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राजीव गांधी हत्याकांड के 28 साल बाद भी साजिश का पर्दाफाश नहीं

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के साढ़े 28 साल बाद भी मल्टी डिस्पेलनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) की जांच अभी जारी है। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राजीव गांधी हत्या मामले में बड़ी साजिश पर मल्टी डिस्पेलनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) से चार सप्ताह के भीतर अपनी ताजा स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने यह आदेश हत्याकांड के दोषी पेरारीवलन की याचिका पर दिया है। एजी पेरारीवलन की याचिका में कहा गया है कि जब तक मल्टी डिस्पेलनरी एजेंसी की जांच पूरी नहीं होती, उनकी सजा निलंबित रखी जाए।

2017 में राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारीवलन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। पेरारीवलन ने अपनी याचिका में अपनी उम्र कैद की सजा को निलंबित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि जब तक मल्टी डिस्पेलनरी एजेंसी की जांच पूरी नहीं होती उनकी सजा निलंबित की जाए। ये एजेंसी 1998 में जस्टिस जैन कमीशन की सिफारिश के आधार पर बनी थी।

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एजी पेरारीवलन 26 साल से जेल में हैं और उसे नौ वोल्ट की दो बैटरी सप्लाई के लिए दोषी करार दिया गया था, जिससे बम बनाकर राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। उसने सीबीआई के एसपी त्यागराजन के हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पेरारीवलन से बैटरी सप्लाई के बारे में सवाल नहीं किए गए। एमडीएमए भी अब तक उस शख्स से पूछताछ नहीं कर पाई है, जिसने बम बनाया था और वो श्रीलंका में है।

गौरतलब है कि राजीव गांधी हत्याकांड में जैन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर मानव बम बनाने की साजिश को लेकर आगे जांच कराने के मामले में उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है। 17 अगस्त 2017 को राजीव गांधी हत्याकांड में सजायाफ्ता एजी पेरारीवलन की जैन कमीशन के आधार पर आगे की जांच की याचिका पर उच्चतम न्यायालय में जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने सीबीआई से सवाल किए थे। पीठ ने पूछा था कि राजीव गांधी की हत्या के लिए मानव बम बनाने की साजिश का केस क्या फिर से खोला गया? मानव बम बनाने की साजिश के केस का क्या नतीजा निकला? पीठ ने सीबीआई से इन सवालों के जवाब देने को कहा था। सीबीआई ने इस संबंध में सील कवर में जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी कोर्ट में दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से कहा था कि जैन कमीशन के निर्देश के मुताबिक राजीव गांधी की हत्या की आगे जांच होनी ही चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से मामले की आगे की जांच के लिए चार हफ्ते में सील कवर में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। उच्चतम न्यायालय ने पूछा था कि सीबीआई बताए कि इस मामले की आगे की जांच कब तक पूरी हो सकती है? साथ ही यह भी बताए कि इस केस में फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण समेत क्या-क्या कानूनी अड़चनें आ रही हैं? इसके अलावा कोर्ट ने पूछा था कि सीबीआई ने इन अड़चनों के लिए क्या कदम उठाए हैं?

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से बताया गया था कि इस मामले की जांच चल रही है, लेकिन यह नहीं बताया जा सकता कि केस की जांच में कितना वक्त लगेगा। इस मामले में फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण में भी वक्त लग रहा है। जब तक इन आरोपियों को वापस नहीं लाया जाएगा जांच पूरी नहीं हो सकती। दरअसल राजीव गांधी हत्याकांड में दो मामले दर्ज किए गए थे। एक केस में मुरगन, नलिनी, पेरारीवलन समेत सात लोगों को सजा हो चुकी है। वे उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। दूसरे केस में लिट्टे चीफ प्रभाकरण, अकीला और पुट्टूअम्मन समेत 11 लोगों को साजिश का आरोपी बनाया गया था। याचिका में कहा गया है कि जैन कमीशन की सिफारिश के आधार पर मामले की आगे जांच के लिए सीबीआई की देखरेख में मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी बनाई गई थी, लेकिन 20 साल बीत जाने पर भी जांच आगे नहीं बढ़ी।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में कथित बड़ी साजिश की जांच करने की मांग करने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय के केंद्र और सीबीआई से जवाब मांगे जाने के कुछ दिन बाद मामले के एक प्रमुख गवाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में रमेश दलाल ने कहा था कि वह जैन जांच आयोग का एक महत्वपूर्ण गवाह था, जिसका गठन हत्या के पीछे साजिश के पहलू की जांच करने के लिए किया गया था। दलाल ने कहा कि उसने सीबीआई को पूर्व में लिखे गए पत्र में साजिश की बड़ी जांच किए जाने का मुददा उठाया था। मेरे उक्त पत्र (19 अप्रैल 2016) की विषयवस्तु के मददेनजर सीबीआई से साजिश के पहलू पर एक पूरक आरोपपत्र की प्रतीक्षा है। उच्चतम न्यायालय ने मामले में सीबीआई से जवाब मांगा है, इसलिए मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के वास्ते स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आपसे निजी हस्तक्षेप करने का आग्रह कर रहा हूं।

रमेश दलाल ने 19 अप्रैल को केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि और उस समय के सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा को पत्र लिखकर मामले की जांच में कुछ खामियों को रेखांकित किया था और इन पहलुओं पर आगे की जांच की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय ने 14 दिसंबर को याचिका पर केंद्र और सीबीआई से जवाब मांगा था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने चेन्नई की टाडा अदालत के आदेश के बावजूद राजीव गांधी की हत्या के मामले में साजिश के पहलू की जांच नहीं की। याचिका हत्या के दोषियों में से एक एजी पेरारिवालन ने दायर की थी। उसने कहा था कि न तो सीबीआई की विशेष जांच टीम और न ही बहु अनुशासनात्मक निगरानी एजेंसी आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए उचित रूप से जांच पर आगे बढ़ीं, जबकि कई बड़े-बड़े लोग मामले में शामिल थे।

दरअसल राजीव गांधी की हत्या के बाद राजनीतिक नैरेटिव लगातार बदलते रहने के कारण इस हत्याकांड की साजिश में शामिल लोगों के चेहरों से शायद ही कभी नकाब उठे। राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की सरकार केंद्र में बन गई और राजनीतिक हाशिये पर चल रहे पीवी नरसिंह राव प्रधानमन्त्री बन गए जो विवादास्पद चंद्रास्वामी के दरबारियों में माने जाते थे। फिर चंद्रास्वामी का नाम भी षडयंत्रकारियों में शामिल था। इसके अलावा भी जो सरकारें केंद्र में बनीं, उनमें द्रमुक या अद्रमुक का समर्थन शामिल रहा जो हत्या षडयंत्र की जांच को आगे तार्किक परिणति तक पहुंचाने में बाधक रहा। भाजपा सरकार को भी आगे जांच माफिक नहीं बैठती।

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