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Categories: बीच बहस

मध्य प्रदेश, जहां भगवा दंगाई कर रहे हैं सड़कों पर प्रशासन का नेतृत्व

मार्च 2018 रामनवमी के अवसर पर बिहार और पश्चिम बंगाल के भाजपा ने जुलूस निकालकर दंगे करवाये थे। बिहार के भागलपुर में दंगाई जुलूस की अगुवाई खुद भाजपा के केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजीत शाश्वत चौबे ने की थी। उस वक़्त बिहार के भागलपुर, नालंदा, समस्तीपुर, औरंगाबाद, मुंगेर जले थे। वहीं पश्चिम बंगाल के रानीगंज में दंगाइयों की ओर से की गई बमबाजी में डीएसपी का हाथ उड़ गया था। जबकि आसनसोल जिले भी दंगे से जल उठा था। इसी तरह जनवरी 2018 में उत्तर प्रदेश के कासगंज में विहिप और बजरंग दल और एबीवीपी के लोगों ने मिलकर दंगा करवाया था।

जहां दंगा करवाना होता है वहां ये लोग मिलकर जुलूस निकाल देते हैं। इन जुलूसों का पैटर्न हमेशा एक सा होता है। ये जुलूस मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में निकाले जाते हैं और इन जुलूसों में भड़काऊ नारे लगाये जाते हैं। इलाके के लोगों को प्रतिक्रिया के लिए बाध्य किया जाता है जो अनुभवी लोग हैं जिन्होंने दुनिया देखी सुनी है वो तो समझते हैं लेकिन नये ख़ून के युवा उनके जाल में फंस जाते हैं, और बिना सोचे समझे प्रतिक्रिया देकर पूरी क़ौम के लिए मुसीबत मोल ले लेते हैं।

साल 2018 में बिहार बंगाल दंगे वाला पैटर्न मध्यप्रदेश में दोहराया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में मध्यप्रदेश के तीन जिलों उज्जैन, इंदौर और मंदसौर में अयोध्या राम मंदिर के नाम पर चंदा उगाहने के लिए जुलूस निकाला गया इन जुलूसों में हजारों भगवाधारी शामिल हो रहे हैं और जुलूस के दौरान भड़काऊ नारे लगा रहे हैं। एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें जुलूस द्वारा मस्जिद के पास हनुमान चालीसा पढ़ा जा रहा है और जय श्री राम के नारे लगाये जा रहे हैं।

तीन जिलों में एक सप्ताह के भीतर जुलूस निकालना, तीनों जगह सांप्रदायिक तनाव पैदा होना (करना) और प्रशासन द्वारा एक सी कार्रवाई करते हुए कथित आरोपियों की घर को बुलडोजर लगाकर गिरा देना। सारी कहानी खुद-ब-खुद बयां कर रही है।  खुद मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा न्यायपालिका और जांच एजेंसियों के अस्तित्व को नकारते हुए बयान देते हैं कि “जिसमें विजुअल और फुटेज दिखाई दे रहे हों उसमें काहे की जांच करने वाले। जहाँ से पत्थर आएंगे, वहीं से तो निकाले जाएंगे।”

अब तीनों जिलों के घटनाक्रम पर एक नज़र डाल लेते हैं। सबसे पहले मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के मुस्लिम बाहुल्य वाले बेग़म बाग़ इलाके में 25 दिसंबर को भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता ने रैली निकालकर सांप्रदायिक नारे लगाये। इस दौरान पत्थरबाजी की घटना हुई या खुद करके सांप्रदायिक तनाव पैदा किया गया इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। बता दें कि अयोध्या के नाम मंदिर निर्माण के लिए चंदा उगाहने के लिए निकाली जा रही थी।

पत्थर फेंकने के आरोप में प्रशासन ने अब्दुल रफीक का दोमंजिला घर ढहा दिया। एक संवैधानिक कानून से चलने वाले देश में प्रशासन को खुद फैसले करने और आरोपित का घर गिराने का अधिकार कब और कैसे मिला अभी इस पर कुछ नहीं मालूम है। अब्दुल के घर में 19 लोग थे। प्रशासन ने उन्हें बिना कोई नोटिस दिये, बिना सफाई का मौका दिये ये कार्रवाई कर डाली।

अपने इस असंवैधानिक और गैरक़ानूनी कृत्य पर शर्मिंदा होने के बजाय जिला कलेक्टर आशीष सिंह पूरी बेशर्मी से जायज बताते हुए कहते हैं, “ घर गिराना इसलिए ज़रूरी था ताकि अपराधियों को सबक मिल सके।” इतना ही नहीं इस तर्क पर कि पत्थरबाजी मीरा की छत से हुई थी कलेक्टर साहेब कहते हैं, “ भले ही मीरा की छत से हिना और यास्मीन पत्थर फेंक रही थीं लेकिन यास्मीन रहती तो रफीक़ के ही घर में थी।”

इतना ही नहीं कलेक्टर महोदय ने उस घर को अवैध बताते हुए कहा, “पथराव हुआ था, वह अवैध था। 24 दिसंबर को नोटिस दिया गया था। उस पर कार्रवाई होनी थी। घटना के बाद त्वरित कार्रवाई की गई है। पथराव करने वाले पांच लोगों पर रासुका लगाई गई है, जबकि 18 अन्य को गिरफ्तार किया जा चुका है। ”

इसके बाद नंबर लगा जिला मंदसौर का। 29 नवंबर मंगलवार को मंदसौर के डोरोना गांव में हिंदू आतंकियों द्वारा एक मस्जिद में तोड़ फोड़ की गई। मस्जिद का इस्लामिक झंडा उखाड़कर उस पर भगवा झंडा फहरा दिया गया। मंगलवार 29 नवंबर को मंदसौर जिले के डोराना गांव में भगवा झंडा उठाये पागलों की एक झुंड दरवाजा तोड़कर उमर मंसूरी के घर में घुसी। घर में तोड़फोड़ की। 25 हजार नगदी और जेवर लूट ली। घर के सारे सामान तोड़ दिये और घर पर भगवा झंडा लहराया। इस इलाके के ऐसे दर्जनों घरों पर हमला और लूटपाट तोड़-फोड़ की गई। आरोप है कि एएसपी अमित वर्मा की मौजूदगी में ये सब किया गया।

मंदसौर के डोराना गांव में धार्मिक स्थल पर झंडा बदलने की घटना हुई। उसी वक्त का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले 2 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सोशल मीडिया पर डोराना गांव की वीडियो पोस्ट करने वाले एक युवक को अफजलपुर के रिंडा गांव से गिरफ्तार किया है। इस पोस्ट पर लाइक व कमेंट करने वाले तीन अन्य लोगों के खिलाफ धारा 505 (2) 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं एक नाबालिग को संजीत गांव से हिरासत में लिया गया है। उसकी पोस्ट के खिलाफ भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद कलेक्टर मनोज पुष्प ने कहा कि “दोनों युवकों द्वारा की गई सोशल मीडिया पोस्ट धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। इससे सांप्रदायिक दंगे भड़क सकते हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने जिले में रैली और अन्य तरह के प्रदर्शन के लिए नई गाइडलाइंस लागू कर दी है। इसके बाद भी अगर किसी तरह की आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर की जाती है तो उस स्थिति में सोशल मीडिया हैंडल के एडमिन के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।”

इसी तरह इंदौर के चांदनखेड़ी गांव के सद्दाम पटेल समेत दर्जनों घरों में भगवा गुडों ने घुसकर लूटपाट, तोड़फोड़ की और फिर आग लगा दिया। भगवा गुडों की भीड़ ने सद्दाम पटेल के घर में जब आग लगाया तो उस समय घर में 25 लोग थे। जिसमें 7 औरतें और 8 बच्चे थे।

29 दिसंबर को इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के चाँदनखेड़ी गांव में जुलूस निकाला गया। बता दें कि इंदौर से लगभग 58 किमी. दूर स्थित चाँदनखेड़ी मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं।  मंगलवार को राम मंदिर निर्माण हेतु निकली वाहन रैली के दौरान झड़प हुई जिसमें  10 घायल लोग घायल हुए, जबकि 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया। और फिर उज्जैन की बेगम बाग की तर्ज़ पर अगले दिन यानि बुधवार 30 दिसंबर को प्रशासन ने चान्दनखेड़ी के 15 मकान आतिक्रमण बता कर गिरा दिया। इसके बाद इंदौर जिले के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अजय देव शर्मा ने चांदनखेड़ी, धर्माट, रुद्राख्या, सुनाला, देवराखेड़ी, नगर परिषद गौतमपुरा, नगर परिषद सांवेर में धारा 144 लागू कर दिया। मीडिया तक को इन गांवों में घुसने की मनाही थी।

वहीं इंदौर के कलेक्‍टर मनीष सिंह ने आरोपितों के घर गिराये जाने पर कहा कि “कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए चांदनखेड़ी के मामले में पुलिस और प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई की। यहां मुख्य मार्ग की सड़क बहुत संकरी थी, जिस कारण निकलने वालों के साथ विवाद होते रहते थे। अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ी करने से अब विवाद भी खत्म हो जाएंगे।”

इस तरह पिछले एक सप्ताह में मध्य प्रदेश के तीन जिलों उज्जैन, इंदौर और मंदसौर में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई और तीनों ही बार हिंदुत्ववादी मानसिकता से ग्रस्त प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाया। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए बुलडजोर साथ लेकर चलने वाला प्रशासन शिवराज सरकार की नई उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश, हिमाचंल प्रदेश के बाद धर्मातंरण क़ानून लागू करने वाले मध्यप्रदेश में सांप्रदायिक दंगे का माहौल बनाया गया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on January 2, 2021 10:35 am

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