Wednesday, April 17, 2024

नयी शिक्षा नीतिः गरीबों कोे शिक्षा की छलनी से छानने की तैयारी

मोदी नीत भाजपा सरकार ने कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पर मुहर मार कर नई शिक्षा नीति-2020 को अमली जामा पहना दिया। नई शिक्षा नीति के तहत जीडीपी का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च करने का फैसला किया गया है। अभी जीडीपी का 4.43 फीसदी शिक्षा पर खर्च होता है। नई शिक्षा नीति से देश में शिक्षा की तस्‍वीर पूरी तरह से बदल जाएगी। इस शिक्षा नीति से शिक्षा के क्षेत्र में क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं इस पर एक फौरी नज़र….

प्राइमरी शिक्षा में क्या होगा बदलाव
नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी एजूकेशन (3-6 साल के बच्चों के लिए) का 2025 तक वैश्वीकरण किया जाना है। सभी को शिक्षा मुहैया कराने के लक्ष्य के साथ NEP में 2030 तक 3 से 18 साल के बच्चों के लिए शिक्षा को अनिवार्य किया जाना है।

नई शिक्षा नीति में सरकार ने छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके लिए 3 से 18 साल के छात्रों के लिए 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है। इसके तहत छात्रों की शुरुआती स्टेज की पढ़ाई के लिए पांच साल का प्रोग्राम तय किया गया है। इनमें तीन साल प्री-प्राइमरी और क्लास-1 और 2 को जोड़ा गया है। इसके बाद क्लास-3, 4 और 5 को अगले स्टेज में रखा गया है। क्लास-6, 7, 8 को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है। आखिर क्लास-9, 10, 11, 12 को हाई स्टेज में रखा गया है।

तीन भाषाओं को पढ़ाने की बाध्यता
छात्रों को शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान रखा गया है। नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों के लिए क्लास-6 से क्लास-8 तक एक शास्त्रीय भाषा सिखाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वे नई भाषा सीखने के साथ कुछ अहम भाषाओं के संरक्षण में भी शामिल रहें। सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में क्लास-6 से 8वीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स प्रस्तावित है। दूसरी तरफ छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पढ़ाई के साथ फिजिकल एजूकेशन को जरूरी बनाने का नियम भी रखा गया है। सभी छात्रों के लिए स्कूल के हर स्तर पर खेल, योगा, मार्शल आर्ट्स, डांस, गार्डनिंग जैसी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज भी सुनिश्चित की जाएंगी।

उच्च शिक्षा में मल्‍टीपल एंट्री/एग्जिट का विकल्प
मल्‍टीपल एंट्री/एग्जिट के तहत अंडर ग्रेजुएट प्रोगाम तीन या चार साल का हो सकता है। पीजी प्रोग्राम के लिए यह अवधि एक या दो साल है। इंटीग्रेटेड बैचलर्स/मास्‍टर्स पांच साल का होगा। एमफिल को हटाया जाएगा, जिससे मास्‍टर के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला लिया जा सकेगा।

एक रेगुलेटरी सत्ता का गठन
मॉडल मल्‍टीडिसिप्‍लीनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी का गठन किया जाएगा। अभी यूजीसी, एआईसीटीई समेत उच्‍च शिक्षा क्षेत्र में कई रेगुलेटर हैं। सरकार इनकी जगह सिर्फ एक रेगुलेटर बनाएगी। इसमें लीगल और मेडिकल क्षेत्रों को शामिल नहीं किया जाएगा। इसमें अप्रूवल और आर्थिक मंजूरियों के लिए अलग-अलग वर्टिकल होंगे। यह नियामक ‘ऑनलाइन सेल्फ डिसक्लोजर बेस्ड ट्रांसपेरेंट सिस्टम’ पर काम करेगा।

नई शिक्षा नीति के तहत हर राज्य के लिए स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण तैयार किए जाएगा, जो राज्यों में शिक्षा के स्तर और नियमों को लागू कराएंगे।

संयुक्त राज्य अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन की तर्ज पर नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाया जाएगा। इसमें विज्ञान के अलावा समाजिक विज्ञान को भी शामिल किया जाएगा। यह फाउंडेशन बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा। इसके जरिए चुने हुए रिसर्च प्रस्तावों को समीक्षा के बाद फंडिंग प्रदान की जाएगी। नई नीति में एक राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करेंगे। यह पैनल देश में शिक्षा के जरियों को विकसित करने, उन्हें लागू करने, उसका मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण करने का काम करेगा।

मान्‍यता का सिस्‍टम होगा खत्म, स्वायत्तता के बहाने उच्च शिक्षण संस्थानों का निजीकरण
सरकार अगले पंद्रह साल में मान्‍यता (एफलिएशन) का सिस्‍टम पूरी तरह खत्‍म कर देगी। इसका अर्थ ये है कि कॉलेजों को विश्‍वविद्यालयों से मान्‍यता लेने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही डिग्री कॉलेजों को ज्‍यादा स्‍वायत्‍तता दी जाएगी। यह स्‍वायत्‍तता प्रशासनिक और आर्थिक दोनों स्‍तर पर दी जाएगी। यानि बस डिग्री कॉलेज खोलिए और मुनाफा कमाना शुरू कर दीजिए। सेंट्रल और नॉन सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए एक स्‍टैंडर्ड रहेंगे। सरकारी और निजी उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों के लिए भी यही बात लागू होगी। कॉलेज को धीरे-धीरे स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। इसके लिए उनकी ग्रेडिंग की जाएगी।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के मसौदे पर आधारित है नई शिक्षा नीति
एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जून, 2017 में नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिक कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक नयी समिति के गठन की घोषणा की। इस तरह पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने 31 मई 2019 को नई शिक्षा नीति का 484 पृष्ठों का मसौदा नए एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल को सौंपा था। नई ‘शिक्षा नीति-2020’ हूबहू इसी मसौदे पर बनी है। कस्तूरीरंगन के कुछ प्रस्ताव जिन्हें हबूहू मान लिया गया है…
* मानव संसाधन मंत्रालय को फिर से शिक्षा मंत्रालय का नाम दिया जाना चाहिए।
* विद्यालयों के परिसरों को फिर से व्यवस्थित किया जाएगा।
* बच्चों के ज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक विकास के चरणों के आधार पर, एक 5+3+3+4 रूपी पाठयक्रम और शैक्षणिक संरचना।
* स्तरहीन शिक्षक-शिक्षण संस्थानों को बंद करने और सभी शिक्षण तैयारी/ शिक्षा कार्यक्रमों को बड़े बहुविषयक विश्वविद्यालयों/ कॉलेजों में स्थानांतरित करके शिक्षक शिक्षण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव का प्रस्ताव।
* उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, तीन प्रकार के उच्च शिक्षण संस्थानों के पुनर्गठन की योजना का प्रस्ताव।
टाइप 1: विश्व स्तरीय अनुसंधान और उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण।
टाइप 2: अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के साथ ही विषयों में उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना। यह कार्यक्रम मिशन नालंदा और मिशन तक्षशिला द्वारा संचालित हो।
टाइप 3: तीन या चार साल की अवधि के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (जैसे बीएससी, बीए, बीकॉम, बीवीओसी) की पुन:संरचना होगी और इसमें कई निर्गम और प्रवेश के विकल्प उपलब्ध हों।

सभी प्रकार के शैक्षणिक पहलों और कार्यक्रमों संबंधी क्रियाकलापों के समग्र और एकीकृत कार्यान्वयन को सक्षम बनाने के लिए तथा केंद्र और राज्यों के बीच चलने वाले प्रयासों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए एक नया शीर्ष निकाय, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन किया जाए। उच्च शिक्षा में अनुसंधान क्षमता के निर्माण के लिए और एक मजबूत अनुसंधान संस्कृति बनाने के लिए एक सर्वोच्च निकाय, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के निर्माण की योजना भी प्रस्तावित है।

मानदण्ड स्थापित करने, कोष उपलब्ध कराने, प्रमाणित करने और विनियमित करने के चार कार्यों को पृथक किया जाना चाहिए और स्वतंत्र निकायों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए। व्यावसायिक शिक्षा सहित सभी उच्च शिक्षा के लिए एकमात्र नियामक-राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक प्राधिकरण होगा।

कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के बाज़ारीकरण, शिक्षा के सभी ढांचों का  केन्द्रीयकरण और पाठ्यक्रमों के भगवाकरण की नीति है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles