Thursday, January 27, 2022

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धर्म और राजनीति का गठजोड़ मानव को गुलाम बनाता है!

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जो आस्था सत्य से आहत हो जाती हो उस आस्था को मर जाना चाहिए

पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी को कुछ धारणाएं कुछ मान्यताएं कुछ विश्वास और कुछ परंपराएं देती है

ज्यादातर लोग पुरानी धारणाओं मान्यताओं विश्वास और परंपराओं को आंख मूंद कर स्वीकार कर लेते हैं और पूरी जिंदगी उन पर चलकर मर जाते हैं

लेकिन कुछ लोग इन धारणाओं, मान्यताओं, विश्वास और परंपराओं को तर्क समझ और विज्ञान के आधार पर इनकी जांच करते हैं

इन्हें परखते हैं इनसे विद्रोह करते हैं इन्हें छोड़ते हैं दफन कर देते हैं और आगे बढ़ते हैं

मनुष्य पहले गुफाओं में रहता था

आज मनुष्य जहां पहुंचा है वह पुराने को छोड़ते हुए नए को खोजते हुए पहुंचा है

मनुष्य को अतीत बड़ा सुरक्षित और प्यारा लगता है

क्योंकि अब अतीत सिर्फ उसकी स्मृतियों में है वह उनमें जैसे चाहे कल्पना के रंग भर सकता है

वह कल्पना कर सकता है कि मेरे पैगंबर बुर्राक पर बैठकर सातवें आसमान पर जाकर अल्लाह से मिलकर आए या उन्होंने उंगली से चांद के दो टुकड़े कर दिए

या मनुष्य कल्पना कर सकता है कि उसके भगवान ने सूरज को निगल लिया था या पहाड़ उखाड़कर हाथ पर रखकर हवा में उड़ गए थे

मनुष्य असलियत में शारीरिक रूप से अन्य जानवरों के मुकाबले काफी कमजोर है

मनुष्य बिना हथियार की मदद के ना हाथी का मुकाबला कर सकता है ना शेर का

इसलिए मनुष्य ने खुद के ताकतवर होने की कल्पना करी और कहानियां बनाई

इन कहानियों में मनुष्य के पैगंबर या देवता और भगवान बहुत ताकतवर होते हैं

और वे सब कुछ कर सकते हैं वे उड़ सकते हैं वह तूफानों को रोक सकते हैं वह मरो को जिंदा कर सकते हैं

कल्पना की दुनिया से निकलने के बाद मनुष्य खुद को जिंदगी की चुनौतियों से घिरा हुआ पाता है

जिंदगी की हकीकत की चुनौतियों से बचकर भागने के लिए वह अतीत की ताकत से भरी कहानियों के नशे में डूबा रहना चाहता है

इसलिए आप देखेंगे कि मानव समाज को गुलाम बनाकर उनका शोषण करने वाले सत्ताधारी उन्हें अतीत की कहानियों में बहलाने की कोशिश करते हैं

इसलिए कभी वह आपको अल्लाह और पैगंबर की कहानियां सुनाकर उस जमाने में ले जाने की कोशिश करते हैं

कहीं वह आपको राम की कहानी सुनाकर राम के जमाने को फिर से जिंदा कर देने की कल्पना से बरगलाते हैं

लेकिन अब अतीत कभी नहीं आएगा

अतीत अब कहीं नहीं है

अतीत अब सिर्फ आपकी कल्पना में जिंदा है

वह आपको आपकी कल्पनाओं का गुलाम बना लेते हैं

तो आप जीते तो है वर्तमान में लेकिन दिमाग खोया रहता है अतीत में

वह आपके वर्तमान का शोषण करते हैं

लेकिन क्योंकि आपका दिमाग वर्तमान में है ही नहीं

वह तो पैगंबर या भगवान और देवताओं की कल्पनाओं में खोया हुआ है

तो आप अपने वर्तमान की चुनौतियों को न समझ पाते हैं ना लड़ पाते हैं ना बदल पाते हैं

यही सत्ता का षड्यंत्र है आपके खिलाफ

आप की धार्मिक सत्ता और राजनीतिक सत्ता का आपस में गठजोड़ है

यह गठजोड़ बहुत पुराना और बहुत गहरा है

लेकिन आप धर्म और राजनीति को अलग समझते हैं

इसलिए आप को गुलाम बनाकर रखना बहुत आसान हो चुका है

जब तक मनुष्य अतीत की कल्पनाओं से निकलकर वर्तमान को खुली आंखों से देखकर

उसे बदलने के लिए काम नहीं करेगा

तब तक इंसानी समाज लड़ाईयों, गरीबी बीमारी और तकलीफ में डूबा रहेगा

(लेखक गाँधीवादी सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं।)

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