Subscribe for notification
Categories: बीच बहस

हर बात के लिए नेहरू जिम्मेदार, अब बस भी करो सरकार!

सनातन हो या कोई भी धर्म लोग किसी के मरने के बाद उसकी कमियों की पोटली वहीं बन्द कर देते हैं और उसकी अच्छाइयों को याद करते हैं, तभी तो मृत्यु शैय्या पर पड़े रावण से ज्ञान अर्जित करने के लिए भगवान राम भाई लक्ष्मण को रावण के पास भेजे थे।

मगर सनातन धर्म और श्रीराम के सहारे सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के लोग इससे इत्तफाक नहीं रखते, इसलिए केंद्रीय सत्ता के शीर्षस्थ लोग बजाय अपने कार्यों और उपलब्धियों को गिनाने के हर समस्या की जड़ में नेहरू को ठेल देते हैं।

वह दिन दूर नहीं जब बारिश कम हो तो नेहरू जिम्मेदार, तूफान आये तो नेहरू जिम्मेदार, इस समस्या के लिए नेहरू जिम्मेदार, उस समस्या के लिए नेहरू जिम्मेदार। मतलब देश की हर नाकामी और समस्या की जिम्मेदारी नेहरू के सर पर थोप दी जाएगी। यह अनायास नहीं है इसके पीछे एक पूरी सोची-समझी रणनीति है।  लेकिन नेहरू के खिलाफ फैलाये जा रहे इस दुष्प्रचार की वजह सब नहीं समझ पा रहे हैं। आज कश्मीर समस्या का हल हर भारतीय चाहता है, चाहे बाकी मुद्दे भले ही गौण हो जायें, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि  राष्ट्रवाद के नाम पर ‘संघी राष्ट्रवाद’ की रुई हमारे कानों में ठूंस दी गयी है और कश्मीर और आतंकवाद जैसे मुद्दों की आड़ में बढ़ती महंगाई, ध्वस्त अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, सरकारी क्षेत्रों का निजीकरण जैसे विषयों से ध्यान भटकाया जा सके।

ऐसा इसलिए भी हो रहा है क्योंकि सत्तारूढ़ भाजपा के शीर्ष नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह जानते हैं कि कब किस मुद्दे को उछाल कर जनता को भरमाया जा सकता है। चूंकि भारत के आजाद होने के बाद देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बने और लम्बे समय तक देश में कांग्रेस की सरकार रही है इसलिए बीजेपी अपनी उपलब्धियों को गिनाने की बजाय नेहरू और कांग्रेस में खामियां खोजती रहती है, ताकि जनता बीजेपी से ऊब भी जाए तो विकल्पहीनता की स्थिति में भी थक हार कर बीजेपी के पाले में ही खड़ी रहे। और दूसरी बात यह भी है कि संघ के छुपे एजेंडे के तहत आजादी के इतिहास के बड़े नायकों में वह तीन लोगों गांधी, नेहरू और सरदार पटेल को हमेशा अपने निशाने पर रखती है। चूंकि गांधी जी और सरदार पटेल के खिलाफ संघ सीधे मोर्चा नहीं खोलता इसलिए रणनीति के तहत वह नेहरू के खिलाफ मोर्चा खोले रहता है। और हर बात और समस्या का जिम्मेदार नेहरू को ठहराता है ताकि जनता के मन में नेहरू और गांधी के प्रति आक्रोश उपजता रहे। और जब नेहरू हर समस्या के लिए दोषी होंगे तो जाहिर सी बात है गांधी जी को भी लोग दोषी मानेंगे क्योंकि नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने में गांधी की अहम भूमिका थी। और सरदार पटेल को नेहरू, गांधी से इस तरह अलग-थलग कर दो कि सरदार पटेल को मानने वाला समाज भी नेहरू को गलत मानते हुए बीजेपी के पाले में खड़ा हो जाए, यह तो है बीजेपी की मंशा।

चलिए ‘सरकार’ हम भी मान लेते हैं कि नेहरू देश की हर समस्या के लिए जिम्मेदार और एक असफल राजनेता रहे। हम उनकी उपलब्धियों यहां तक कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान आजादी की लड़ाई में उनके जेल में बिताए गए 11 साल के समय की भी चर्चा नहीं करेंगे। मगर उनको कोसने या हर बात के लिए जिम्मेदार ठहरा देने से समस्या का हल नहीं होने वाला और जवाहर लाल नेहरू लौट कर आने वाले नहीं हैं, तो आखिर कब तक आप समस्याओं के समाधान की बजाय उसका ठीकरा नेहरू के सिर पर फोड़ते रहेंगे? आपका पिछला कार्यकाल भी नेहरू को कोसते बीता। इस कार्यकाल में भी नेहरू आ ही जा रहे हैं।

आखिरकार कब तक जनता का ब्रेनवॉश करेंगे, जनता ने इसलिए आपको नहीं चुना है कि नेहरू पर विलाप करें बल्कि जनता महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के खात्मे के साथ-साथ सिस्टम में सुधार और कश्मीर तथा आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए चुना है। उपलब्धियों का श्रेय आप लेते हैं तो समस्याओं का ठीकरा नेहरू के सिर पर क्यों? अब तो यही बचा रह गया है कि भारतीय  क्रिकेट टीम  जीतती है तो मोदी जी  और भगवा जर्सी की वजह से वरना हार के लिए तो नेहरू जी को जिम्मेदार ठहराया ही जा सकता है।

(अमित मौर्या वाराणसी से निकलने वाले दैनिक “गूंज उठी रणभेरी” के संपादक हैं।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on June 30, 2019 8:24 pm

Share