Tuesday, March 5, 2024

तो अब मणिपुर एक्टिविस्ट की अवैध हिरासत पर सरकार को देना होगा मुआवजा!

तो क्या अब मणिपुर की भाजपा सरकार को मणिपुर के राजनीतिक कार्यकर्ता एरेंड्रो लीचोम्बम को गैरकानूनी ढंग से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में रखने के लिए मुआवजा भी देना पड़ेगा? उच्चतम न्यायालय के तेवरों से तो ऐसा ही लगता है। मंगलवार को भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय से मामले को खत्म करने का अनुरोध किया और सूचित किया कि हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया गया है और कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कल एरेंड्रो को रिहा कर दिया गया था। इसके बावजूद उच्चतम न्यायालय  ने मंगलवार को मणिपुर के राजनीतिक कार्यकर्ता एरेंड्रो लीचोम्बम द्वारा की गई प्रार्थना पर नोटिस जारी किया, जिसमें उस फेसबुक पोस्ट पर कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उनके द्वारा काटी गई अवैध हिरासत के लिए मुआवजे की मांग की गई थी।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने प्रतिवादियों को मुआवजे के मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यह एक गंभीर मामला है। मई से किसी ने अपनी स्वतंत्रता खो दी है! एसजी ने कहा कि उन्होंने कल हिरासत के आदेश का बचाव करने का प्रयास नहीं किया था और इसे तुरंत रद्द कर दिया गया था।

सोमवार को अदालत ने शाम 5 बजे से पहले यह देखते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया था कि उनकी निरंतर हिरासत “संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन” होगी। मंगलवार को भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया गया है और कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कल एरेंड्रो को रिहा कर दिया गया था। इसलिए एसजी ने पीठ से मामले को शांत करने का अनुरोध किया।

हालांकि, एरेंड्रो के पिता की ओर से पेश हुए एडवोकेट शादान फरासत, जिन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उनकी रिहाई की मांग की, ने मुआवजे के लिए प्रार्थना की। फरासत ने प्रस्तुत किया कि नजरबंदी आदेश में उनके खिलाफ पांच मामलों का उल्लेख किया गया था, हालांकि इनमें से किसी भी मामले में आरोप पत्र दायर नहीं किया गया था। फरासत ने कहा कि मेरे खिलाफ 5 मामलों का हवाला दिया गया था। किसी भी मामले में चार्जशीट दायर नहीं की गई है।

एरेंड्रो के पिता एल रघुमणि सिंह ने याचिका दाखिल की है, जिन्होंने तर्क दिया है कि यह एनएसए के आह्वान का मामला नहीं था, जिसे केवल एरेंड्रो को दी गई जमानत के उद्देश्य को हराने के लिए लागू किया गया था और ये कानून में द्वेष से ग्रस्त है। एरेंड्रो को शुरू में 13मई, 2021 को उनके फेसबुक पोस्ट 13मई 2021 के लिए गिरफ्तार किया गया था, जहां उन्होंने कहा था कि कोरोना का इलाज गोबर और गोमूत्र नहीं है। इलाज विज्ञान और सामान्य ज्ञान है प्रोफेसर जी आरआईपी। यह पोस्ट मणिपुर भाजपा के अध्यक्ष प्रो. तिकेंद्र सिंह की मृत्यु के संदर्भ में डाली गयी थी, जिसका उद्देश्य उन भाजपा नेताओं की आलोचना करना था, जो कोविड-19 के इलाज के रूप में गोमूत्र और गोबर की वकालत कर रहे थे।

फेसबुक पोस्ट से नाराज कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। 17मई, 2021 को, जिस दिन उन्हें स्थानीय अदालत ने जमानत दी थी, इम्फाल पश्चिम जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 ( एनएसए) के तहत हिरासत में लिया, जो एक निवारक निरोधक कानून है।

रघुमणि का तर्क यह है कि यह सब एनएसए के आह्वान का मामला नहीं था क्योंकि उनके बेटे का निर्दोष पोस्ट “कानून और व्यवस्था” को भी प्रभावित करने में असमर्थ था, सार्वजनिक व्यवस्था या राज्य की सुरक्षा की बात तो छोड़ दें, जो कि एनएसए के तहत नज़रबंदी के लिए वैधानिक आधार उपलब्ध हैं। वास्तव में एनएसए को एरेंड्रो को दी गई जमानत को परास्त करने के लिए लागू किया गया था और ये कानून में द्वेष से ग्रस्त है। एरेंड्रो को इस निर्दोष पोस्ट के लिए 45 दिन हिरासत में बिताना पड़ा ।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून में द्वेष का एक उत्कृष्ट मामला है, जहां निवारक निरोध के कानून का इस्तेमाल राजनीतिक आवाजों को बंद करने के लिए किया गया है जो मणिपुर राज्य में सत्तारूढ़ दल को पसंद नहीं है, किसी वैध उद्देश्य के लिए नहीं। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह एक ऐसा उद्देश्य नहीं है जिसके लिए एनएसए निवारक निरोध की अनुमति दी जाए, ये आदेश को दुर्भावनापूर्ण बनाता है और ये रद्द करने के लिए उत्तरदायी है।

रघुमणि के अनुसार नज़रबंदी न केवल कानून में खराब है बल्कि यह एसएमडब्ल्यू (सी) संख्या 3/2021 में सुप्रीम कोर्ट के इन रि : महामारी के दौरान सेवाएं और आवश्यक आपूर्ति के वितरण मामले में आदेश दिनांक 30अप्रैल 2021 के सीधे उल्लंघन में भी है, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया पर जानकारी या सोशल मीडिया पर मदद देने वाले व्यक्तियों का उत्पीड़न या कठोर कार्यवाही नहीं की जाएगी।

इस संदर्भ में याचिकाकर्ता का कहना है कि एरेंड्रो के फेसबुक पोस्ट का उद्देश्य कोविड-19 इलाज के बारे में गलत सूचना को दूर करना था। रघुमणि ने जिला मजिस्ट्रेट, इंफाल पश्चिम जिले द्वारा उसके आदेश दिनांक 30 अप्रैल, 2021 के उल्लंघन के लिए उच्चतम न्यायालय के समक्ष अवमानना याचिका भी दायर की है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles