Mon. Nov 18th, 2019

पीएफ घोटालाः साजिश, सियासत और सरकार

1 min read

एपी मिश्रा यूपीपीसीएल के भविष्य निधि के हजारों करोड़ के घोटाले के मास्‍टर माइंड हैं या फिर वह केवल राजनीतिक लड़ाई में फंस रहे हैं! चार हजार करोड़ रुपये के घोटाले में उत्‍तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी एपी मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया है। उनकी गिरफ्तारी पर सवाल भी उठ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि क्‍या वाकई में एपी मिश्रा इस हजारों करोड़ के घोटाले के मास्‍टर माइंड हैं या फिर वह केवल राजनीतिक लड़ाई का शिकार हुए हैं। सवाल यह भी है कि एपी मिश्रा ही क्यों? यूपीपीसीएल के तत्कालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल, आईएस और बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा क्यों नहीं?   

इस बीच उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के भविष्य निधि घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्लू) द्वारा गिरफ्तार यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्र को अदालत ने तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले इसमें नामजद पॉवर कार्पोरेशन के तत्कालीन निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी और तत्कालीन सचिव (ट्रस्ट) प्रवीण कुमार गुप्ता को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेजा जा चुका है। प्रवीण गुप्ता को आगरा और सुधांशु द्विवेदी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था।

देश दुनिया की अहम खबरें अब सीधे आप के स्मार्टफोन पर Janchowk Android App

ईओडब्ल्यू ने मंगलवार तड़के 4.30 बजे मिश्र को अलीगंज स्थित उनके आवास से हिरासत में लेकर दिन भर पूछताछ की थी। ईओडब्ल्यू ने बुधवार को सुधांशु द्विवेदी और पीके गुप्ता को सात दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है। ईओडब्ल्यू घोटाले की तह तक जाने के लिए पूर्व एमडी एपी मिश्रा से दोनों अन्य आरोपितों का सामना कराने की भी तैयारी की जा रही है।

एपी मिश्रा परिणाम देने वाले बिजली अधिकारी माने जाते रहे हैं और अखिलेश सरकार के कार्यकाल में पूरे प्रदेश को 24 घंटे बिजली आपूर्ति के वादे को एपी मिश्रा ने ही अमली जामा पहनाया था। एपी मिश्रा के कार्यकाल में महानगरों समेत पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली का आधारभूत ढांचा जिस तरह 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए मजबूत किया गया था उसी को यूपी की भाजपा सरकार आज  भुना रही है।

उत्तर प्रदेश में एपी मिश्रा को अरबपति अधिकारी के रूप में बताया जा रहा है। इसके लिए उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति और मनी लांड्रिंग की जांच की जा सकती है। कहा जा रहा है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

यक्ष प्रश्न यह है कि जब एपी मिश्रा ने प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद इस्तीफा दे दिया और पैसा ट्रांसफर उनके इस्तीफा को स्वीकार करने के बाद हुआ तो प्रथम दृष्टया एपी मिश्रा कहां से इसके जिम्मेदार माने जाएंगे? फिर उनके ऊपर बिजली महकमे के चेयरमैन संजय अग्रवाल, आइएएस बैठे थे। उनसे ऊपर बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा बैठे थे तो इस्तीफा दे चुके एमडी की क्या यह औकात होगी कि वह 4000 करोड़ की धनराशि स्वयं के आदेश से किसी कंपनी में जमा करा दे। फिर यह पैसा मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफएल में जमा कराए गए तो प्रश्न यह है कि एपी मिश्रा के हटने के बाद क्यों जमा हुए, क्या तब यह बिजली मंत्री को सूट करता था?

इस मामले की तुलना यदि आईनेक्स मामले से की जाए तो अधिकारियों द्वारा मंजूर आईनेक्स मामले में सभी अधिकारी जेल से बाहर हैं और बिना ठोस सुबूत के तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम विभागीय हेड होने के नाते मोरल ग्राउंड पर तिहाड़ जेल में बंद हैं। यहां इस घोटाले में एपी मिश्रा से भी पहले आइएएस संजय अग्रवाल को गिरफ्तार किया जाना चाहिए था, जो कि नहीं किया गया। वैसे भी भाजपा शासन में अग्रवाल, गोयल, मित्तल, बंसल, गुप्ता, वैश्य जैसे टाईटलधारियों पर आसानी से कार्रवाई नहीं हो रही है। यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद हुए इस घोटाले की प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा की बनती है।  

बिजली कर्मचारियों के भविष्य निधि का पैसा गलत तरीके से डीएचएफएल में निवेश करने पर उपभोक्ता परिषद ने भी सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अनुसार डीएचएफएल में पहला निवेश 17 मार्च, 2017 को हुआ। इसके बाद 24 मार्च, 2017 को जब बोर्ड ऑफ ट्रस्ट की मीटिंग हुई, उसमें 17 मार्च को हुए निवेश पर सवाल करने के बजाय बोर्ड ऑफ ट्रस्ट की मीटिंग में यह भी प्रस्ताव पास हुआ कि सचिव, ट्रस्ट केस टू केस बेसिस मामले में निदेशक वित्त से अनुमोदन लेंगे। अगर 24 मार्च, 2017 को ही बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर सवाल उठ जाता तो शायद बिजली कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई के 2268 करोड़ रुपये न फंसते।

मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफएल में सामान्य भविष्य निधि से 2631.20 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 1185.50 करोड़ ट्रस्ट कार्यालय प्राप्त कर चुका है। इस मद में 1445.70 करोड़ फंस गए हैं। इसी प्रकार कार्मिकों के अशंदायी भविष्य निधि से 1491.50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 669.30 करोड़ ट्रस्ट को वापस हो चुका है। इस मद से 822.20 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जबकि मार्च 2017 से आज तक पॉवर सेक्टर इम्प्लॉइज ट्रस्ट की एक भी बैठक नहीं हुई। सरकार के सामने अब डीएचएफएल से पैसा वापस लाने की बड़ी चुनौती है।

गौरतलब है कि डीएचएफएल यानी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, वही कंपनी है, जिसके लिए खोजी पत्रकारिता करने वाली न्यूज़ वेबसाइट कोबरा-पोस्ट ने जनवरी, 2019 में एक स्टिंग के जरिए दावा किया था कि डीएचएफएल ने 31000 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। कोबरा-पोस्ट का मानना था कि यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र का घोटाला है और इसने भाजपा को अवैध तरीके से चंदा दिया है। कोबरा-पोस्ट द्वारा उजागर किए गए इस कथित घोटाले का एक दिलचस्प हिस्सा ये भी था कि 2014-15 और 2016-17 के बीच तीन डेवलपर्स द्वारा 19.5 करोड़ रुपये का चंदा सत्ता पर काबिज भाजपा को दिया गया। ये तीनों डेवलपर वधावन से जुड़े हुए हैं।

डीएचएफएल के प्रमोटरों से हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने भी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के एक पूर्व सहयोगी इकबाल मिर्ची की एक कंपनी के साथ संबंधों को लेकर पूछताछ की है। अब पक्ष-विपक्ष आरोप-प्रत्यारोपों की गेंद एक-दूसरे के पाले में उछाल रहे हैं, लेकिन गंभीर सवाल ये है कि आखिर कर्मचारियों के भविष्य निधि के करोड़ों रुपये में अनियमितता का जिम्मेदार कौन है?

दरअसल मुंबई हाईकोर्ट ने डीएचएफएल द्वारा किए जाने वाले सभी भुगतानों के ऊपर रोक लगा दी है। इस कथित सौदे की जानकारी मिलते ही लखनऊ में बिजली विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मचा गया। इसके बाद मंगलवार को प्रदेश भर के विद्युत कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। बीती दो नंबवर को इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया जब मुंबई स्थित विवादास्पद कंपनी डीएचएफएल में यूपी विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के एक विवादास्पद निर्णय के तहत कथित रूप से अपने कर्मचारियों के 2,600 करोड़ रुपये के फंड के निवेश की खबर सामने आई।

गौरतलब है कि इस मामले को सियासी रंग लेते भी देर नहीं लगी और शनिवार दोपहर को ही कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर योगी सरकार को सवालों के कठघरें में खड़ा कर पूछा, ‘किसका हित साधने के लिए कर्मचारियों की दो हजार करोड़ से भी ऊपर की गाढ़ी कमाई इस तरह कंपनी में लगा दी गई, कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ क्या जायज है?

इसी बीच कांग्रेस के यूपी चीफ अजय कुमार लल्लू ने छह नवंबर को राज्य के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि आखिर बीजेपी को सबसे ज्यादा व्यक्तिगत चंदा देने वाले वधावन की निजी कंपनी डीएचएफएल को ही नियमों को ताक पर रखते हुए कर्मचारियों की जीवन की पूंजी क्यों सौंपी गई? अजय कुमार ने कहा कि ऊर्जा मंत्री को बताना चाहिए कि वह सितंबर-अक्टूबर 2017 में दुबई क्यों गए थे और किससे मिले थे? इस मामले की जांच होनी चाहिए की उनके वहां जाने का क्या प्रयोजन था और उनकी वहां किन लोगों से मुलाकात हुई थी। यह दौरा उसी समय किया गया जब डीएचएफएल का पैसा सनब्लिंक को जा रहा था। ऊर्जा मंत्री दस दिनों की इस आधिकारिक यात्रा के उद्देश्य बताएं।

Donate to Janchowk
प्रिय पाठक, जनचौक चलता रहे और आपको इसी तरह से खबरें मिलती रहें। इसके लिए आप से आर्थिक मदद की दरकार है। नीचे दी गयी प्रक्रिया के जरिये 100, 200 और 500 से लेकर इच्छा मुताबिक कोई भी राशि देकर इस काम को आप कर सकते हैं-संपादक।

Donate Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *