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मानव सेवा के अपराध में हमें हाउस अरेस्ट किया गया: दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष

नई दिल्ली। आज सुबह 9 बजे के आस-पास न्यू अशोकनगर के एसएचओ कुछ दिल्ली पुलिसकर्मियों को साथ लेकर दिल्ली कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी के घर पहुँचे। और उनसे कहा कि-  “आप घर से बाहर नहीं निकल सकते।” और इसके बाद दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मचारियों को उनके घर पहरे पर बिठाकर उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया है।

दिल्ली कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनिल चौधरी का कहना है कि, “हम कल गाजीपुर बॉर्डर पर लोगों की मदद कर रहे थे, उन्हें खाना बांट रहे थे। जो लोग नंगे पांव जा रहे थे, जिनके पांव में छाले थे उन्हें चप्पल बांटा। एक गर्भवती महिला परेशान थी उसे अपनी गाड़ी से हमने नजदीकी हेडगेवार अस्पताल में भर्ती करवाया। एक घंटे बाद हमें सूचना मिली कि उक्त महिला ने एक बेटे को जन्म दिया है। क्या एक पीड़ित की मदद करना अपराध है? हमें मानव सेवा के अपराध में गिरफ्तार किया गया है।”

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आगे कहते हैं- “राहुल गांधी जी मथुरा रोड सुखदेव बिहार से निकल रहे थे तो उन्हें 15-20 मजदूरों का समूह दिखा जो उत्तर प्रदेश और हरियाणा जा रहा था। उनको देखकर वो अपनी गाड़ी रोककर उतरे और मजदूरों से बात की। इसी बीच में हम लोग भी वहां पहुंचे और हम लोगों ने राहुल गांधी जी के आदेश पर वहां मौजूद उन मजदूरों की यथासंभव मदद किया।”

दिल्ली पुलिस का आरोप

दिल्ली पुलिस ने उन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि-“ खाना बाँटने के नाम पर मजदूरों को गाड़ी में बिठाकर सीमा पर छोड़ रहे हैं जिससे कानून व्यवस्था खराब हो रही है। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी बुनियादी बातों को भी फॉलो नहीं किया जा रहा था। इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। प्रवासी मजदूरों को भेजने की एक प्रक्रिया है उसे फॉलो नहीं किया जा रहा था।”

डीसीपी ईस्ट जसमीत सिंह का कहना है कि कुछ लोग खाना खिलाने के नाम पर अवैध तरीके से मजदूरों को ट्रकों और बसों में भरकर शनिवार व रविवार को यूपी बॉर्डर पर छोड़कर आए हैं। हमारे पास काफी वीडियो एविडेंस भी हैं। इसी वजह से हमने उन्हें घर पर ही डिटेन किया है।

पुलिस के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल चौधरी कहते हैं, “हमारी पार्टी की रसोईं चल रही थी गाजीपुर हाइवे पर हम उसे देखने गए थे। मैं अपने वॉरियर्स की हौसला अफजाई करने गया था। गाजीपुर सीमा पर हजारों की संख्या में मजदूर फँसे हुए हैं। भूखे प्यासे मजदूरों के रहने खाने की व्यवस्था करनी चाहिए। वहां शौचालय नहीं है, मेडिकल टीम नहीं है, अगर वो कहीं नहीं जा पा रहे हैं तो वहां शेल्टर होम, या क्वारंटाइन सेंटर ही बना दीजिए। सब्जी मंडी है नजदीक ही वहीं उनके रहने की अस्थाई व्यवस्था कर दीजिए।

आप तो सरकार हो आपके पास पूरा मेकैनिज्म है आप कर सकते हो। पर आप नहीं कर रहे हो। और हम अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं तो आप हमें अरेस्ट करवाकर हमें भी करने से रोक रहे हो। यही वो लोग हैं जो बोलते थे हम सिविल सोसायटी से आए हैं हम हर फैसला लोगों से पूछ कर, जनमत करवाकर करेंगे। और आज ये क्या कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कोई लोकल प्लान बनाया इन्होंने। बस प्रेस कान्फ्रेंस करके लॉक डाउन प्लान थोप दिया और जाकर सो गए। ये बस गृहमंत्रालय के रिमोट बनकर रह गए हैं जो वो कह रहे हैं वही कर रहे हैं।

राहुल गांधी के सड़क पर उतरने के बाद ही क्यों की गई कार्रवाई

प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान कई पत्रकार अनिल चौधरी से ये सवाल पूछते हैं कि, “आप लोग तो लॉकडाउन के बिल्कुल शुरुआत से ये सब कुछ करते आ रहे हैं जो आपने कल किया और जिसके लिए आपको हाउस अरेस्ट किया गया है। तो क्या ये समझा जाए कि कल राहुल गांधी के सड़क पर उतरने के चलते ये कार्रवाई की गई है?”

अनिल चौधरी जवाब में कहते हैं ये हम कैसे बता सकते हैं आप ये सवाल उनसे पूछिए जिन्होंने किया है या जिन्होंने करवाया है। पुलिस के पास इसका कोई जवाब नहीं है वो खुद इस सवाल पर फंस जाएगी कि उसने मुझे किस आरोप में हाउस अरेस्ट किया है। जबकि वो लोग खुद लोगों को पास बना बनकर, ट्रकों पर बैठा बैठाकर जिले की सीमा तक छोड़ रहे हैं।

दूसरी बात दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर डबल लेयर सिक्योरिटी बैरिकेड्स लगाए गए हैं। यदि इतनी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था है तो कोई कैसे छोड़ सकता है फिर।

दिल्ली कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनिल चौधरी का डिजिटल प्रेस कान्फ्रेंस

आज दोपहर में करीब डेढ़ बजे हाउस अरेस्ट प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने अपने आवास से डिजिटल प्रेस कान्फ्रेंस करके पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी दिल्ली और केंद्र सरकार पर कुछ गंभीर आरोप लगाए और मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब दिया। अनिल चौधरी ने कहा, “आज प्रवासी मजदूर रेलवे स्टेशनों पर हैं, सड़कों पर कुचले जा रहे हैं, ट्रैक पर मालगाड़ी के पहिये तले कट रहे हैं। गर्भवती मजदूर स्त्रियां सड़कों पर पैदल चलते हुए बच्चे जन रही हैं। ये सब देखकर चुप नहीं रहा जाता। आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जब राशन नहीं मिलता तो पथराव होता है। कई जगहों पर भूखे प्यासे फँसे मजदूर सड़क जाम कर रहे हैं पत्थर फेंक रहे हैं क्योंकि वो परेशान हैं। जो जिम्मेदारी सरकार की बनती है वो विपक्ष और स्वयंसेवी संगठन कर रहे हैं। हमने ऐसा कोई पोलिटिकल कदम नहीं उठाया कि हमारे पार्टी के लोगों द्वारा दी जा रही मदद पोलिटिकल प्रचार लगे। हम लगातार सरकार से इज़ाज़त मांगते रहे। कई पत्र लिखे कोई जवाब नहीं दिया। सरकार के पास संसाधन नहीं है सरकार का तंत्र फेल हो गया है तो हम आपका सहयोग कर रहे हैं। हमें परमीशन दिया जाए। हमें ईमेल आया कि आप नोडल ऑफिसर से बात कीजिए।

इन्हीं श्रमिकों ने आपको चुना है। आपने इनसे कहा था कि आप जन धन खाते में पैसा डालोगे। लोगों को मुफ़्त खाना दोगे। लेकिन आप अपने वादों को निभाने के बजाय मजबूर मजदूरों पर पुलिस से लाठियां मरवा रहे हो।

दिल्ली सरकार ने कैंसिल किया बस का परमीशन

अनिल चौधरी आगे बताते हैं, “हमने दिल्ली में फँसे प्रवासी मजदूरों के लिए बस की परमीशन मांगी आपने नहीं दिया। हमने प्रवासी मजदूरों की पूरी सूची बनाकर भेजा और उनका पास बनाने की सिफारिश की। फिर हमें 13 बसों की परमीशन मिला। हमने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक बस में 25-30 लोगों को बैठाकर भेजने की बात की। पहले हमें स्क्रीनिंग करवाने के लिए बुलवाया गया। दो बसों के यात्रियों की स्क्रीनिंग भी हो गई पास भी बन गया फिर अचानक से जाने क्या हुआ कि दिल्ली सरकार ने सभी बसों की परमीशन रद्द कर दी। दिल्ली सरकार के खाकी वर्दीधारी कार्यकर्ता पार्टी के कार्यकर्ता स्क्रीनिंग स्थल पर आए और उन्होंने लोगों के पास छीनकर फाड़कर फेंक दिए। कार्यकर्ताओं के मोबाइल छीनकर उसमें मौजूद वीडियो और फोटोज डिलीट कर दिए। परमीशन खींचकर फाड़ दिया।

16 मई तक की परमीशन थी। लेकिन हमने नहीं की। 13 को दिल्ली प्रशासन ने कैंसिल की। वो बोले हमारे पास नहीं है तो हमने बस भेजकर परमीशन मांगी। हमारे पास पूरे सबूत हैं। दिल्ली और केंद्र सरकार हमारे सामाजिक मानवीय कामों को देखकर घबरायी हुई है।

शुरू में सरकार ने कहा था कि हम सब कोरोना के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे लेकिन न तो आप मदद कर रहे हैं न हमें करने दे रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी के दफ्तर को बनाया शेल्टर होम, कांग्रेस कार्यकर्ता रसोई चलाकर हाईवे पर खाना बांट रहे हैं

अनिल चौधरी ने आगे बताया कि कांग्रेस ल़ॉकडाउन के पहले दिन से कांग्रेस रसोई चला रही है दिल्ली के भीतर। फिर हमने हाइवे पर कांग्रेस रसोई शुरु की ताकि जो सड़कों से जाने वाले प्रवासी मजदूर हैं वो भूखे न रहें। हम उन्हें चाय पिला रहे हैं खाना खिला रहे हैं, नंगे पांव हैं तो चप्पल बांट रहे हैं, स्त्रियों को सैनिटरी पैड बांट रहे हैं।

रास्ते के लिए गुड़-चना दे रहे हैं। पानी की बोतल दे रहे हैं।

“हमने दिल्ली स्थित अपने दफ्तर में शेल्टर बनाया है प्रवासी मजदूरों के लिए। वो आए यहां रहें उनके रहने खाने की व्यवस्था है, सरकार यदि पास और परमीशन देगी तो हम उन्हें जहां जाना चाहेंगे वहां छोड़ेंगे भी।”

“दिल्ली पुलिस वालों को भेजा गया हमारे पास ये कहने के लिए कि आप लोग अपना बैनर नहीं लगाओगे। लोगों को खाना पानी देते वक्त़। हमने कहा ठीक है। हमारा मकसद सेवा करना मदद करना है प्रचार करना नहीं हम मान गए”- अनिल चौधरी जब ये बात बता रहे थे तब मुझे वो दृश्य़ याद आ रहा था जब पहली श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन को भाजपा पार्टी का झंडा दिखाकर रवाना किया गया था, ख़ैर।

वो आगे कहते हैं , “जो काम सरकार के लोगों को करना चाहिए था वो नहीं हो रहा है। दिल दहलाने वाली खबरें देखकर हम उतरने के लिए मजबूर हुए। गृहमंत्री और मुख्यमंत्री से पूछ रहा हूँ कि आप लोग क्या कर रहे हैं आप तक ये ख़बरें क्यों नहीं जा रही हैं। आप लोग हमारे काम से इतने भयभीत क्यों हैं।”

इस सवाल के जवाब पर अनिल चौधरी बताते हैं कि दिल्ली कांग्रेस के कार्यालयों में 90 हजार लोगों ने संपर्क करके मदद मांगा है। हमारे पास उनका पूरा ब्यौरा है। इसके अलावा कांगेस कार्यालय पर चलाई जा रही कांग्रेस रसोई के जरिए 4.50 लाख लोगों को राशन बांटा है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on May 17, 2020 5:29 pm

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