बीच बहस

डॉक्टरों के अपमान का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा रामदेव का बिना एडिट किया हुआ वीडियो

बाबा रामदेव की याचिका पर बुधवार को उच्चतम न्यायालय  में सुनवाई हुई। कोर्ट ने रामदेव के पूरे इंटरव्यू का बिना एडिट किया हुआ वीडियो मांगा है। अब मामले की सुनवाई अगले सोमवार को होगी। बाबा रामदेव पर एक इंटरव्यू के दौरान एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।

चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ रामदेव द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई  कर रही थी, जिसमें उनकी कथित टिप्पणी एलोपैथी कोविड-19 ​​​​का इलाज नहीं कर सकती, पर विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर को एक ही स्थान पर समेकित करने की मांग की गई है।

रामदेव की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि स्वामी जी ने स्पष्टीकरण दिया है, डॉक्टरों के प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है। पिछले साल जब पतंजलि ने कोरोनिल दवा निकाली और डॉक्टरों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने कोरोनिल वापस ले लिया। सभी को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, वायरल हुआ वीडियो आंशिक वीडियो था।

मुकुल रोहतगी ने कहा कि बाबा रामदेव का जो वीडियो वायरल हुआ वह सही नहीं है, हम सही वीडियो कोर्ट में जमा करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव को लेकर देशभर में विभिन्न शहरों में एफआईआर दर्ज कर दी गई है। हम यह चाहते हैं कि तमाम एफआईआर एक साथ यानी क्लब की जाएं और उनको दिल्ली ट्रांसफर किया जाए।

उच्चतम न्यायालय  ने रामदेव को कहा कि जो कुछ भी उन्होंने एलोपैथी और डॉक्टरों के लिए कहा है उसे हलफनामे के जरिए अदालत में दाखिल करें। 

एलोपैथी बनाम आयुर्वेद की लड़ाई में योगगुरु बाबा रामदेव के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में केस दर्ज कराए गए थे। इसको लेकर बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। रामदेव ने अपनी याचिका में आईएमए पटना और रायपुर द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगाने और प्राथमिकी को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है।

पिछले दिनों ही छत्तीसगढ़ के रायपुर में योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। कोरोना के इलाज में दी जा रहीं एलोपैथिक दवाओं को लेकर गलत जानकारी फैलाने के आरोप में उन पर यह केस दर्ज  किया गया था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की छत्तीसगढ़ यूनिट ने एफआईआर कराई है।

रायपुर में  रामदेव के खिलाफ सेक्शन 188, 269 और 504 के तहत केस फाइल किया गया है। महामारी को लेकर लापरवाही बरतने, अशांति फैलाने के इरादे से अपमान करने जैसे आरोपों के तहत उनके खिलाफ केस फाइल हुआ है। आईएमए की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि रामदेव ने गलत जानकारी फैलाई है।

इससे पहले एलोपैथी के खिलाफ बोलने और डॉक्टरों का मजाक उड़ाने से संबंधित वीडियो वायरल करने के आरोप में बाबा रामदेव पर आईएमए ने पटना में केस दर्ज करवाया था। राजधानी के पत्रकार नगर थाने में केस नंबर 317/21 के तहत बाबा रामदेव पर 186/188/269/270/336/420/499/504/505 आईपीसी, 51, 52, 54 डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 और 3 एपेडेमिक डिजीज एक्ट के तहत एफआईआर की गई।

आईएमए का आरोप है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बाबा रामदेव ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और पद्धति के प्रति आम लोगों के मन में भ्रम पैदा किया। उसके प्रति अविश्वास बढ़ाया, जिससे डॉक्टरों की भावनाएं आहत हुईं। आरोप है कि बाबा के कारण काफी संख्या में लोगों की कोरोना से मौत हुई।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 1, 2021 6:15 pm

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