Saturday, July 2, 2022

उत्तर प्रदेश में जनता बदलाव के पक्ष में मन बना चुकी है: क्या विपक्ष उसे जनादेश में बदल पायेगा ?

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सारे indicators बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में जनता बदलाव के पक्ष में मन बना चुकी है। इसकी अभिव्यक्ति विपक्ष की रैलियों में उमड़ती स्वतःस्फूर्त भीड़ में हो रही है, जबकि प्रधानमंत्री की रैलियों के लिए पूरी प्रशासनिक मशीनरी लगाकर लाभार्थियों की भीड़ जुटानी पड़ रही है, जाहिर है वहाँ आने वाले लोग भाजपा के समर्थन में नहीं आ रहे हैं, बल्कि लाभार्थी होने के कारण सरकारी आयोजन में उन्हें आना पड़ रहा है, उनमें से अनेक लाभ छिन जाने के डर या नए लाभ की उम्मीद में आ रहे हैं। यही कारण है कि अमित शाह, नड्डा या अन्य भाजपा नेताओं की रैलियों में जो केवल पार्टी के बल पर हो रही हैं, वहाँ बड़े पैमाने पर कुर्सियां खाली पड़ी रह जा रही हैं।

प्रदेश में चुनाव टालने की चर्चा अनायास नहीं गर्म है। दरअसल, न कृपा बांटने का दांव चल रहा, न ध्रुवीकरण का ब्रह्मास्त्र, इसलिए चुनाव मैनिपुलेट करने और दंगा भड़काने की तैयारी चल रही है। बाजी हाथ से फिसलती देख संघ-भाजपा ने सारे घोड़े खोल दिये हैं।

जनता को पहले दरिद्र बनाकर फिर कृपा बांटने के खेल के साथ साम्प्रदायिक उन्माद को चरम पर पहुंचाने के लिए खुले आम जनसंहार और गृह-युद्ध छेड़ने का आह्वान हो रहा है। इन दोनों के फेल होने पर चुनाव को manipulate करने के उपाय हो रहे हैं। आधार से मतदाता पहचानपत्र को जोड़ने का आनन-फानन में पारित कानून इसी का हिस्सा है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा नेताओं की कारपेट बॉम्बिंग शुरू हो गयी है। मोदी जी तो अब एक तरह से UP के de facto मुख्यमंत्री की तरह लड़ ही रहे हैं, अगले एक सप्ताह में अमित शाह की 21 रैलियां होने वाली हैं। नड्डा, राजनाथ कस्बे-कस्बे घूम रहे हैं। सारे कील-कांटे दुरुस्त करने के क्रम में कृषि कानूनों की वापसी और किसान-आंदोलन के स्थगन के बाद अब शिक्षक भर्ती घोटाले के खिलाफ ईको गॉर्डन, लखनऊ में महीनों से चल रहे आंदोलन को manage किया जा रहा है।

जाहिर है, विपक्ष के लिए complacency की जगह नहीं है

आज वोटरों का अच्छा-खासा हिस्सा ऐसा है जो योगी-मोदी की डबल इंजन सरकारों की चौतरफा तबाही से बदहाल है और बेहद नाराज है पर विपक्ष के प्रति भी आश्वस्त नहीं है, उनके अतीत के रिकॉर्ड के कारण अथवा भविष्य के उनके कार्यक्रम को लेकर। जाहिर है, ये मतदाता भाजपा को सत्ताच्युत करने के लिए मतदान करें, इसके लिए भाजपा से नाराजगी का negative factor ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विपक्ष से सकारात्मक उम्मीद जरूरी है।

क्या विपक्ष अपने घोषणपत्र व अभियान द्वारा उन्हें ऐसे ठोस आश्वासन दे सकता है जो उन्हें भाजपा के खिलाफ मतदान के लिए प्रेरित कर सके ?

उदाहरण के लिए, क्या लाखों खाली पड़ी सरकारी नौकरियों को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत भरने और युद्धस्तर पर नये रोजगार सृजन की विपक्ष के पास ठोस योजना है, जिस पर वह प्रदेश के करोड़ों प्रतियोगी छात्रों और युवाओं को भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए आह्वान कर सके और उन्हें galvanise कर सके, जैसा एक हद तक बिहार में महागठबन्धन ने किया था ?

क्या प्रदेश के करोड़ों दलितों- आदिवासियों को, जो संघ-भाजपा राज में दबंगों और पुलिस उत्पीड़न के सबसे बदतरीन शिकार रहे, जिनके मन में योगी-राज के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है, उन्हें विपक्ष एक सकारात्मक कार्यक्रम के आधार पर अपने पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित कर सकता है ? दलितों की चरम भूमिहीनता उनके हर तरह के शोषण की बुनियाद है, जिस सस्ती सार्वजनिक शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के माध्यम से उनके जीवन में कुछ बदलाव आ रहा था, उसे भी छीना जा रहा है, उनके ऊपर आज भी जारी मध्ययुगीन अत्याचारों की रोकथाम के लिए बने SC-ST Act को निष्प्रभावी करने की लगातार कोशिश हो रही है। क्या विपक्ष दलितों के इन concerns को एड्रेस करेगा ?

क्या महंगाई से बेहाल जनता, विशेषकर गरीबों को इससे राहत देने का कोई ठोस उपाय है विपक्ष के पास ?

क्या पुरानी पेंशन बहाल करने के लिए लड़ते कर्मचारियों-शिक्षकों को विपक्ष अपने पाले में जीत सकता है ?

Mob lynching, दंगाई गिरोहों, फ़र्ज़ी मुठभेड़, हिरासत मौत, फ़र्ज़ी जेल-मुकदमों पर रोक, काले कानूनों के खात्मे, विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार और स्पेस की बहाली जैसे सवालों पर क्या विपक्ष ठोस और स्थायी समाधान के कड़े और प्रभावी कदम उठा सकता है?

सर्वोपरि क्या विपक्ष आपस में ऐसी घोषित या tacit understanding बना सकता है जिससे भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे को रोका जा सके ?

उत्तरप्रदेश में जनता तो सरकार बदलने का मन बना चुकी है, लेकिन संघ-भाजपा की सत्ता की ताकत, संसाधनों और तिकड़मों को शिकस्त देकर finishing line पार करने के लिए विपक्ष की ताकतों को बहुत कुछ करना बाकी है।

(लाल बहादुर सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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