Friday, January 21, 2022

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संवैधानिक महत्व के मामलों पर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर देश की निगाहें

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साल 2021 में कोरोना संकट के बावजूद लगातार उच्चतम न्यायालय की बेंच ने वर्चुअल सुनवाई की और कई अहम फैसले दिए। इन फैसलों में लोगों को कोरोना से बचाने के लिए कई ऐतिहासिक ऑर्डर के साथ-साथ तमाम सामाजिक सरोकार वाले जजमेंट दिए जिसके दूरगामी असर देखने को मिलेंगे।लेकिन इसके साथ ही सीएए, अनुच्छेद 370, चुनावी बांड आदि जैसे प्रमुख मामले लंबित रहे। उच्चतम न्यायालय को संवैधानिक महत्व के मामलों पर विचार करने में देरी के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाएं, जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाएं और चुनावी बांड की वैधता शामिल हैं।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उच्चतम न्यायालय 2022 में इन मुद्दों को उठाएगी,वह भी तब जब उसके दो चीफ जस्टिसों सहित 8 सहयोगी जजों का रिटायमेंट होने वाला है।

जहां तक उच्चतम न्यायालय  का संबंध है, दिसंबर 2021 (6 दिसंबर) तक कुल 69,855 मामले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं, जिनमें 51,503 विविध मामले और 18,352 नियमित सुनवाई के मामले शामिल हैं। इनमें से संविधान पीठ के 422 मामले शामिल हैं, जिनमें 272 पांच जजों की पीठ के मामले, 15 सात जजों की पीठ के मामले और 135 नौ जजों की पीठ के मामले शामिल हैं।

वर्ष 2021 में संविधान पीठ के केवल तीन निर्णयों/आदेशों के साथ सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठें बहुत सक्रिय नहीं थीं। 2020 में, संविधान पीठ द्वारा 11 निर्णय/आदेश दिए गए थे। एक संविधान पीठ को अनुच्छेद 370 के तहत राष्ट्रपति के आदेशों के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला करना बाकी है। अनुच्छेद 370 के तहत राष्ट्रपति के आदेशों के जरिए जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द कर दिया गया था। एक अन्य संविधान पीठ का मामला संविधान के 103वें संशोधन की वैधता से संबंधित है जिसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण का प्रावधान पेश किया।

इस सवाल से संबंधित मामला कि क्या अनुच्छेद 19 (1) (ए) पर अधिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं यदि यह उच्च पद धारण करने वाले व्यक्तियों से संबंधित है, इस पर अब भी एक संविधान पीठ द्वारा निर्णय लिया जाना बाकी है । एक संविधान पीठ ने अभी तक इस पर विचार नहीं किया है कि क्या राज्य के कानून आरक्षण के प्रयोजनों के लिए अनुसूचित जातियों के भीतर कुछ जातियों को तरजीह दे सकते हैं।

उच्चतम न्यायालय वर्ष 2022 में धारा 124 ए आईपीसी (देशद्रोह का अपराध) और यूएपीए के खिलाफ चुनौतियां अदालत आईपीसी की धारा 124ए के तहत देशद्रोह के अपराध की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी विचार कर सकती है । पिछले साल जुलाई में, चीफ जस्टिस एनवी रमना ने सेना के दिग्गज मेजर-जनरल एसजी वोम्बतकेरे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए देश में राजद्रोह कानून के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की थी । चीफ जस्टिस रमना ने भी असहमति पर अंकुश लगाने के लिए औपनिवेशिक युग के दौरान डाले गए प्रावधान (आईपीसी की धारा 124 ए) के उपयोग को जारी रखने पर मौखिक रूप से आपत्ति व्यक्त की थी।

उच्चतम न्यायालय आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के विभिन्न प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय ले सकती है। चीफ जस्टिस रमना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने पिछले साल नवंबर में कुछ पूर्व आईएएस/आईपीएस/आईएफएस अधिकारियों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। उच्चतम न्यायालय  ने 2019 में भी इसी तरह की याचिका में नोटिस जारी किया था जिसमें यूएपीए की वैधता को चुनौती दी गई थी।

इसके अलावा वर्ष 2021 में उच्चतम न्यायालय ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय सुनाये थे जिनमें ‘अपनी पसंद का लाइफ पार्टनर चुनना कपल का अधिकार’शामिल है।उच्चतम न्यायालय  ने इस बात पर एक बार फिर बल देते हुए कहा है कि अपनी पसंद का लाइफ पार्टनर चुनना कपल का अधिकार है। 11 फरवरी 2021 में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि साथ ही समाज को भी अंतर जातीय और अंतर धर्म विवाह को स्वीकार करना सीखना होगा और कपल को परेशान करने से बचना होगा।जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि पुलिस वालों के लिए ऐसे मामले को डील करने के लिए गाइडलाइंस बनाने की जरूरत है और ट्रेनिंग मॉड्यूल बनाने की जरूरत है। ये मामले सामाजिक तौर पर संवेदनशील होते हैं ऐसे में कपल को प्रोटेक्शन की जरूरत है।

इसी तरह उच्चतम न्यायालय ने एनडीए प्रवेश परीक्षा में महिलाओं को इजाजत दे दी। 22 सितंबर 2021 में अपने इस आदेश को वापस लेने से उच्चतम न्यायालय ने इनकार कर दिया था। उच्चतम न्यायालय  ने कहा है कि आर्म्ड फोर्स इमरजेंसी की स्थिति को डील करने में सक्षम है, हम महिलाओं का एनडीए में एंट्री एक साल के लिए नहीं टाल सकते। उच्चतम न्यायालय  ने केंद्र सरकार की उस दलील को अस्वीकार कर दिया था जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि महिलाओं को इस साल एनडीए एंट्रेस में बैठने की इजाजत देने वाले शीर्ष अदालत के आदेश वापस लिए जाएं।

उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं को एनडीए के बाद राष्ट्रीय भारतीय मिलिट्री स्कूल एग्जामिनेशन में बैठने की इजाजत दे दी है ताकि उनका 2022 सेशन में दाखिला हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2021 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेजों में दाखिले के लिए एग्जाम में महिला कैंडिडेट को बैठने की इजाजत दे ताकि 2022 सेशन में उनका प्रवेश हो सके।

उच्चतम न्यायालय ने 25 मार्च 2021 को कहा था कि महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने के लिए जो मूल्यांकन का क्राइटेरिया तय किया गया है वह मनमाना और भेदभावपूर्ण है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार (आर्मी अथॉरिटी)से कहा था कि वह शॉर्ट सर्विस कमिशन की महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने के आवेदन पर एक महीने के भीतर फिर से विचार करे और दो महीने के भीतर ऑर्डर करे। महिला अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई थी कि परमानेंट कमीशन के लिए जो क्राइटेरिया और प्रक्रिया तय किया गया है वह मनमाना, अनफेयर और अतार्किक है।

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से 22 अक्टूबर 2021 को कहा कि वह सात दिनों के भीतर 39 महिला आर्मी ऑफिसरों को परमानेंट कमिशन प्रदान करे। इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 39 परमानेंट कमीशन देने की योग्यता रखती हैं। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस मामले में सात दिनों के भीतर आदेश पारित करे। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर महिला अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें परमानेंट कमीशन देने से मना किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने 31 मार्च को कहा था कि देश भर के लिए एक समान कीमत वाली वैक्सीन पॉलिसी होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के दोहरी पॉलिसी पर सवाल उठाया था। फिर 2 जून 2021 को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कुछ तीखे सवाल किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में केंद्र सरकार से कहा था कि वह कोर्ट को बताए कि अभी तक वैक्सीनेशन के लिए कितने वैक्सीन किस कंपनी से कब-कब खरीदे।।बाकी लोगों को कब तक वैक्सीन लग जाएंगे। उच्चतम न्यायालय ने कोविड से संबंधित मामले की सुनवाई के बाद जारी आदेश में केंद्र सरकार से तमाम ब्यौरा हलफनामे के तौर पर पेश करने को कहा था।

उच्चतम न्यायालय ने इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए राज्यों और केंद्र को मिलकर ऑक्सीजन का एक सुरक्षित भंडार रखने का निर्देश दिया है। 3 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसका डी-सेंट्रलाइजेशन किया जाए ऐसा इसलिए किया जाए ताकि नॉर्मल सप्लाई अगर बाधित हो तो आपात स्थिति में इसका इस्तेमाल हो सके। फिर आठ मई को कोरोना महामारी के दौरान देश भर में ऑक्सीजन सप्लाई और आवंटन को स्ट्रीमलाइन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नैशनल टास्क फोर्स का गठन किया था।

उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार के उस कानून को खारिज कर दिया जिसमें महाराष्ट्र सरकार ने मराठों को सरकारी नौकरी और दाखिले में रिजर्वेशन देने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को मराठा आरक्षण को गैर संवैधानिक करार दिया है और कहा है कि इंदिरा साहनी जजमेंट में दिए गए फैसले में 50 फीसदी के रिजर्वेशन लिमिट को पार करने के लिए अति विशेष परिस्थिति की बात कही गई थी वैसी अति विशेष परिस्थितियां नहीं थी।उच्चतम न्यायालय ने इंदिरा साहनी यानी मंडल जजमेंट को दोबारा परीक्षण के लिए लार्जर बेंच भेजने से इनकार कर दिया और कहा कि इंदिरा साहनी में 50 फीसदी रिजर्वेशन का लिमिट तय करने का जो फैसला हुआ था उसे बाद के कई जजमेंट में मान्य करार दिया जा चुका है और ऐसे में इंदिरा साहनी जजमेंट को दोबारा देखने की जरूरत नहीं है।

उच्चतम न्यायालय जकिया जाफरी की बड़ी साजिश की जांच की गुहार अदालत जकिया एहसान जाफरी द्वारा दायर याचिका में अपना फैसला सुनाएगा , जिसमें एसआईटी द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी गई थी। एसआईटी की र‌िपोर्ट में 2002 के गुजरात दंगों में राज्य के आला पदाधिकारियों और अन्य संस्थाओं द्वारा बड़ी साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया गया था। जस्टिस एएम खानविलकर (जो इस साल सेवानिवृत्त हो रहे हैं) ने पिछले साल दिसंबर में मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

फसीआरए संशोधनों की वैधता जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ एफसीआरए संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगी । याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि संशोधनों ने गैर सरकारी संगठनों पर विदेशी धन के उपयोग में कठोर और अत्यधिक प्रतिबंध लगाए हैं।

पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके राजनेताओं, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं आदि की व्यापक और लक्षित निगरानी के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है। 27 अक्टूबर को कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरवी रवींद्रन की अध्यक्षता वाली कमेटी को मामले की जल्द से जल्द जांच करने का निर्देश दिया था और मामले को 8 हफ्ते बाद लिस्ट करने का निर्देश दिया था।

विजय माल्या केस में अदालत भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या के खिलाफ अवमानना मामले में सजा की सुनवाई के साथ आगे बढ़ेगी। 18 जनवरी, 2022 को सुनवाई के लिए मामले को पोस्ट करते हुए, कोर्ट ने कहा था कि भले ही माल्या – जो अब यूनाइटेड किंगडम में है, जहां से भारत सरकार उसे प्रत्यर्पित करने की कोशिश कर रही है- अदालत के सामने मौजूद ना रहे, कोर्ट उसकी ओर से उसके वकील को सुनेगा।

केरल और तमिलनाडु के बीच मुल्लापेरियार विवाद जस्टिस खानविलकर की अगुवाई वाली पीठ मुल्लापेरियार बांध के संबंध में केरल और तमिलनाडु राज्यों के बीच विवाद के सभी बिंदुओं के अंतिम समाधान पर भी फैसला करेगी। न्यायालय केरल स्थित पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच पर विचार कर रहा है, जिसमें 126 साल पुराने बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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