बीच बहस

शासनादेश से धन उगाही कैसे होती है यूपी श्रम विभाग से सीखें

बालू में से तेल निकलना हो तो श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवाएं से वे सरकारी विभाग सबक ले सकते हैं जिन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सूखा विभाग माना जाता है। मोडस आपरेंडी यह है कि पहले लाभ देने का आदेश जारी करो फिर जब लोग लाभ पा जाएं तो उसे रद्द कर दो और लाभार्थियों से वसूली का आदेश जारी कर दो। वसूली से घबराए लाभार्थी डाली पहुंचा दें तो फिर इसे रद्द करके पुराना आदेश लागू कर दो। ऐसा यूपी श्रम विभाग में किया गया है।

यूपी में योगी सरकार के सुशासन के दावे के बीच श्रम विभाग अनियमित आदेशों और धन उगाही के आरोपों से घिरा हुआ है! क्या आप विश्वास करेंगे कि श्रम विभाग द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवाएं चिकित्साधिकारियों की रिटायर्मेंट वर्ष 2017 में उम्र 60 से 62 वर्ष कर देता है और फिर तीन वर्ष बाद 17 जनवरी 2020 को कहता है कि रिटायरमेंट में दो वर्ष की वृद्धि को नियमित सेवा में नहीं जोड़ा जायेगा और 60 वर्ष की अधिवर्षता आयु तक देय सेवानिवृत्त लाभ ही अनुमन्य होंगे। इसके बाद अधिक धन प्राप्ति की वसूली के आदेश भी जारी कर दिए गये। आरोप है कि फिर धन उगाही करके इस आदेश को एक वर्ष के बाद वापस ले लिया गया। यह हो रहा है श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के विभाग में। ऐसा लगता है जैसे इस विभाग पर मुख्यमंत्री आदित्य नाथ और मुख्य सचिव की निगाह ही नहीं हैं।  

दरअसल उ.प्र. शासन के श्रम अनुभाग-6 द्वारा निर्गत शासनादेश सं. 862 / छत्तीस -6 -2017 -5 (171 )/92 टी . सी . दि. 29 जून 2017 द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा योजना के चिकत्साधिकारियों की अधिवर्षता उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई थी। तदनुसार 60 वर्ष के उम्र पार करने के बावजूद यथावत सेवारत समस्त  चिकित्साधिकारी 62 वर्ष की उम्र तक एक नियमित रूप से कार्यरत चिकित्साधिकारी की भांति अपनी समस्त सेवा जनित लाभ यथा वार्षिक वेतन वृद्धि एवं सेवानिवृत्त लाभ कुल 62 वर्ष की उम्र तक की सेवा के आधार पर पाते  रहे। उनमें से कई चिकित्साधिकारियों को उनकी 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद प्रोन्नत भी कर दिया गया।

इसके 3 वर्ष बाद अचानक श्रम विभाग -6 द्वारा ही जारी शासनादेश सं. 2047 /36 -6 -2019 -5 (171 )/92 टी.सी. दि.17 जनवरी 2020 द्वारा उपरोक्त अधिवर्षता उम्र में वृद्धि को पुनः परिभाषित करते हुए बताया गया कि उक्त सेवा में 2 वर्ष की वृद्धि को नियमित सेवा में नहीं जोड़ा जायेगा और 60 वर्ष कि अधिवर्षता आयु तक देय सेवानिवृत्त लाभ ही अनुमन्य होंगे। इस प्रकार अधिवर्षता उम्र में उपरोक्त वृद्धि को अप्रत्यक्ष रूप से सेवा विस्तार के रूप में परिभाषित किया गया और उक्त के अनुरूप 62 वर्ष की अधिवर्षता उम्र के आधार पर सेवाजनित और सेवानिवृत्त लाभ प्राप्त करने वाले चिकित्साधिकारियों से अधिक धन प्राप्ति की वसूली के आदेश भी जारी कर दिये गये हैं।

यू.पी.ई.एस.आई. मेडिकल सर्विसेज एसोसियेशन के पूर्व अध्यक्ष, डा. एम.बी.सिंह, ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस अनियमितता की जानकारी दी है और कहा है कि रिटायरमेंट की उम्र में वृद्धि का पर्याय सेवानिवृत्ति उम्र में वृद्धि है और ऐसा पूर्व में कई बार हो चुका है और इससे आच्छादित सरकारी कर्मी संशोधित अधिवर्षता उम्र तक पूर्व की भांति सेवा करते हुए सेवानिवृत्त हो जाते हैं। शासनादेश दि. 29 जून, 2017 द्वारा चिकित्साधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से 62 वर्ष किये जाने का आदेश बिना किसी भ्रम के पूर्णतया स्पष्ट है फिर भी इस  आदेश के 3 वर्ष बाद नये रिटायरमेंट उम्र के आधार पर सेवारत और सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारियों को डरा कर उनसे धन उगाही करने के उद्देश्य से बिना किसी वैधानिक आधार के शासनादेश दि 17 जनवरी 2020 द्वारा उक्त सेवानिवृत्ति उम्र में वृद्धि के आदेश को सेवा विस्तार के समान परिभाषित किया गया। 

डा. एम.बी.सिंह का आरोप है कि निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवाएं, उ.प्र. ने अपने स्तर से बिना उपरोक्त आदेश की वैधानिकता एवं औचित्य का परिक्षण किये तथा उक्त पर पुनर्विचार का शासन से अनुरोध किये तत्काल उक्त आदेश का अनुपालन करते हुए अपने  आदेश दि. 12 दिसम्बर 2020  द्वारा तदनुसार प्रभावित सेवारत और सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारियों से अधिक भुगतान की गई धनराशि की वसूली हेतु आदेश जारी कर दिया है। 

पत्र में आरोप लगाया गया है कि विश्वसनीय लेकिन साक्ष्यविहीन सूचना के अनुसार उपरोक्त शासनादेश दि.17 जनवरी 2020 से प्रभावित सेवारत और सेवानिवृत चिकित्साधिकारियों ने पारस्परिक रूप से संकलित एक धनराशि विशेष निदेशक के माध्यम से शासन के श्रम विभाग को पहुँचाया और निदेशक के  पत्रांक :टी -16 /2021 /3186 दि. 19 /02 /2021 द्वारा सेवा काल में उपरोक्त 2 वर्ष की वृद्धि को नियमित सेवा मानकर तदनुरूप सेवानिवृत्त लाभ प्रदान करने की संस्तुति शासन को की गई। तदुपरांत शासन के श्रम अनुभाग -6 के ही शासनादेश सं. 341 /36 -6 -2021 -5 (171 )/92 टी.सी. दि.29 मई 2021 द्वारा उपरोक्त शासनादेश दि. 17 जनवरी 2020 को त्रुटिपूर्ण मानते हुये निरस्त कर दिया गया।

पत्र में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि उपरोक्त संगठित भ्रष्टाचार के अति-गंभीर प्रकरण कि उच्च-स्तरीय जाँच करा कर दोषियों को दंडित किया जाए जो प्रदेश शासन को कलंकित कर रहे हैं। 

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 3, 2021 4:27 pm

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