Sun. May 31st, 2020

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है भूपेश बघेल की किसान न्याय योजना

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भूपेश बघेल और सोनिया तथा राहुल गांधी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राजीव गांधी की पुण्यतिथि 21 मई के दिन प्रदेश में किसानों के लिए ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ लांच की गई है । उल्लेखनीय है कि विगत लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने पूरे देश के गरीबों के लिए ‘ न्यूनतम आय सहायता योजना’  यानि ‘न्याय’ योजना का मसौदा सामने लाया था जिसके तहत देश के 5 करोड़ परिवार यानि तकरीबन 20 फीसदी गरीब जनता को सालाना 72 हजार रुपये दिए जाने की योजना थी। महत्वपूर्ण बात यह थी कि इस योजना के अंतर्गत पैसे सीधे खाते में डाले जाने थे।

राहुल गांधी अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित थे मगर चुनाव में हार की वजह से यह महत्वाकांक्षी योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब छत्तीसगढ़ में मुख्य मंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना को नए फॉर्मेट में ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के नाम से किसानों के लिए लागू किया है। इस योजना के प्रति कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि योजना के उद्घाटन कार्यक्रम में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी खुद शामिल हुए। मुख्य मंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना को छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए क्रियान्वित कर राहुल गांधी की स्वप्निल परियोजना को साकार करने की दिशा में धरातल पर लाने का काम किया है । 

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राजीव गांधी किसान न्याय योजना किसानों को खेती-किसानी के लिए प्रोत्साहित करने की देश में अपने तरह की एक बड़ी योजना है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को अधिकतम 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि देगी। इस योजना के  पहले चरण में राज्य के लगभग 19 लाख किसानों को चार किश्तों में तकरीबन 5700 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा। इस योजना का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जाएगी। गौरतलब है कि कोरोना संकट के दौरान भी राहुल कई बार केंद्र से गरीबों और मजदूरों के खाते में सीधे पैसा डालने की बात कर चुके हैं। इस मुद्दे पर वह रघुराम राजन और नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी से भी बात कर चुके हैं।

भूपेश बघेल द्वारा किसानों को सीधे लाभ पहुंचाना राहुल गांधी की इसी सोच के तहत उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न सिर्फ किसानों को बल्कि उनके जरिए कोरोना संक्रमण के दौर में दम तोड़ते बाज़ार को भी राहत मिलेगी। खाते में पैसा होने से पूंजी प्रवाह में तेजी आएगी और बाजार को गति मिलेगी। इस योजना की दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आश्वस्त किया है कि आगे इस योजना में सभी तरह की फसल लेने वाले किसानों के साथ ही योजना के द्वितीय चरण में राज्य के लाखों भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी इस योजना का लाभ दिलाने  के लिए उन्हें योजना के अंतर्गत शामिल किया जाएगा । मुख्यमंत्री बघेल ने इस दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति भी गठित कर दी है। यह समिति दो माह में विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करेगी।

भूमिहीन किसानों को शामिल करना एक महत्वपूर्ण पहल है। आज तक खेतिहर मजदूरों को किसी भी प्रकार की कृषि संबंधित योजना का लाभ नहीं मिलता रहा । भूमिहीन होकर मजदूर बना किसान बहुत ही बदतर परस्थितियों में जीने को मजबूर होता है । इन्हीं परिस्थितियों के चलते अधिकांश खेतिहर मजदूर पलायन का रास्ता अपनाते हैं । इस योजना में उनके लिए भी प्रावधान किया जाना निश्चित रूप से  खेतिहर मजदूरों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम  है और अगर इस योजना का सही क्रियान्वयन किया गया तो यह योजना छत्तीसगढ़ से श्रमिकों का पलायन रोकने में भी कारगर साबित हो सकती है ।

सवाल यह है कि क्या भूपेश बघेल द्वारा लागू की गई राहुल गांधी की न्याय योजना कांग्रेस के लिए मनरेगा की तरह लाभकारी साबित हो सकेगी? गौरतलब है कि यूपीए शासनकाल के दौरान शुरू की गई मनरेगा योजना से कॉंग्रेस पार्टी को काफी लाभ हुआ था। मनरेगा आज भी जारी है और कोरोना के कारण शहरों से गांव वापस लौटने वाले मजदूरों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है और इसीलिए एक समय मनरेगा की कटु आलोचना करने वाले मोदी जी कोरोना संकट से निजात पाने के लिए मनरेगा के बजट में बढ़ोतरी करने को बाध्य हुए हैं ।  

राहुल गांधी कोरोना काल के पहले से ही मोदी सरकार को किसानों के मुद्दे पर लगातार घेरते रहे हैं । इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि छत्तीसगढ़ में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं तो निश्चित रूप से राहुल गांधी कांग्रेस शासित अन्य राज्यों को भी यह योजना लागू करने कह सकते हैं। किसानों का बड़ा वर्ग पहले से ही कांग्रेस का समर्थक माना जाता है। एक तरह से  कांग्रेस का वोट बैंक गरीब किसान ही रहे हैं तो निश्चित तौर पर किसान न्याय योजना की सफलता पार्टी के लिए यह एक ठोस व महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और कॉंग्रेस पार्टी के लिए संजीवनी का काम कर सकती है ।

भूपेश बघेल की पहल यदि कामयाब हो जाती है तो राहुल गांधी इस योजना की सफलता प्रचारित प्रसारित कर केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास कर सकते हैं । सब कुछ मगर इस पर निर्भर करता है कि मुख्य मंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की लालफीताशाही और नौकरशाही को नियंत्रित कर वास्तविक धरातल पर इस महत्वाकांक्षी राजीव गांधी किसान न्याय  योजना का कितना लाभ किसानों तक पहुंचाने में कामयाब हो पाते हैं।

(जीवेश चौबे कवि, कथाकार एवं कानपुर से प्रकाशित वैचारिक पत्रिका अकार में उप संपादक हैं। समसामयिक मुद्दों पर लगातार लिखते रहते हैं।)

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