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नॉर्थ ईस्ट डायरी: शिलांग में बसे सिखों से प्रशासन मांग रहा है नागरिकता का सर्टिफिकेट

मेघालय की राजधानी शिलांग में 200 वर्ष पहले अंग्रेजों ने दलित सिखों को सफाई कर्मी के तौर पर जिस इलाके में बसाया था उसे पंजाबी लेन कहते हैं। यह मोहल्ला पुलिस बाज़ार के पास है और इसकी व्यावसायिक अहमियत इस कदर बढ़ चुकी है कि भ्रष्ट नेताओं और भूमि माफिया की तरफ से उन लोगों को उजाड़ने की निरंतर दुरभिसंधि होती रही है। इन दलित सिखों के पास बाकायदा जमीन का पट्टा भी है जो उनको तत्कालीन जनजातीय शासक ने दी थी।

फिलहाल पंजाबी लेन के सामने सीआरपीएफ के जवानों को पहरा देते हुए देखा जा सकता है। इन जवानों को हाल ही में उस समय तैनात किया गया जब प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन हिनीट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल (एचएनएलसी) ने मेघालय के ख़ासी और जयंतीया लोगों के हितों के पैरोकार के तौर पर पंजाबी लेन के सिखों को धमकी दी कि अगर वे राज्य सरकार की तरफ से उनको उजाड़े जाने की योजना का विरोध करेंगे तो उनको गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

यह एक ऐसा दुर्लभ अवसर है जब कोई उग्रवादी संगठन किसी सरकारी योजना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करवाने के लिए आगे आया है। मीडिया को दिये गए बयान में पंजाबी लेन के एक निवासी भरत सिंह ने कहा है कि सरकार और उग्रवादियों ने हमारे खिलाफ एक जैसा रुख अपना रखा है। भरत सिंह की टीवी मरम्मत करने की दुकान है जो पिछले साल जून में दलित सिखों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद मोहल्ले की दूसरी दुकानों की तरह साल भर से बंद है।

पंजाबी लेन में रहने वाले दलित सिखों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। लेकिन पंजाबी लेन की जमीन पर कई स्वार्थी शक्तियों की गिद्ध दृष्टि टिकी हुई है। हरिजन कालोनी पंचायत के सचिव गुरजीत सिंह का कहना है-1987 में सरकार की तरफ से हम लोगों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया गया। 1992 में हिंसक भीड़ ने हमारे मोहल्ले पर हमला किया। 1994 में हम लोगों से जमीन का स्वामित्व साबित करने के लिए कहा गया। 1995 में मोहल्ले के निवासी लाल सिंह की हत्या की गई। प्रताड़ना का सिलसिला लंबे समय से चलता आ रहा है।

29 मई 2018 को शिलांग में उस समय हिंसा भड़क उठी थी जब पंजाबी लेन इलाके में एक बस चालक और उसके साथी पर कथित रूप से हमला होने और घायल होने की खबर फैली थी। फिर जब सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि घायलों की अस्पताल में मृत्यु हो गई है तो क्रुद्ध भीड़ ने पंजाबी लेन के निवासियों पर हमला कर दिया और हिंसा को नियंत्रित करने के लिए शिलांग में एक महीने तक कर्फ़्यू लगा रहा। इस हिंसक झड़प के बाद पंजाब सरकार के एक प्रतिनिधिमण्डल ने शिलांग का दौरा किया और पंजाबी लेन के निवासियों के साथ ही मुख्यमंत्री संगमा से भी मुलाक़ात की। जब पंजाब सरकार ने हिंसा के शिकार सिखों को साठ लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने की घोषणा की तो मेघालय सरकार ने इस बात पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस मसले पर विचार करने के लिए मेघालय सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया। इसी कमेटी के कहने पर नगरपालिका बोर्ड ने सिखों से अपनी नागरिकता के साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश जारी किया है।

गुरजीत सिंह का कहना है कि 1863 में दलित सिखों के पूर्वजों को अंग्रेजों ने लाकर शिलांग में बसाया था और जनजातीय शासक ने दलित सिखों को जमीन का स्वामित्व प्रदान किया था। सिंह का कहना है-हमारे पूर्वजों को ढाई एकड़ भूमि दी गई थी। अब केवल 1.75 एकड़ भूमि बची रह गई है। मोहल्ले में लगभग 2500 सिख रहते हैं। गुरजीत सिंह स्थानीय गुरु नानक देव विद्यालय के प्रधानाध्यापक भी हैं।

शिलांग नगरपालिका बोर्ड एवं अन्य सरकारी विभागों में 184 सिख काम करते हैं और पहले ही उनके परिवार को पंजाबी लेन के वैध नागरिक होने का आधिकारिक दर्जा मिल चुका है। पंजाबी लेन के निवासियों की संस्था हरिजन पंचायत कमेटी ने मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से सिख लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

पिछले दिनों शिलांग नगर पालिका बोर्ड की तरफ से नोटिस जारी कर पंजाबी लेन के निवासियों से कहा गया है कि निश्चित समय सीमा के अंदर अपने भूमि के स्वामित्व को साबित करें। मेघालय के उप मुख्यमंत्री पी ताइनसोंग की अध्यक्षता में पंजाबी लेन के सिखों के पुनर्वास के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद 31 मई को बोर्ड ने यह नोटिस जारी किया है।

गुरजीत सिंह का कहना है-मेघालय उच्च न्यायालय भी फरवरी में निर्देश दे चुका है कि जब तक पंजाबी लेन में भूमि स्वामित्व के मसले पर अदालत की तरफ से फैसला नहीं हो जाता,तब तक राज्य सरकार सिखों को हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। सिंह को उम्मीद है कि केंद्र सरकार की तरफ से मेघालय सरकार को इस बात के लिए मना लिया जाएगा कि वह पंजाबी लेन के सिखों को हटाने की कोशिश छोड़ दे।

पिछले 19 जून को पंजाब सरकार का एक प्रतिनिधिमण्डल शिलांग पहुंचा। इसे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भेजा था। मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा इसका नेतृत्व कर रहे थे। जब प्रतिनिधिमण्डल ने शिलांग पहुंचकर पंजाबी लेन के सिखों से मुलाक़ात करने की कोशिश की तो मेघालय पुलिस ने निषेधाज्ञा का हवाला देकर उनको पंजाबी लेन जाने से मना कर दिया। तब रंधावा ने निजी वाहन में सवार होकर पंजाबी लेन तक जाने का निश्चय किया।

प्रतिनिधिमण्डल से बात करते हुए गुरजीत सिंह ने बताया-मतदाता सूची में हमारा नाम है। हमारे पास आधार कार्ड,राशन कार्ड है और हमारे नाम से बिजली का कनेक्शन भी है। हमारे पास वोट देकर मेघालय में सरकार चुनने का अधिकार है। इसके बावजूद हमें गैर कानूनी नागरिक बताया जा रहा है और अपनी जमीन को छोड़कर जाने के लिए कहा जा रहा है।

(दिनकर कुमार “दि सेंटिनल” के वर्षों तक संपादक रहे हैं।)

This post was last modified on July 3, 2019 11:05 am

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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