंट ने 10 हजार करोड़ से अधिक बकाये के एवज में केयर्न इंडिया के 10 फीसदी शेयरों को अपने कब्जे में ले लिया। भारत सरकार के कदम के खिलाफ केयर्न एनर्जी ने अदालत का रुख किया। इसके बाद भारत के खिलाफ दिसंबर 2020 में केयर्न एनर्जी ने एक केस जीता। मध्यस्थता अदालत के 568 पेज के फैसले में कहा गया कि केयर्न को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भारत सरकार को 1.2 अरब डॉलर देने होंगे। न्यायाधिकरण ने दिसंबर में सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था कि भारत ने 2014 में ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर 10,247 करोड़ रुपये का टैक्स लगाया था।

भारत सरकार ने इस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार की संपत्ति को जब्त करके देय राशि की वसूली के लिए विदेशों में कई न्यायालयों में अपील की। तीन सदस्यीय अंतराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन ने पिछले साल दिसंबर में एकमत से केयर्न पर भारत सरकार की पिछली तारीख से कर मांग को खारिज कर दिया था। न्यायाधिकरण में भारत की ओर से नियुक्त एक जज भी शामिल थे। न्यायाधिकरण ने सरकार को उसके द्वारा बेचे गए शेयरों, जब्त लाभांश और कर रिफंड को वापस करने का निर्देश दिया था। चार साल के दौरान पंचनिर्णय प्रक्रिया में शामिल रहने के बावजूद भारत सरकार ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और न्यायाधिकरण की सीट- नीदरलैंड की अदालत में इसे चुनौती दी थी। इससे पहले केयर्न एनर्जी ने न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दायर मामले में कहा था कि एयर इंडिया पर भारत सरकार का नियंत्रण है।

केयर्न एनर्जी ने इससे पहले कहा था कि उसने भारत सरकार से 1.72 अरब डालर की वसूली के लिये विदेशों में करीब 70 अरब डालर की भारतीय संपत्तियों की पहचान की है। इससे पहले पाकिस्तान और वेनेजुएला जैसे देशों को मध्यस्थता अदालत के फैसले का पालन नहीं करने पर इस प्रकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।) 

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