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Categories: बीच बहस

नॉर्थ ईस्ट डायरीः कांग्रेस मानती है, नए आंचलिक मोर्चे ने असम में भाजपा की जीत आसान बनाई

असम विधानसभा चुनाव के नतीजों ने संकेत दिया है कि यह एक सीधी लड़ाई थी, जिसमें कुल 126 सीटों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 75 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 50 सीटें जीतीं, लेकिन एक तीसरा आंचलिक मोर्चा भी इस मुक़ाबले में था जिसने वोट विभाजित कर भाजपा की जीत की राह को आसान बनाया।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में शुरू हुए आंदोलन से दो दलों का जन्म हुआ- असम जातीय परिषद (एजेपी) और राइजर दल (आरडी)। आरडी के जेल में बंद किसान नेता अखिल गोगोई इस चुनाव में विजयी हुए। कांग्रेस का कहना है कि दोनों दलों ने विशेष रूप से ऊपरी असम में सीएए विरोधी वोट को निर्णायक रूप से विभाजित किया है, और भाजपा नेता हिमंत विश्व शर्मा के बयानों से साफ पता चलता है कि उन्होंने जानबूझकर दोनों दलों को इस उद्देश्य से आगे बढ़ाया था।

एजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरडी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा को जीतने में मदद करने के लिए चुनाव नहीं लड़ा, और कांग्रेस पर खुद को जीतने में असमर्थ होने का आरोप लगाया।

इस साल की शुरुआत में एजेपी और आरडी का गठन होने के बाद, कांग्रेस ने बार-बार भाजपा के खिलाफ सीए-विरोधी मंच पर एक संयुक्त लड़ाई की जरूरत को महसूस किया। दोनों आंचलिक दलों ने आपस में गठबंधन किया, लेकिन कांग्रेस की अनदेखी की, जिसने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा।

असम प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ की अध्यक्ष बबीता शर्मा ने कहा, “हमने आखिरी समय तक सीएए के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले दलों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे। हमारा मानना था कि जो लोग सीएए के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और असम में सीएए लाने वालों के खिलाफ वोट करने के लिए पूरे असम में सभाओं को संबोधित कर रहे थे, वे हमारे साथ लड़ाई में शामिल होंगे, लेकिन जब वे हमारे साथ नहीं जुड़े तो हमें पता था कि वे बिगाड़ने का काम करेंगे।”

कांग्रेस प्रवक्ता रितुपर्णा कोंवर ने कहा, “ऐसा नहीं है कि वे (एजेपी-आरडी) कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत की पराजय का एकमात्र कारण है, लेकिन वे ऐसे कारणों में से एक थे।”

14 सीटों पर सीएए विरोधी वोटों का विभाजन हुआ। इनमें से 11 ऊपरी असम में हैं, जो असमिया जातीयतावाद की गहराई से पहचान करती हैं और जहां पिछले साल सीएए के खिलाफ मजबूत विरोध प्रदर्शन देखा गया था। इन 11 सीटों में से दो पर  एजेपी के संस्थापक अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने चुनाव लड़ा था। दुलियाजान में उन्होंने 24000 वोट प्राप्त किए, जहां भाजपा ने 8000 वोटों से कांग्रेस को हराया। नाहरकटिया में उन्होंने 25,000 वोट प्राप्त किए, जहां भाजपा ने 19,000 वोटों से कांग्रेस को हराया।

पहली अप्रैल को जब असम ने तीन चरणों के दूसरे चरण में मतदान किया, तो अनुभवी टीवी पत्रकार अतनु भुइयां ने ट्वीट किया- ‘सीएए विरोधी वोटों को विभाजित करने की हमारी योजना के अनुसार नई पार्टियों का गठन किया गया: हिमन्त विश्व शर्मा ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा है।’

एजेपी और राइजर दल के खिलाफ सबूत के रूप में कांग्रेस अब साक्षात्कार पेश कर रही है। बबीता शर्मा ने कहा, “जब हिमंत विश्व शर्मा ने खुद कहा कि बीजेपी ने जानबूझ कर उन्हें सीएए विरोधी वोटों को विभाजित करने के लिए उकसाया है, तो यह उन पार्टियों की बुनियादी अखंडता और ईमानदारी पर सवाल उठाता है जो असम के लोगों के लिए एक एजेंडे के साथ चुनाव में उतरे और भाजपा को जीतने में मदद की।”

लुरिनज्योति गोगोई ने कहा, “यह एक आधारहीन आरोप है। कांग्रेस जब खुद जीत नहीं सकती, तो दूसरों पर दोषारोपण करना चाहती है।”

एजेपी के प्रवक्ता जियाउर रहमान ने कहा, “हमने अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए चुनाव लड़ा, और यह न तो अन्य दलों की मदद करने के लिए था और न ही दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए।”

आरडी के प्रचार सचिव देवांग सौरभ गोगोई ने कहा कि आरडी ने केवल 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था, और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को अन्य 88 सीटों पर बहुमत हासिल करना चाहिए था। आरडी ने भाजपा-विरोधी वोटों के विभाजन को रोकने के लिए चुनाव नहीं लड़ा। मरियानी सीट से अखिल गोगोई ने अंत में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और जिसे कांग्रेस ने जीत लिया।

(दिनकर कुमार ‘द सेंटिनेल’ के संपादक रह चुके हैं।)

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This post was last modified on May 11, 2021 1:12 pm

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