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लोकतंत्र को दफ्न करने की तैयारी! डिजिटल चुनाव के रास्ते पर बिहार

कोरोना के कहर में बिहार विधानसभा के चुनाव अनिश्चितता के भंवर में फंस गए हैं। हालांकि देश बंदी खुलने की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक पार्टियों की चुनावी गतिविधियां आरंभ हो चुकी हैं। पर चुनाव-पूर्व तैयारी के रूप में सरकारी स्तर पर होने वाले कार्य ठप्प पड़े हैं। इस बारे में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय में चुनाव आयोग से कोई निर्देश नहीं आया है। मतदाता-सूचियों के पुनरीक्षण और प्रकाशन का काम जनवरी में ही पूरा हो गया। उसके बाद के काम रुके पड़े हैं।

वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है, इसलिए चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होना अपेक्षित है। चुनाव पूर्व तैयारियों में मतदाता सूचियों को अद्यतन, करना, प्रारूप का प्रकाशन और फिर अंतिम प्रकाशन पहला चरण होता है। फिर दूसरे कई काम करने होते हैं। खास कर आगामी चुनावों में ईवीएम मशीनों की आवश्यकता का आकलन करना, उन्हें पड़ोसी राज्यों से या कारखाने से मंगाना और फिर उनकी प्रथम स्तर की जांच करना प्रमुख होता है। यह काम अब तक हो जाना चाहिए था। लेकिन अभी यह काम शुरु भी नहीं हुआ है।

हालांकि देश बंदी के खुलने की शुरुआत होने पर मंगलवार को प्रदेश चुनाव कार्यालय के अधिकारियों की बैठक हुई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एचआर श्रीनिवासन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिला निर्वाचन अधिकारियों से बात की और मतदाता  सूचियों को अद्यतन किए जाने के बाद की तैयारियों के बारे में निर्देश दिया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सभी तैयारी जल्द आरंभ करने के साथ ही स्वीप कार्यक्रम बनाने के लिए कहा। 

इस बीच, राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं। चुनावी गठबंधन के लिए जोड़-तोड़ और पार्टियों की आंतरिक बैठकों का दौर आरंभ हो गया है। कोरोना-जनित देश बंदी की वजह से यह काम शिथिल पड़ा था। धीरे-धीरे उसमें जान आ रही है। पार्टियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कार्यकर्ताओं की बैठकें करने और उन्हें सक्रिय करने की कवायद शुरू कर दी है। इसमें पहल भारतीय जनता पार्टी ने की।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश भाजपा की कोर-कमेटी के नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि चुनाव भले गठबंधन दलों के साथ लड़ा जाए, पर तैयारी विधानसभा की सभी 243 निर्वाचन क्षेत्रों में की जाए। उसके बाद से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही जिला अध्यक्षों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। भाजपा ने बूथ स्तर पर सात लोगों की समिति बनाई है जिसे सप्तर्षि नाम दिया गया है। आगामी चुनावों में पार्टी इस समिति को बड़ी भूमिका देने वाली है।

भाजपा अब वर्चुअल रैली करने की तैयारी में है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जायसवाल ने बताया कि दो रैली की जाएगी। पहली रैली नौ जून को होगी जिसे गृहमंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे। दूसरी रैली को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा संबोधित करेंगे। उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। डॉ. जायसवाल ने मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर सरकार की उपलब्धियों का विवरण देते हुए संकेत दिया कि भाजपा विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के नाम के सहारे ही उतरने वाली है।

हालांकि बिहार भाजपा के सर्वोच्च नेता और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी भाजपा-जदयू गठबंधन एकसाथ मैदान में उतरेगा और गठबंधन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। पर पार्टी का एक तबका लगातार दबाव बनाए हुए है कि पार्टी को जदयू से छुटकारा लेना चाहिए। इस गुट में केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, विधान परिषद सदस्य सच्चिदानंद राय और विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान प्रमुख हैं।

डॉ. पासवान ने कहा कि चुनाव में भले भाजपा-जदयू गठबंधन एक साथ उतरें, पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बार मुख्यमंत्री का पद भाजपा को सौंपने की मानसिक तैयारी रखनी चाहिए। वैसे जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर के पार्टी नेताओं से बात कर चुके हैं और उन्हें चुनावी तैयारी में जुट जाने का निर्देश दिया है ताकि एनडीए भारी बहुमत से जीत सके। लेकिन इस गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, इसमें कोई संदेह नहीं। लोजपा के चिराग पासवान भी पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत कर चुके हैं और निरंतर संपर्क में हैं।

उधर विपक्षी गठबंधन भी अपनी तैयारी में लग गया है। उस गठबंधन के केन्द्र में राजद और कांग्रेस हैं, पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माझी की ‘हम’, मुकेश साहनी की वीआईपी और उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा भी पिछले लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन के अंग थे। पर बाद में उनके आपसी संबंध बेहतर नहीं रहे। विधानसभा चुनाव में गठबंधन कैसा स्वरूप लेगा, यह एकदम स्पष्ट नहीं है। तीनों घटक दलों की एक बैठक पिछले दिनों हुई जिसमें राजद या कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था। बैठक में राजद के व्यवहार के बारे में खासतौर पर चर्चा हुई और उससे गठबंधन नहीं होने की स्थिति में वामदलों के साथ गठबंधन करने की संभावना तलाशने की बात भी हुई।

बहरहाल बिहार विधानसभा चुनाव में डिजिटल माध्यमों की बड़ी भूमिका रहने वाली है, इतना स्पष्ट हो गया है। भाजपा ने तो मतदान में भी डिजिटल माध्यम का उपयोग करने की सलाह दे दी है, विपक्ष इसे अव्यवहारिक बता रहा है। देखना है कि इस मामले में आखिरकार होता क्या है।

(वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ की पटना से रिपोर्ट।)  

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