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Categories: बीच बहस

भारत-चीन झड़प पर सर्वदलीय बैठक आज, आधिकारिक तौर पर सामने आएंगी कई अहम जानकारियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के मसले पर आज शाम पांच बजे सर्वदलीय बैठक करने वाले हैं। राष्ट्रीय मुद्दों और चुनौतियों पर पूरे देश को विश्वास में लेने की प्रक्रिया का पहला कदम प्रधानमंत्री की ओर उठाया जा रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बैठक से लद्दाख में पिछले लगभग दो माह से चल रहे सैन्य घटनाक्रम की कुछ विश्वसनीय जानकारी देश को मिल सकेगी। दरअसल, इस पूरे मामले में कोई भी स्पष्ट जानकारी दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री स्तर पर फोन बातचीत के बाद जारी हुए बयान से पहले देश के पास नहीं थी। इस बयान से भी पूरे मामले की थोड़ी झलक मिली लेकिन पूरी जानकारी अब तक सरकार की ओर से जारी नहीं हुई है।

सोमवार 15 जून की रात में सैन्य भिड़ंत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तुरंत कोई प्रतिक्रिया न देना तमाम गंभीर दबावों की ओर इशारा करता है। प्रधानमंत्री ने सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों के नाम ट्विटर पर भी श्रद्धांजलि संदेश जारी नहीं किया। मुख्यमंत्रियों के साथ पहले दिन की बैठक के दौरान इसका जिक्र तक न किया जाना काफी कुछ कहता है। एक दिन बाद यानी 17 जून को मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दूसरे दिन शुरुआत में उन्होंने इस घटना को लेकर अपना बयान दिया और उसमें गलवान घाटी व चीन का नाम तक नहीं लिया। यह बैठक शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से ट्विटर पर जानकारी दी गई कि 19 जून को प्रधानमंत्री चीन मसले पर सर्वदलीय बैठक करेंगे।प्रधानमंत्री की ओर से यह एक अच्छी पहल की गई है।

पूरी जानकारी न देने के पीछे भारत सरकार की रणनीति भी हो सकती है। लेकिन इतनी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोगों को विश्वास में लेने की प्रक्रिया तो चलानी ही पड़ेगी। जब पारदर्शिता और जवाबदेही होगी तभी पूरे देश को विश्वास में लिया जा सकता है। विदेश मंत्री स्तर की फोन वार्ता और उससे पहले 6 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत से एक बात तो पता चली कि डिस इंगेजमेंट की प्रक्रिया चलनी है और स्टेटस को बहाल होना है।

लेकिन यह नहीं बताया गया कि इंगेजमेंट का स्वरूप क्या था। गलवान घाटी की घटना को लेकर भारत सरकार का कहना है कि हमारे सैनिकों ने एलएसी पार नहीं की लेकिन उसने यह नहीं बताया कि तो क्या चीनी सैनिकों ने हमारे क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। इसी तरह, पैंगांग के फिंगर 4 व 8 को लेकर भी कोई स्पष्टता पब्लिक के बीच नहीं है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परसेप्शन का मामला कहकर बातें और उलझा दी थीं। केंद्र सरकार को देश के सामने पूर्वी सेक्टर की मौजूदा स्थिति को साफ करना चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि सर्वदलीय बैठक में पारदर्शिता के साथ तथ्य सामने आएंगे।

विश्लेषक सुशांत सरीन का कहना है कि भारत दो नावों में पैर रखकर नहीं चल सकता। ऐसे समय में जब भारत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती का सामना कर रहा है, भारत को तय करना ही पड़ेगा कि वह अब तक विफल रही नीतियों पर ही चलना पसंद करेगा या फिर नई परिस्थितियों से पैदा हुए मौकों का फायदा उठाते हुए नये गठजोड़ को मूर्त रूप देगा। चीन तो कंकड़ फेंक कर अब भारत की संकल्प शक्ति को आजमा रहा है। वह इससे आगे बढ़ना नहीं चाहता, इसीलिए उसने अपनी कैजुएल्टीज पर चुप्पी साध ली और न उसका सरकारी मीडिया ही इस पर कोई माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

चीन धमकी दे रहा और साथ ही पुचकार भी रहा।

दरअसल, चीन अपने सरकारी मीडिया के जरिये लगातार भारत को पुचकारने और धमकी देने का काम साथ-साथ कर रहा है। लगातार तीसरे दिन गुरुवार को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की संपादकीय टिप्पणी में चेताया गया है कि चीन सीमा के मुद्दे पर टस से मस नहीं होने वाला, भारत चाहे जितना रायता फैला ले। इस टिप्पणी में भारत को समझाइश भी दी गई कि अमेरिका का प्यादा बनकर भारत विकसित-ताकतवर देश नहीं बन सकता। अमेरिका चीन के खिलाफ भारत का इस्तेमाल करना चाहता है।

अगर भारत इस भूमिका के लिए लालायित है तो फिर उसे स्वतंत्र मजबूत देश के तौर पर स्थापित होने का लक्ष्य त्याग देना चाहिए। अमेरिका के प्यादे वह सब हासिल नहीं कर पाते, जिनकी उम्मीद में वे प्यादे बनना स्वीकार करते हैं। ग्लोबल टाइम्स ने प्रधानमंत्री मोदी को याद दिलाया कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर 2005 में अमेरिका ने उनको वीजा नहीं दिया था। बीते अप्रैल अमेरिकी संसद से बने आयोग ने भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में विशेष चिंताजनक स्थितियों वाले देशों की सूची में रख दिया। अमेरिका फर्स्ट की ट्रम्प की नीति का उल्लेख भी इसमें किया गया। एक दिन पहले चीन के सरकारी मीडिया ने कहा था कि भारत अपने फ्रंटलाइन सैनिकों को आपसी समझौतों व प्रोटोकाल की गंभीरता से अवगत कराए।

(राजेंद्र तिवारी का यह लेख शुक्रवार से साभार लिया गया है।)

This post was last modified on June 19, 2020 3:05 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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