Thu. Jun 4th, 2020

ट्रंप की धमकीः क्या भारत अमरीका का उपनिवेश है, या संप्रभुता गिरवी है!

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क्या मोदी सरकार ने भारत की सम्प्रभुता अमरीका के पास गिरवी रख दी है? क्या जिस तरह हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा न भेजने पर परिणाम की धमकी अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को दी है, क्या यह एक सम्प्रभु राष्ट्र की अवमानना नहीं है? क्या भारत सम्प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र नहीं बल्कि अमरीका का उपनिवेश है?

धमकी के छह घंटे बाद भारत ने जिस तरह धमकी के आगे झुकते हुए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात की अनुमति दे दी, उससे आम जन मानस में सवाल उठे या न उठे मेरे मन में यह सवाल जरुर उठ रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने या फिर किसी सनक में ट्रंप ने भारत को कश्मीर पर धमकी दी तो भारत क्या करेगा?

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यही नहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का वह जमाना भी याद आ गया जब इंदिरा गांधी अमरीका राष्ट्रपति निक्सन की धमकी और बंगाल की खाड़ी में अमरीका के 7वें जहाजी बेड़ा भेजे जाने पर भी नहीं झुकीं और 13 दिन में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके पूर्वी पकिस्तान को बांग्लादेश के रूप में आज़ाद करा दिया।

सरकार ने मंगलवार को कहा कि कुछ देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा का निर्यात किया जाएगा। हालांकि, देश की जरूरतों को प्राथमिकता देंगे। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि अन्य देश में कितने केस हैं।

भारत का बयान अमरीकी चेतावनी के छह घंटे बाद आया। भारतीय समयानुसार तड़के चार बजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा था कि अगर भारत उनके व्यक्तिगत आग्रह के बावजूद दवा नहीं भेजता तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन भारत में मलेरिया के इलाज की पुरानी और सस्ती दवा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच देश के स्वास्थ्यकर्मी यह दवा एंटी-वायरल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते सरकार ने पिछले महीने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। नासा के वैज्ञानिकों ने भी मलेरिया निरोधक हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को कोरोना से लड़ने में कारगर बताया था।

एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रंप से सवाल पूछा गया, ‘ क्या आपको चिंता है कि आपकी तरफ से अमरीका के उत्पाद के एक्सपोर्ट में पाबंदी लगाने की प्रतक्रिया आएगी, जैसे की भारतीय पीएम मोदी ने अमरीका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन न देने का डिसीजन लिया है।’’

जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे यह डिसीजन पसंद नहीं आया। मैंने नहीं सुना कि यह उनका डिसीजन है। हां मैंने यह सुना है कि उन्होंने कुछ देशों के लिए पाबंदी लगाई है। मैंने कल उनसे बात की थी। हमारी अच्छी बात हुई। मैं बहुत आश्चर्यचकित होऊंगा अगर वे दवा पर पाबंदी लगाते हैं, क्योंकि भारत कई सालों से अमरीका से व्यापार में लाभ ले रहा है। मैंने रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि अगर वह हमारी (हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की) सप्लाई को अनुमति देते हैं तो हम उनकी सराहना करेंगे। अगर वह एसा नहीं करते हैं तो इसका जवाब दिया जाएगा, आखिर क्यों नहीं दिया जाए?’’

बता दें कि शनिवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से गुहार लगाई थी कि बीमारी से निपटने के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की खेप भेजें।

गौरतलब है कि इटली और स्पेन के बाद अमरीका में मौतों का आंकड़ा 10 हजार से ज्यादा हो गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क स्टेट में पांच हजार मौतें हुई हैं। इनमें आधी से ज्यादा केवल न्यूयॉर्क सिटी में हैं। वहीं, राज्य में एक लाख 20 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं और 16 हजार से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कुछ दिन पहले भारत के साथ गहरी दोस्ती दिखाने वाले ट्रंप की धमकी पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। भारतीय नेताओं ने ट्रंप के इस धमकी भरे अंदाज पर सख्त रुख अपनाया और सोशल मीडिया पर जमकर गुस्सा उतारा।

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने याद दिलाया ‘नमस्ते ट्रंप’ इवेंट। येचुरी ने ट्रंप की इस धमकी पर जवाब दिया।  येचुरी ने मोदी सरकार पर भी इसी बहाने हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये तब हो रहा है जब मोदी ने ट्रंप के लिए एक महंगा इवेंट आयोजित किया।

येचुरी ने लिखा, “अमरीका के राष्ट्रपति का बयान पूरी तरह अमान्य है, लेकिन मोदी सरकार ने इस धमकी के आगे झुककर एक्सपोर्ट जारी रखा है। ये तब हो रहा है जब पीएम मोदी ने उनके लिए एक महंगा इवेंट आयोजित किया था।  कोरोना को लेकर जरूरी तैयारियों के बजाय सरकार भारत को नीचा दिखा रही है।”

कांग्रेस नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इसे दोस्तों की प्रतिशोध की भावना बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत को अपनी आपूर्ति पर ध्यान देना चाहिए। राहुल ने लिखा, “‘मित्रों’ में प्रतिशोध की भावना? भारत को सभी देशों की सहायता के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन सबसे पहले जान बचाने की सभी दवाइयां और उपकरण अपने देश के कोने-कोने तक पहुंचना जरूरी है।”

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी ट्रंप को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मेरे दशकों के विदेश नीति के अनुभव में किसी भी राष्ट्र प्रमुख को किसी अन्य देश को इस तरह धमकाते हुए कभी नहीं देखा। भारतीय हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को हमारी सप्लाई कैसे कहा मिस्टर प्रेजिडेंट? यह आपकी सप्लाई तभी हो सकती है जब भारत आपको इसे बेचना चाहेगा।”

राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि ट्रंप को उनकी इस धमकी का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “ट्रंप ने 135 करोड़ हिंदुस्तानियों को धमकी दी है, भारत की संप्रभुता को धमकी दी है। मोदी जी को धमकी का जवाब देना चाहिए, लेकिन धमकी से डर कर भारत सरकार दवा देने को तैयार हो गई। भारत खुद संकट में है, पहले इसको बचाइए मोदी जी।”

इस बीच एक अमरीकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि ट्रंप इसलिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई पर जोर दे रहे हैं क्योंकि इसे बनाने वाली एक कंपनी में उनका भी शेयर है। ट्रंप ने काफी पहले ही इस दवा का नाम सुझाया था।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों डॉक्टरों के हवाले से दावा किया था कि कोरोना वायरस से निपटने में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई काफी कारगर साबित हो सकती है। इतना ही नहीं उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को फोन कर इसकी नई खेप भेजने का भी आग्रह किया था क्योंकि भारत इस दवाई का सबसे बड़ा उत्पादक है।

ट्रंप लगातार कोरोना वायरस से निपटने में इस ऐंटी-मलेरिया टैबलेट के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं जबकि कई वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस पर इसके असर की पुष्टि नहीं हुई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने ऐसा दावा किया है कि ट्रंप इस दवा पर इसलिए दांव खेल रहे हैं, क्योंकि इसमें उनका निजी फायदा है। अखबार ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि अगर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को पूरी दुनिया अपना लेती है तो दवा कंपनियों को इसका बड़ा फायदा मिलेगा, जिनमें से एक कंपनी सैनोफी में ट्रंप का भी हिस्सा है। कंपनी के अधिकारियों संग ट्रंप के गहरे रिश्ते भी बताए जा रहे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और इलाहाबाद में रहते हैं।)

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