Sunday, September 24, 2023

आप हिंदू-मुस्लिम में उलझे रहिए, मोदी सरकार अडानी-अंबानी को कौड़ियों में बेच रही है कंपनियां-संपत्ति

इधर आप दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में उलझे रहे और उधर मोदी सरकार ने अडानी-अंबानी को कौड़ियों के भाव में बड़ी संपत्तियां ओर कंपनियों को देने- दिलाने की तैयारियां पूरी कर लीं। कल खबर आई कि आलोक इंडस्ट्रीज को मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जेएम फाइनेंशियल असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के साथ मिलकर खरीद लिया।

सबसे अधिक हैरत की बात यह है कि आलोक इंडस्ट्रीज पर बैंकों का कुल 30,000 करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन रिलायंस को सामने देखकर एनसीएलटी की अहमदाबाद पीठ ने मार्च 2019 में रिलायंस-जेएम फाइनेंशियल एआरसी के मात्र 5,050 करोड़ रुपये की अकेली बोली को मंजूरी दे दी।

आलोक इंडस्ट्रीज औने-पौने दाम में रिलायंस खरीद सके, इसलिए मोदी सरकार ने 2018 में कानून ही बदल डाला। दरअसल अप्रैल 2018 के मध्य में हुई बैठक में रिलायंस और जेएम एआरसी के 5,050 करोड़ रुपये के ऑफर पर 70 पर्सेंट कर्जदाता बैंकरों ने ही सहमति दी थी, लेकिन तब ये सौदा नकार दिया गया था। इसकी सबसे बड़ी वजह एक नियम था, जिसके तहत ऐसे रिजॉल्यूशन प्लान की मंजूरी के लिए कम से कम 75 पर्सेंट कर्जदाताओं की सहमति जरूरी है। अब यहां मोदी सरकार का रोल शुरू होता है।

मोदी सरकार ने यह स्थिति इस 75 प्रतिशत ऋण दाताओं की मंजूरी वाले कानून में ढील देने वाला संशोधन पास कर दिया। आईबीसी में संशोधन से योजना की मंजूरी के लिए न्यूनतम मत को 75 से घटाकर 66 फीसदी कर दिया गया। इससे आलोक इंडस्ट्रीज की संयुक्त समाधान योजना के मंजूर होने की राह आसान हो गई।

आरआईएल-जेएमएफ एआरसी द्वारा जमा कराई गई योजना के अनुसार दोनों कंपनियां संयुक्त रूप से 5005 करोड़ रुपये में आलोक इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण करने जा रही हैं। इनमें से बैंकों को मात्र 4000 करोड़ रुपये मिलेंगे। आलोक इंडस्ट्रीज पर वित्तीय कर्जदाताओं का करीब 30 हजार करोड़ रुपये बकाया है। यानी इस सौदे से बैंकों को 86 फीसदी से ज्यादा का नुकसान उठाना होगा। आलोक इंडस्ट्रीज के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया जून 2017 में एसबीआई ने शुरू की थी, जो कंपनी का लीड बैंक था। सबसे अधिक नुकसान उसे ही झेलना पड़ेगा।

अब अडानी जी के बारे में भी कुछ पढ़ लीजिए। कुछ दिनों पहले गौतम अडानी की अगुवाई वाली अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को नई दिल्ली के अल्ट्रा पॉश इलाके लुटियंस जोन के भगवान दास रोड पर बने एक शानदार बंगले का नया मालिक बना दिया गया। एक सदी से भी ज्यादा पुराने इस दो मंजिला बंगले को अडानी ग्रुप ने आदित्य एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से दीवालिया कार्रवाई के बाद खरीद लिया।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस संपत्ति की कीमत केवल 265 करोड़ रुपये बताई। जबकि कुछ साल पहले इसकी कीमत इसके मालिकों ने 1000 करोड़ रुपये लगाई थी। बंगला 3.5 एकड़ में फैला हुआ है। वर्तमान में इसका मूल्य और भी अधिक था, लेकिन रस्ते का माल सस्ते में अडानी जी को सौंप दिया गया।

सच तो यह है कि मोदी जी के सबसे बड़े आर्थिक सुधार कहे जाने वाले इंसोल्वेंसी एंड बैंककरप्सी कोड का मूल उद्देश्य ही यह है कि हजारों करोड़ के कर्ज डुबा कर बैठी कंपनियों को अडानी-अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को बेहद कम कीमत में बेच कर उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पुहंचाया जाए और जनता को हाथ ऊंचे कर के दिखा दिए जाएं कि हम क्या करें? यह ओपन बोली थी!

यह है असली ‘न्यू इंडिया’……। आप इधर हिंदू-मुस्लिम में उलझे रहिए, देश की बड़ी-बड़ी संपत्तियां कौड़ियों के मोल में अडानी-अंबानी को सौंप दी जाएंगी। ऐसे ही नहीं मोदी राज में इन दोनों की संपत्ति दिन-दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से बढ़ रही है। पर इससे आपको क्या….!! 

गिरीश मालवीय

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of

guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles

दिवस विशेष 24 सितंबर पूना पैकट: एक पुनर्मूल्यांकन

भारतीय हिन्दू समाज में जाति को आधारशिला माना गया है। इस में श्रेणीबद्ध असमानता...