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Tuesday, September 28, 2021

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केरला के बाद स्टालिन का तमिलनाडु बन रहा है कोविड के खिलाफ लड़ाई का एक और मॉडल

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7 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने के साथ ही मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने बड़ा एलान किया कि राज्य के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में सीएम इंश्योरेंस स्कीम लागू की जाएगी। इसके तहत जो मरीज कोरोना का इलाज़ करवा रहे हैं, उनके इलाज़ का खर्चा अब राज्य सरकार ही देगी। उन्होने कहा कि राज्य सरकार सभी स्टेट गवर्नमेंट इंश्योरेंश कार्डहोल्डर्स का निजी अस्पतालों में कोरोना संबंधित उपचार का खर्च वहन करेगी। इसके अलावा राज्य के हर परिवार को कोरोना राहत के रूप में को 4,000 रुपये देने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। 2,000 रुपये की पहली किस्त मई में दी जाएगी।

कोई भी आपदा या महामारी सिर्फ़ किसी वायरस के चलते कहर बनकर नहीं टूटती, जब तक कि इसके लिये मुफीद वैचारिक राजनीतिक ज़मीन मुहैया नहीं होती। कोविड-19 के पहले लहर के समय में इस देश ने वाम विचारधारा पोषित मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में कोरोना महामारी का सामना करने का सबसे सफल केरल मॉडल ये देश देख चुका है जहां हर नागरिक को उसके घर पर पका पकाया खाना, और कोरोना का मुफ्त इलाज राज्य सरकार सुनिश्चित करती है। साथ ही केंद्र की दक्षिणपंथी विचार पोषित नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का कोविड की पहली लहर में ताली थाली से लेकर कोविड की दूसरी लहर में श्मशान में चल रही वेटिंग लाइन और गंगा में तैर रही लाशों का मंजर भी देश देख ही रहा है। अब बात करते हैं पेरियार स्वामी की वैचारिकी से पोषित DMK पार्टी के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री स्टालिन के मॉडल की।

7 मई 2021 को राज्य के नये मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले एम के स्टालिन को सत्ता में आये महज एक सप्ताह ही हुये हैं। लेकिन इन एक सप्ताह में उन्होंने कोविड-19 महामारी से निपटने और राज्य की जनता को बचाने तके लिये जो कदम उठाये हैं वो कदम बहुत ही प्रभावी और परिणाम दायक हैं। उनके इन कदमों से उनके वैचारिकी और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही और संवदेनशीलता भी स्पष्ट हो जाती है।

वॉर रूम की स्थापना और निजी अस्पतालों को भिड़ाया मोर्चे पर

शपथ लेने से पहले ही मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने 5 मई बुधवार को निजी अस्पतालों से आग्रह किया कि वे कोरोना महामारी से निपटने तथा संक्रमितों के इलाज के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाएं।

इस संबंध में एक बयान जारी कर उन्होंने मुख्य सचिव से स्थिति की समीक्षा करने के बाद महामारी से निपटने के लिए वॉर रूम स्थापित करने को कहा है।ऑक्सीजन बेड का विवरण निजी अस्पतालों की वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

स्टालिन ने कहा कि डॉक्टरों, नर्सों और सफाईकर्मियों का योगदान जन सेवा का रूप ले चुकी है। सुरक्षित और खुशहाल भविष्य का निर्माण तभी किया जा सकता है जब हर कोई पूरी तरह से एक साथ काम करें।

निगरानी अधिकारी नियुक्त
एम के स्टालिन ने शपथ लेने से दो दिन पूर्व ही 6 मई से 20 मई पूरे पंद्रह दिनों तक लॉक डाउन लगाने का एलान करते हुये 5 मई बुधवार को उन्होंने शासनादेश जारी कर दिया। साथ ही जिलों में कोरोना नियंत्रण का कार्य देखने के लिए निगरानी अधिकारी (एमओ) नियुक्ति की गयी। चेन्नई, कांचीपुरम, चेंगलपेट और तिरुवल्लूर जिलों की जिम्मेदारी पुलिस महानिरीक्षक एचएम जयरामन और व एमसी सारंगन को सौंपी। इसी तरह आईजी रैंक के सात अधिकारियों की नियुक्ति की गई जिनको जिलेवार कार्य दिया गया।

ये एमओ टेस्टिंग, ट्रैकिंग और कोविड केयर सेंटर सहित अन्य कार्यों की निगरानी करेंगे। साथ ही निजी अस्पताल 50 प्रतिशत बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित रखें यह उत्तरदायित्व भी इनके जिम्मे मढ़ा गया।

लॉकडाउन में सभी सरकारी और निजी कार्यालय 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ चलाने, जबकि मेट्रो रेल, निजी बसों और टैक्सियों में बैठने की क्षमता 50 प्रतिशत तक ही सीमित कर दिया गया। रेस्तरां को केवल सामान बेचने और चाय की दुकानें केवल दोपहर तक खोलने तक सीमित करने के साथ ही ग्राहकों को ऐसे स्थानों पर बैठकर भोजन करने से प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके अलावा सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, खेल, शैक्षिक, मनोरंजन पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, जबकि सिनेमाघर बंद कर दिये गये।

इसके अलावा मृत्यु संबंधी घटनाओं में 20 व्यक्तियों से ज्यादा एकत्र होने से रोक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्पा खोलने पर पाबंदी लगा दिये गये। रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक कर्फ्यू की अनुमति देने वालों में हवाई अड्डों / रेलवे स्टेशनों, दूध वितरण और स्वास्थ्य सेवाओं की यात्रा शामिल की गई, जबकि ईंधन आउटलेट खुले रहने की अनुमति दी गई। उद्योग और उद्योग विनिर्माण आवश्यक वस्तुएं, इसके अलावा दूरसंचार कंपनियों को रात कर्फ्यू में काम करने की छूट दी गयी।

प्रधानमंत्री से वैक्सीन और दवाओं पर जीएसटी हटाने की मांग

ये वाकई में बड़े शर्म की बात है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार कोरोना की दवाइयों और वैक्सीन पर भी जीएसटी लगाकर राज्यों सरकारों से टैक्स वसूल रही है।

इसके प्रतिकार में तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 13 मई गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर कोरोना महामारी के इलाज में काम आ रही वैक्सीन और दवाओं पर लगने वाले जीएसटी को हटाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोविड-19 की वैक्सीन और दवाओं पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर घटा कर शून्य करने की मांग करते हुये कहा कि जीएसटी मुक्त होने से इनके दाम कम होंगे और जनता को इसका लाभ मिल सकेगा।

उन्होंने मोदी को बृहस्पतिवार को लिखे एक पत्र में यह भी कहा है कि राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति का बकाया और चावल पर सब्सिडी का भुगतान शीघ्र किया जाए। साथ ही उन्होंने केंद्र से राज्यों को तदर्थ अनुदान दिए जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि ईधन पर अतिरिक्त प्रभार के पैसे में राज्यों का हिस्सा नहीं रखा गया है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने राज्यों को बाजार से उधार लेने पर लागू वर्तमान सीमा में एक प्रतिशत वृद्धि किए जाने की भी अपील की है। बता दें कि यह सीमा अभी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के (एसजीडीपी) के तीन प्रतिशत के बराबर है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा लोगों के टीकाकरण और कोविड 19 के मरीजों के उपचार के लिए खरीदी जानी वाली वैक्सीन और औषधियों पर जीएसटी घटा कर शून्य किया जाना चाहिए।

क्राउड फंडिंग की अपील, सभी मिलकर लड़ेंगे और अपनों के सहयोग से आगे बढ़ेंगे

12 मई को राज्य के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्य के आम लोगों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से मदद करने का आग्रह करते हुये कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष में अपनी इच्छा अनुसार राहत राशि दान करें। उन्होंने कहा कि राज्य इस वक्त मुश्किल हालात से गुज़र रहा है, ऐसे में सभी अपने अपने स्तर पर मदद प्रदान करें। उन्होंने राज्य की जनता से अपील करते हुये कहा कि मुश्किल घड़ी है, सभी मिलकर लड़ेंगे और अपनों के सहयोग से आगे बढ़ेंगे। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार को उद्योगों, निजी कंपनी, एनजीओ, दानदाताओं और राज्य की जनता की सहायता की सख्त ज़रूरत है।

दान राशि को टैक्स से छूट देने की बात करते हुये उन्होंने कहा कि देश के भीतर से किए गए दान को आयकर अधिनियम की धारा 80 जी के तहत 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी, जबकि अनिवासी भारतीयों को विदेशी योगदान अधिनियम 2010 में धारा 50 के तहत छूट मिलेगी। यह भुगतान ऑनलाइन, क्रेडिट, डेविट कार्ड या इलेक्ट्रानिक्स क्लियरिंग सिस्टम और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि दस लाख या उससे अधिक का दान देने वाले कंपनियों या व्यक्तियों के नाम को विज्ञप्ति में प्रकाशित कर रसीद प्रदान किया जाएगा

 गौरतलब है कि तमिलनाड़ु देश का पांचवा सबसे ज़्यादा कोरोना प्रभावित राज्य है। जहाँ पर 1,83,772 एक्टिव केस हैं। जबकि अब तक 16,768 लोगों की कोरोना से जान गयी है। जबकि कुल कोरोना केस की बात करें तो 15 लाख कोरोना केस पिछले साल से अब तक तमिलनाड़ु में आये हैं। 

जनता को संबोधित करते हुये एम के स्टालिन ने बताया कि 31 हजार 410 मरीज ऑक्सीजन पर हैं। कोरोना की दूसरी लहर ने मेडिकल के बुनियादी ढांचे और लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा कर लोगों के जीवन को बचाने की कोशिश कर रही है।

स्टालिन ने कहा कि सरकार को उस वक्त अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है जब राज्य की अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार कठिन है, इसलिए सरकार जनता की मदद चाहती है। इस तरह की महामारी में लोगों को दरियादिली दिखाने की ज़रूरत है।

कोरोना टीके के लिए वैश्विक टेंडर, ऑक्सीजन प्लांट और पड़ोसी राज्यों के कारखानों तक रेल व्यवस्था

12 मई को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कोरोना नियंत्रण के उपायों की समीक्षा करने के बाद निर्णय किया कि वैक्सीन का वैश्विक टेंडर जारी करेंगे।

मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार ने 18 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाने का अभियान शुरू करने को कहा है। लेकिन राज्य को इस कार्यक्रम के तहत टीकों की पर्याप्त संख्या का आवंटन नहीं हुआ है। लिहाजा हम वैश्विक टेंडर जारी कर कोरोना टीके खरीदेंगे और राज्य की जनता को मुहैया कराएंगे। इसी तरह ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए नए प्लांट लगाने के साथ ही पड़ोसी राज्यों के कारखानों से ऑक्सीजन रेल की व्यवस्था की जाएगी।

डीएमके राज्यसभा सांसद व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डा. अम्बुमणि रामदास ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन को लिखा है कि चेंगलपेट के एकीकृत वैक्सीन परिसर में कोरोना टीके का उत्पादन शुरू किया जाए। यह 100 फीसदी अनुदान प्राप्त सरकारी कारखाना है। डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित सभी मापदंडों को पूरा करने वाले इस कारखाने की पूरी तरह अनदेखी हो रही है और वित्तीय आवंटन नहीं होने की वजह से निष्क्रिय पड़ा है। यहां सात तरह के टीकों का उत्पादन हो सकता है और बड़ी बात यह है कि कोरोना के टीके भी इस कारखाने में तैयार हो सकते हैं। तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर इस परिसर के शेष कार्यों को पूरा कर यहां शीघ्र उत्पादन शुरू करने के कदम उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने पत्र में कहा कि महानगर सहित राज्यभर में कोरोना टीकों की कमी की वजह से टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। जबकि चेंगलपेट स्थित सरकारी टीका उत्पादन कारखाना बंद पड़ा है जहां कोरोना वैक्सीन तैयार की जा सकती है। 18 से ऊपर के युवाओं को टीका लगाने की मुहिम के बाद पैदा हालातों के मद्देनजर राज्य सरकार ने तय किया है कि टीकों की खरीद के लिए वैश्विक टेंडर जारी किए जाएंगे।

गौरतलब है कि तमिलनाडु में टीकाकरण की गति शुरू से ही कम रही जिसका खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। पहले प्रथम पंक्ति के कर्मचारियों ने इसमें दिलचस्पी नहीं ली। फिर चुनाव की आम सभाओं से कोरोना फैलने लगा तब कार्यक्रम पर दबाव बढ़ा जो अब टीकों की किल्लत के रूप में नजर आ रहा है। बता दें कि राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम 16 जनवरी को शुरू हुआ। 11 मई तक के आंकड़ों के अनुसार 65 लाख 88 हजार 345 लोगों को कोविड टीके लगे हैं। 1 मई से देखा जाए तो एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब 1 लाख टीके लगे हों। मतगणना वाले दिन 2 मई को तो केवल 6436 टीके लगे।

कोरोना से जान गँवाने वाले फ्रंटलाइन कर्मचारियों व डॉक्टरों को 25 लाख रुपये की मदद

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कोरोना से जंग के बीच जान गंवाने वाले 43 डॉक्टरों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के परिवारों को 25-25 लाख रुपए देने का एलान किया ।

12 मई बुधवार को जारी किए गए बयान में स्टालिन ने कहा कि मेडिकल स्टाफ को इनाम के तौर पर बोनस दिया जाएगा क्योंकि वे कोविड-19 महामारी के दौरान रोगियों के जीवन के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। घोषणा के मुताबिक, अप्रैल-मई और जून में जो मेडिकल स्टाफ ड्यूटी पर थे उन्हें बोनस मिलेगा। डॉक्टरों को 30 हजार रुपए, नर्सों को 20 हजार और अन्य स्टाफ को 15-15 हजार रुपए बोनस के तौर पर दिए जाएंगे। वहीं, ट्रेनी और पोस्ट ग्रैजुएट डॉक्टरों को भी अतिरिक्त 20 हजार रुपए का बोनस मिलेगा।

इसके अलावा चेन्नई कॉर्पोरेशन ने महामारी से लड़ऩे के लिए ट्रेनी डॉक्टरों की अस्थायी भर्ती की भी योजना बनाई है। इन्हें तीन महीने के लिए भर्ती किया जाएगा। इसके तहत एमबीबीएस के फाइनल इयर के 300 छात्रों को भर्ती किया जाएगा और उन्हें हर महीने 40 हजार रुपए की राशि का भुगतान भी होगा।

9 मई को स्टालिन की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक में सभी जिलों के अस्पतालों में आने वाले प्रभावित लोगों को तत्काल उपचार देने का आदेश

शपथ लेने के दो दिन बाद ही मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में 9 मई रविवार को कैबिनेट की पहली बैठक में उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि सभी जिलों के अस्पतालों में आने वाले प्रभावित लोगों को तत्काल उपचार दिया जाए और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं कि डॉक्टरों, नर्सों, चिकित्सा कर्मचारियों और रोगियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन और अन्य आवश्यकताएं दी जाएं। स्टालिन ने अधिकारियों से चेन्नई, सेलम, कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै और तिरुनेलवेली और कुछ निजी अस्पतालों में बेचे जा रहे रेमेडीसीविर की बिक्री पर निगरानी और इसके काला बाजारी पर पूरी तरह से रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने स्वास्थ्य, राजस्व, पुलिस, नगर प्रशासन और ग्रामीण विकास के अधिकारियों को एकजुट होकर कार्य करने का निर्देश दिया, ताकि कोरोना पर नियंत्रण किया जा सके। मंत्रियों को नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया। कैबिनेट ने सभी योग्य लोगों से वैक्सीन लेने की भी अपील की।

बैठक के दौरान स्टालिन ने संबंधित अधिकारियों को सरकारी और निजी अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली चिकित्सा ऑक्सीजन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की ओर कदम उठाने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को लोगों को वैक्सीन लगाने और ऑक्सीजन के सही उपयोग के लिए जागरूक करने का भी सुझाव दिया। गौरतलब है कि राज्य कई बाधाओं के बीच अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को उनके संबंधित क्षेत्रों में कैंप लगाकर दस मई से लागू होने वाले लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने का भी निर्देश दिया और कहा कि अगर लॉकडाउन सही तरीके से लागू हुआ तो ही कोरोना के मामले और मरने वालों की संख्या कम होगी। अगर लॉकडाउन के बावजूद लापरवाही की गई तो मामले जस के तस ही रहेंगे। इसलिए स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी को लॉकडाउन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

7 मई को लिया मुख्यमंत्री पद की शपथ

2 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद रामास्वामी पेरियार को माल्यार्पण करके उन्हें आभार देते स्टालिन की फोटो मीडिया की सुर्खियों में रही। इसे पेरियार (डीएमके) बनाम राम (भाजपा आरएसएस) की लड़ाई में पेरियार की जीत के तौर पर देखा गया।

7 मई शुक्रवार को डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में 33 कैबिनेट मंत्रियों के साथ शपथ ग्रहण किया था। जिनमें कुछ वरिष्ठ नेताओं, जो पूर्व मंत्री हैं, के अलावा पीके शेखर बाबू, एसएम नसर, पूर्व चेन्नई मेयर एम. सुब्रमणियम, डीएमके के पूर्व सचेतक आर. सक्करपानी, पी. मूर्ति, आर. गांधी, एसएस शिवशंकर, पलनीवेल त्यागराजन, अनबिल महेश मोयेमोझी, शिवा वी. मेय्यानाथन, सीवी गणेशन और टी. मानो तंगराजन को भी शामिल किया है।

कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए राजभवन में आयोजित सामान्य कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने स्टालिन और उनके काउंसिल मंत्रियों को उनके संबंधित पदों और गोपनीयता की शपथ दिलाया था। 

गौरतलब है कि एम. के. स्टालिन के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में डीएमके और इसके सहयोगियों ने 234 में से 159 सीटों पर अपना परचम लहराया। जबकि एआईएडीएमके और उसके घटक दल भाजपा को केवल 75 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इससे पहले पुलवामा सैनिकों की हत्या पर सहानुभूति और राष्ट्रवाद के उबाल के बीच साल 2019 के लोकसभा चुनाव में डीएमके ने स्टालिन के नेतृत्व में राज्य में 39 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज़ की थी।

गौरतलब है कि तमिलनाड़ु चुनाव से ठीक 4 दिन पहले ही 2 अपैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर गृहमंत्रालय के अधीन काम करने वाले आयकर विभाग ने स्टालिन के दामाद सबारसेन और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। बता दें कि सबारसेन डीएमके पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और स्टालिन के सलाहकार हैं। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)  

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