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Categories: बीच बहस

कानपुर शूट आउट मामला मामूली नहीं, खाकी की मिलीभगत से हुआ खाकी का काम तमाम!

कानपुर के बिकरु गांव में 8 पुलिसवालों की हत्या के मामले की विवेचना में लगातार ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जिससे लगता है इस हाई प्रोफाइल केस में सत्य तक पहुंचने के बजाय किसी भी तरह से विकास दुबे को पकड़कर मामले का पटाक्षेप कर दिया जाए क्योंकि किसी के साथ फोटो होने पर उसकी संलिप्तता पर सवाल उठने लगता है। विकास दुबे के मामले में तो बहुत बड़े बड़े लोग सवालों के घेरे में आते नजर आ रहे हैं। और यही हुआ, मीडिया में ख़बरें प्लांट करायी गयीं कि विकास दुबे टीवी चैनलों के दफ्तर में सरेंडर कर सकता है और दुबे ने उज्जैन के महाकाल मन्दिर में सरेंडर कर दिया।

कानपुर से भागा और भाजपा शासित राज्य हरियाणा पहुंचा जहाँ पुलिस को अचानक इल्हाम हुआ कि विकास दुबे हरियाणा में है, छापे से पहले भाग गया फिर अचानक दूसरे भाजपा शासित एमपी में प्रगट हो गया। क्या आप को लगता है यह महज संयोग है ? भागना होता तो नेपाल भी जा सकता था। दरअसल वह भागना चाहता ही नहीं था बल्कि सरेंडर चाहता था जिसमें उसका एनकाउंटर न हो। जो राज्यमंत्री की हत्या में बेदाग बरी हो गया उसके लिए आठ पुलिस कर्मियों की हत्या कोई ख़ास मायने नहीं रखती। पुलिस का ही कहना था कि हमले में एके 47 का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया फिर अब तक विकास के जिन लोगों का एनकाउंटर पुलिस ने किया है उनके पास से एक भी एके 47 अभी तक बरामद नहीं हुई। तो कहाँ चली गयी सभी एके 47?

कहने को तो 8 जुलाई बुधवार को पुलिस महकमे ने बड़ी कार्रवाई की। चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। तिवारी और शर्मा दोनों ही मुठभेड़ के वक्त बिकरु गांव में मौजूद थे। लेकिन, जैसे ही एनकाउंटर शुरू हुआ, दोनों भाग गए थे। अब अपराधशास्त्रियों का मनना है कि इस कांड में केवल मुखबिरी ही नहीं हुई थी बल्कि चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा ने मुख्य आरोपी विकास दुबे के साथ मिलकर ट्रैप तैयार किया था, जिसमें फंसाकर दबिश डालने गये सीओ देवेन्द्र मिश्र सहित 8 पुलिसकर्मियों की जघन्य हत्याएं की गयीं।

अब इसका क्या जवाब है कि दबिश के समय सूचना मिलने पर विकास दुबे ने इतना बड़ा ट्रैप कैसे तैयार कर  लिया। इतने कम समय में कहाँ से और कैसे इतने हमलावरों को एके-47 के साथ इकट्ठा कर लिया। विकास दुबे ने इतने कम समय में अपने और आसपास के लगभग आधे दर्जन मकानों में कैसे इतनी जल्दी मोर्चाबंदी कर ली। विकास को पुलिस की दबिश का पता पहले से ही चल गया था या दबिश डालने के पीछे भी साजिश है क्योंकि दबिश का आदेश किसने दिया, किसकी योजना के तहत दबिश दी गयी या एसओ विनय तिवारी ने ही विकास के साथ मिलकर मौत का फंदा बनाकर सीओ देवेन्द्र मिश्र को दबिश डालने के लिए तैयार तो नहीं किया था? सीओ देवेन्द्र मिश्र तो रहे नहीं इसलिए इन सवालों का जवाब कैसे मिलेगा, जब इतनी लचर तफ्तीश चल रही हो?

आज तक पुलिस के आला अफसरों ने घटना का विस्तृत विवरण प्रेस के सामने नहीं रखा है। अगर पहले से ट्रैप नहीं बिछाया गया था तो विकास ने अपने घर और आस-पास के घरों में हमले की इतनी पुख्ता तैयारी कैसे कर रखी थी? उसके आदमी एके47 जैसे असलहों के साथ तैयार थे। पुलिस को घेर लिया गया था, जब टीम जेसीबी तक पहुंची तो उस पर चारों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई थी। विकास के घर के अलावा अगल-बगल के घरों से भी गोलियां चलाई जा रही थीं।

कहा जा रहा है कि जैसे एनकाउंटर शुरू हुआ दोनों एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा भाग गए थे।एक सवाल यह भी है कि क्या इन दोनों ने विकास दुबे को एनकाउंटर के बाद घटनास्थल से भागने में भी मदद की? क्या इन दोनों ने पुलिस की गाड़ी से तो विकास दुबे को नहीं भगाया? आखिर विकास दुबे और उसके कई दर्जन हमलावर घटनास्थल से किस रास्ते से, किस वाहन से और किसकी मदद से भागे? आज तक पुलिस के आला अफसरों ने यह तक नहीं बताया कि विकास दुबे के घर से किस रास्ते से वे भागे होंगे? विकास दुबे के घर से कितने रास्ते हैं और कहाँ-कहाँ जाते हैं ?

हत्याकांड की जांच कर रहे एसटीएफ के डीआईजी अनंत देव त्रिपाठी को सरकार ने हटाकर पीएसी भेज दिया था। हत्याकांड में शहीद हुए डीएसपी देवेंद्र का एक खत सामने आया था। यह खत तत्कालीन कानपुर एसएसपी अनंत देव को लिखा गया था। इसमें कहा गया था कि चौबेपुर के थानेदार विनय तिवारी, विकास दुबे को बचाने का काम कर रहे हैं और इन पर कार्रवाई की जाए। पर अनंत देव ने कोई कार्रवाई नहीं की? क्यों? क्या थानेदारी पैसे लेकर दी गयी थी या सत्ता पक्ष से कोई राजनीतिक दबाव था? जब दूसरे एसएसपी आये तो उन्होंने भी चौबेपुर के थानेदार विनय तिवारी को नहीं बदला? क्यों?

शूट आउट के 5 दिन बाद पुलिस ने विकास दुबे के करीबी अमर दुबे का एनकाउंटर कर दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने हमीरपुर में अमर को मार गिराया। उसके पास से ऑटोमैटिक गन और एक बैग मिला है। अमर 2 जुलाई को बिकरू गांव में हुए शूट आउट में शामिल था। अमर और उसके साथी सीओ देवेंद्र मिश्र को घसीटकर विकास के मामा प्रेम कुमार पांडे के घर में ले गए और गोलियों से भून दिया था।

डीएसपी देवेंद्र के भाई कमलकांत ने भी अनंत देव पर आरोप लगाया था कि पत्र पर कार्रवाई नहीं की गई। अब त्रिपाठी की जगह पीएसी आगरा के सेनानायक सुधीर कुमार सिंह को एसटीएफ एसएसपी बनाया गया। मामले की जांच यही करेंगे। इसके अलावा पूरे चौबेपुर थाने के 55 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

कानपुर के बिकरू में हुई 8 पुलिसकर्मियों की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ही पुलिस विभाग में छिपे दागियों पर भी शिकंजा कसता जा रहा है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि चौबेपुर एसओ विनय तिवारी को अधिकारी जब क्राइम सीन समझाने के लिए बिकरू गांव ले गए तो वह एसटीएफ और पुलिस अधिकारियों को क्राइम सीन तक नहीं समझा पाए। विनय तिवारी यह भी नहीं बता पाए कि उनके साथी कहां छिपे थे और बदमाश कहां-कहां से फायरिंग कर रहे थे। उनसे यह भी पूछा गया कि आखिर आप को कैसे खरोंच नहीं आई, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था। पुलिस ने निलंबित एसओ और बीट प्रभारी केके शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में पता चला कि सीओ देवेंद्र मिश्रा जब पुलिस टीम के साथ विकास के घर की तरफ आगे बढ़े तो चौबेपुर एसओ पहले ही रुक गए। विनय की इस हरकत से अनजान सीओ टीम के साथ आगे बढ़ गए। बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग करना शुरू कर दिया। फायरिंग होते ही विनय तिवारी अपनी टीम के साथ मौके से भाग गए। इस वजह से निलंबित एसओ को खरोंच तक नहीं आई।

सीओ देवेंद्र मिश्रा और निलंबित एसओ विनय तिवारी में तालमेल नहीं बैठता था। खासतौर पर विकास दुबे का मामला आता था तो सीओ के कहने पर भी निलंबित एसओ टालमटोल करता रहता था। विनय तिवारी पर अधिक दबाव बनाया जाता था तो वह हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के कान भरता था कि सीओ के कहने पर यह कार्रवाई करनी पड़ी। इसी कारण एसओ विनय तिवारी ने हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के साथ मिलकर मौत का फंदा बनाया जिसमें फंसकर 8 पुलिसकर्मी मारे गये।पुलिस की संलिप्तता का पता इससे भी चलता है कि इस ब्लाइंड मुठभेड़ में साक्ष्य मिलना और पकड़े गये लोगों का कोर्ट से दंडित होना असम्भव नहीं तो अत्यंत मुश्किल है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 9, 2020 1:05 pm

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