Friday, April 19, 2024

जस्टिस काटजू ने दिया मोदी को राष्ट्रीय सरकार के गठन का सुझाव, कहा- ब्रिटेन के चर्चिल से सीखें पीएम

नई दिल्ली। रिटायर्ड जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने पीएम मोदी को देश में राष्ट्रीय सरकार गठित करने का सुझाव दिया है। इस सिलसिले में उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान के इंग्लैंड का उदाहरण दिया है जब वहां चर्चिल के नेतृत्व में राष्ट्रीय सरकार का गठन हु्आ था और फिर उस सरकार के नेतृत्व में पूरा विश्व युद्ध लड़ा गया था। उस समय ब्रिटिश संसद में विपक्ष के नाम पर कोई दल नहीं था।

काटजू का कहना है कि मौजूदा संकट भी भारत के लिए कुछ उसी तरह का है। जब वर्तमान सरकार और उसका पूरा नेतृत्व समस्याओं को हल करने में नाकाफ़ी साबित हो रहा है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा है कि वह पीएम मोदी से पूरे सम्मान के साथ कहना चाहते हैं कि जिन गहरी समस्याओं का मौजूदा देश सामना कर रहा है वह ख़ुद उनके और उनकी पार्टी के लिए इतनी बड़ी हैं कि उन्हें सँभाल पाना उनके लिए मुश्किल है। अर्थव्यवस्था बहुत तेज़ी से गिर रही है और महामारी ने स्थिति को बहुत ही ज़्यादा बदतर कर दिया है।

उनका कहना है कि हम लोग ऐतिहासिक स्तर के ख़तरों का सामना कर रहे हैं। किसी भी समय खाने के लिए दंगे शुरू हो सकते हैं। क़ानून और व्यवस्था कभी भी ध्वस्त हो सकती है और पूरे देश में अराजकता फैल सकती है। उनका कहना था कि ऐसे में आज पूरे देश की तरफ़ से सामूहिक प्रयास की ज़रूरत है। इसलिए प्रिय, प्रधानमंत्री कृपया राजनीतिक मतभेदों को दूर करिए और राष्ट्रीय सरकार का गठन कर एक उच्च मानदंड स्थापित कीजिए जो मौजूदा संकट के समय में एक साथ मिलकर देश को चलाएगी। अगर आप ऐसा करते हैं तो चर्चिल के तौर पर एक महान स्टेट्समैन की तरह आपकी प्रशंसा की जाएगी।

मोदी जी, तत्काल एक राष्ट्रीय सरकार का गठन करिए जैसा कि मई 1940 में चर्चिल ने किया था।

उन्होंने आगे कहा कि “मेरे विचार में प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सरकार के गठन के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। जिसमें मौजूदा विपक्षी दलों के नेताओं के साथ कुछ वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञ शामिल होने चाहिए।” उन्होंने कहा कि ब्रिटिश पीएम विंस्टन चर्चिल ने इसको मई, 1940 में इस समय किया था जब ब्रिटेन पर नाजी जर्मनी के आक्रमण का ख़तरा मंडरा रहा था।

यह राष्ट्रीय सरकार मई, 1940 से लेकर मई, 1945 तक काम की थी, जब विश्वयुद्ध समाप्त हुआ था। इस दौरान ब्रिटिश संसद में कोई भी विपक्षी दल नहीं था क्योंकि वह सरकार का हिस्सा बन चुका था। बहुमत वाले कंज़रवेटिव दल का नेता होने के नाते चर्चिल प्रधानमंत्री बने रहे जबकि विपक्षी लेबर पार्टी के नेता एटली को उप प्रधानमंत्री बनाया गया। लेबर पार्टी के दूसरे लोग भी सरकार में शामिल हुए थे। 

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