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Thursday, August 5, 2021

राम जी की चिड़िया, राम जी का खेत; खालो चिड़िया भर-भर पेट

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राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट पर इन दिनों भूमि खरीद घोटाला का एक आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए 18.5 करोड़ की जो ज़मीन ख़रीदी गई वह दस मिनट पहले दो करोड़ में बेची गई थी। बैनामे और रजिस्ट्री में एक ही गवाह हैं। 18 मार्च, 2021 को बाबा हरिदास के परिवार ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी के नाम ज़मीन दो करोड़ में बेची। उसके दस मिनट बाद सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने राममंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट को 18.5 करोड़ में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट द्वारा ज़मीन बेच दी। आप के नेता संजय सिंह और सपा नेता पवन पांडेय ने प्रेस कॉन्फ़्रेन्स करके यह बताया है और दस्तावेज़ भी पेश किए हैं। 

कितना दिलचस्प मामला है ये कि एक ज़मीन का टुकड़ा पांच मिनट पहले 2 करोड़ में खरीदा जाता है और पांच मिनट बाद वह 18.5 करोड़ में फिर खरीदा जाता है। ट्रस्ट के जिम्मेदार मंत्री चंपत राय इसे कतई घोटाला नहीं मानते बल्कि शान के साथ कहते हैं- हम पर सौ साल से ऐसे आरोप लगते आए हैं। हम पर गांधी की हत्या का आरोप भी लगा जिन्हें आरोप लगाना है, लगाते रहें हम इसकी चिंता नहीं करते। चंपतराय ने पिछले दिनों एक भेंट में कहा था -“शिकायत तब करनी चाहिए थी जब सोनिया गांधी राज कर रहीं थीं, तब वो हमारे ख़िलाफ़ एक जांच बिठा सकती थीं। आज करने का कोई फ़ायदा नहीं है।” इससे साफ़ जाहिर होता है कि इनके ऊपर साहिबों का वरद हस्त है।

बहरहाल, जारी प्रेस विज्ञप्ति में ज़रूर सफाई में वे कहते हैं कि 9 नवम्बर, 2019 को श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के पश्चात् अयोध्या में भूमि खरीदने के लिए देश के असंख्य लोग आने लगे, उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए बड़ी मात्रा में भूमि खरीद रही है, इस कारण अयोध्या में एकाएक जमीनों के दाम बढ़ गये। जिस भूखण्ड पर अखबारी चर्चा चलाई जा रही है वह भूखण्ड रेलवे स्टेशन के पास बहुत प्रमुख स्थान है।

बात तो सही है पांच मिनट में रेट का ये विस्तार मोदी राज् में मुमकिन है। विकास की इतनी तेज गति मोदी युग की ही देन है। जय शाह के विकास को भी पीछे छोड़ एक नई मिसाल राम मंदिर निर्माण समिति ने दिखाई है। सब भौचक्के हैं पर हकीकत है यह। मंदिर जमीन खरीदी में जरा से, सिर्फ 15-16 करोड़ रुपयों के इधर उधर होने पर इत्ता शोर क्यों मचा रखा है? राफेल से वेंटिलेटर तक, वैक्सीन से ताबूत तक, गंगा से सेन्ट्रल विस्टा तक इनकी कमाई निष्ठा ने आज तक किसी को बख्शा है – जो रामलला को छोड़ देते? आपदा में अवसर जिनका सूत्र वाक्य हो उनसे कैसी उम्मीद? अब आस्था में अवसर की तलाश को भी सहज तरीके से लेना होगा। मामले पर कोई क्या कर लेगा राम जी से जुड़ा मामला है। जब मंदिर की ज़मीन का फैसला ही न्याय के विपरीत सौहार्द्र पर टिका हो तो ये मामले तो तिनके जैसे हैं उड़ा दिए जाएंगे।

याद रखिए,  इससे पूर्व भी राम मंदिर के लिए आने वाले चंदे के बारे में जब जब सवाल किए गए हैं श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कहते रहे हैं, “कितना पैसा आया, कितना नहीं आया, हमें नहीं मालूम, हमें ना पैसा लेना है ना देना है, हिसाब क्या लेना है। पैसे का हिसाब कारसेवकपुरम वाले ही रखते हैं। मेरा पैसे से कोई मतलब नहीं हैं।” महंत नृत्य गोपाल दास कहते हैं, “मेरे पास मंदिर का एक पैसा नहीं है, ना लेना है ना देना है, हमें मगन रहना है। हमें पैसों से मतलब नहीं है। मंदिर जनता और धर्माचार्यों के सहयोग से बनेगा।” बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले के गवाह और राम मंदिर आंदोलन पर रिपोर्टिंग करते रहे वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि वीएचपी के नेताओं से जब भी राम मंदिर के लिए आने वाले चंदे के बारे में पूछा गया उन्होंने कभी जवाब नहीं दिया।”

वीएचपी के कुछ नेता कई बार कुछ आँकड़ा बता देते हैं लेकिन उसका कोई आधार नहीं होता है। अशोक सिंघल और प्रवीण तोगड़िया जब ज़ोर-शोर से राम मंदिर आंदोलन चला रहे थे, उस दौरान जब भी उनसे चंदे के बारे में पूछा गया, उन्होंने नाराज़गी ही ज़ाहिर की। अब विश्व हिंदू परिषद को अपने खातों के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, पारदर्शिता तो यही होती है। हाल के सालों में निर्मोही अखाड़े और हिंदू महासभा से जुड़े नेताओं ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मिलने वाले चंदे पर सवाल उठाए हैं और जाँच की माँग की है। इस पर चंपतराय कहते हैं, “जिन लोगों को शिकायत है, उन्हें आयकर विभाग में शिकायत करनी चाहिए और जाँच की माँग करनी चाहिए। जो लोग हमसे हिसाब-किताब मांग रहे हैं, ये पैसा उनका नहीं है, ये राम का पैसा है।”

वाकई यह दलील जबरदस्त है किसी ने क्या खूब लिखा है-

राम की चिड़िया, राम का खेत,

खालो चिड़िया भर-भर पेट।

(सुसंस्कृति परिहार स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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