Friday, January 27, 2023

प्रेम धवन, जिनके गाने आज भी लोगों को देश प्रेम के रंग में डुबो देते हैं

Follow us:

ज़रूर पढ़े

प्रेम धवन की शिनाख़्त एक वतनपरस्त गीतकार की रही है। जिन्होंने अपने गीतों से देशवासियों में वतनपरस्ती का जज़्बा जगाया। एकता और भाईचारे का पैग़ाम दिया। प्रेम धवन, शुरुआत से ही प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़ गए थे। पढ़ाई के दौरान इप्टा की गतिविधियों और ड्रामों में हिस्सा लेना, यही उनका अकेला शग़ल था। तालीम मुक़म्मल होने के बाद, नौकरी को अहमियत ना देकर उन्होंने ‘इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन’ को चुना। ताकि रचनात्मक काम कर सकें। आज़ादी के आंदोलन में अपना भी कुछ योगदान दे सकें। उस ज़माने में मुंबई, मुल्क में सांस्कृतिक गतिविधियों का एक बड़ा केन्द्र था। सभी बड़े कलाकार, लेखक और संस्कृतिकर्मियों की आख़िरी मंजिल मुंबई होती थी। प्रेम धवन भी अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई पहुंच गए। उस वक़्त इप्टा की मुंबई शाखा अपने उरूज पर थी, जिसमें बड़े-बड़े कलाकार, गीतकार, संगीतकार, लेखक और निर्देशक जुड़े हुए थे। प्रेम धवन थोड़े से ही अरसे में इस महान टीम का हिस्सा हो गए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पहले महासचिव कॉमरेड पीसी जोशी ने अपने एक लेख में प्रेम धवन की इप्टा में शुरुआती यात्रा को कुछ इस तरह से बयां किया है,‘‘उसकी आवाज़ खूब सुरीली थी और उसने पंजाब किसान सभा की सांस्कृतिक टीम में गीत गाना शुरू किया। विश्वयुद्ध के दौरान विजयवाड़ा में संपन्न हुए अखिल भारतीय किसान सभा के सम्मेलन में उसकी योग्यता को परखा गया। उसे तुरंत ही केंद्रीय टीम के लिए चुन लिया गया और फिर वह एक गायक और एक प्रतिभावान कम्पोजर के रूप में आगे ही बढ़ता गया। उसने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। वह विभिन्न अवसरों पर मज़दूरों के संघर्षों में और राष्ट्रीय आंदोलनों के समय, जैसे ही कहा जाता समयानुकूल गीत रचने लगा। उसे गीत तैयार करने में समय ही नहीं लगता था।’’ प्रेम धवन की इस खू़बी का इप्टा को आगे चलकर बहुत फ़ायदा मिला।

रॉयल इंडिया नेवी के विद्रोह और आज़ाद हिंद फ़ौज के सैनिकों पर से मुक़दमा वापस लिए जाने के बाद, देश में व्यापक जन उभार पैदा हुआ। अंग्रेज हुकूमत इन घटनाओं से हिल गई। भारतीय नेताओं से समझौता वार्ता के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने कैबिनेट मिशन भेजा। इप्टा ने इस मौके को माकू़ल समझा और प्रेम धवन से एक विशेष गीत तैयार करवाया। इस गीत में प्रेम धवन ने ब्रिटिश कैबिनेट मिशन को ब्रिटिश बंदर का परंपरागत खेल बताया। जैसे ही यह गीत जनसभा में गाया गया, जनता की ज़बान पर चढ़ गया। उस वक़्त आलम यह था कि यह गीत देश की गली-गली में गूंज रहा था। आज़ादी के पहले देश में जब रेलवे के मज़दूरों ने अखिल भारतीय हड़ताल का फ़ैसला लिया, तो इस मौक़े पर प्रेम धवन ने फिर एक लोकप्रिय गीत लिखा। इस गीत का सार कुछ यह था कि ‘‘जब रेल का चक्का जाम होगा, तो ब्रिटिश शासकों का क्या हाल होगा ?’’ उम्मीद के मुताबिक उनका यह गीत भी खूब मक़बूल हुआ।

यह गीत सिर्फ़ रेल मज़दूरों में ही नहीं, बल्कि बाकी मज़दूरों में भी दूर-दूर तक मशहूर हुआ। देश में साम्प्रदायिक दंगों की आग फैली, तो वह इप्टा ही थी, जिसने अपने गीतों, नुक्कड़ नाटक, नाटक और एकांकियों के जरिए हिंदू-मुस्लिम क़ौम के बीच एकता और भाईचारा का पैगाम दिया। अमर शेख, अन्ना भाऊ साठे, दशरथ और शैलेन्द्र के साथ प्रेम धवन ने बड़ी तादाद में गीत तैयार किए। यह गीत सड़क, नुक्कड़ और सभाओं में गाए जाते थे। जिनका गहरा असर जनता पर पड़ता। इप्टा की इस साम्प्रदायिकता विरोधी मुहिम में लोग जुड़ते चले जाते। प्रेम धवन का ऐसा ही एक दिलों को जोड़ने वाला शानदार गीत है,‘‘मिल के चलो, मिल के चलो/ये वक्त की आवाज़ है, मिल के चलो।’’

इप्टा के नाटकों के लिए प्रेम धवन ने अनेक गीत लिखे। गीत लिखने के अलावा नृत्य और संगीत में भी उनकी गहरी दिलचस्पी थी। इस दिलचस्पी का ही सबब था कि उन्होंने पं. रवि शंकर से संगीत और पं. उदय शंकर और शांति रॉय बर्धन से विधिवत नृत्य की शिक्षा ली। पूरे चार साल तक प्रेम धवन ने संगीत और नृत्य का प्रशिक्षण लिया। इस तरह प्रेम धवन गीतकार के साथ-साथ कोरियोग्राफर और कम्पोजर भी बन गए। इस दौरान उनका लिखना-पढ़ना भी जारी रहा। उन्होंने कई भाषाएं सीखीं। इप्टा के ‘सेंट्रल स्क्वॉड’ में प्रेम धवन का प्रमुख स्थान था। शैलेन्द्र के साथ वे इप्टा के स्थायी गीतकार थे। प्रचलित लोक धुनों पर नई धुन बनाने में उन्हें महारत हासिल थी। हर प्रांत के लोकगीत उन्हें मुंह ज़बानी याद रहते थे।

प्रेम धवन ने लोक धुनों में ज़रूरत के मुताबिक प्रयोग किए। इप्टा के सेंट्रल स्क्वॉड यानी केन्द्रीय दल में प्रेम धवन के अलावा अबनी दासगुप्ता, शांति बर्धन, पंडित रविशंकर, सचिन शंकर, गुल बर्द्धन, अली अकबर ख़ान, पंडित उदय शंकर, मराठी के मशहूर गायक अमर शेख़, अन्ना भाऊ साठे, ख़्वाजा अहमद अब्बास जैसे बड़े नामों के साथ-साथ देश के विविध क्षेत्रों की विविध शैलियों से संबंधित सदस्य एक साथ रहते थे। इनके साहचर्य ने ‘स्प्रिट ऑफ इंडिया’, ‘इंडिया इम्मॉर्टल’, ‘कश्मीर’ जैसी लाजवाब पेशकशों को जन्म दिया। ‘सेंट्रल स्क्वॉड’ अपने इन कार्यक्रमों को लेकर, पूरे देश में जाता था। प्रेम धवन भी इस स्क्वॉड के साथ देश के अनेक हिस्सों में गए और वहां की संस्कृति को करीब से देखा-समझा। इप्टा के चर्चित कार्यक्रम ‘स्प्रिट ऑफ इंडिया’ यानी ‘भारत की आत्मा’ में कथा जैसी जो टीका होती थी, उसकी रचना प्रेम धवन ने ही की थी। जिसे बिनय रॉय गाते थे। प्रेम धवन की देशभक्ति भरी स्क्रिप्ट और गीतों को देशवासियों पर गहरा असर होता था। उनमें वतनपरस्ती का सोया हुआ जज़्बा जाग उठता था।

प्रेम धवन एक कलाकार के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक एक्टिविस्ट भी थे। इप्टा के कलाकार अपनी कला के ज़रिए समाज में एक चेतना फैलाने का काम कर रहे थे। इप्टा उस देशव्यापी जन आंदोलन से जुड़ा हुआ था, जो देश की आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहा था। प्रेम धवन हरफ़नमौला कलाकार थे। नाटकों में गीत लिखने के अलावा उन्होंने कुछ नाटकों में अभिनय भी किया। भीष्म साहनी के निर्देशन में हुए प्रसिद्ध नाटक ‘भूतगाड़ी’ में उनका भी एक रोल था। देश को आज़ादी मिलने तक इप्टा और उससे जुड़े कलाकारों एवं संस्कृतिकर्मियों का संघर्ष जा़री रहा। आख़िर वह दिन भी आया, जब मुल्क आज़ाद हुआ। आज़ादी की पूर्व संध्या से लेकर पूरी रात भर देशवासियों ने आज़ादी का जश्न मनाया।

बंबई की सड़कों पर भी हज़ारों लोग आज़ादी का स्वागत करने निकल आए। इप्टा के सेंट्रल स्क्वॉड ने इस ख़ास मौके के लिए एक गीत रचा, जिसे प्रेम धवन ने लिखा, पंडित रविशंकर ने इसकी धुन बनाई और मराठी के मशहूर गायक अमर शेख़ ने इस गीत को अपनी आवाज़ दी। देशभक्ति भरे इस गीत के बोलों ने उस वक़्त जैसे हर हिंदुस्तानी के मन में एक नए आत्मविश्वास, स्वाभिमान और ख़ुशी का जज़्बा जगा दिया,‘‘झूम-झूम के नाचो आज/गाओ ख़ुशी के गीत/झूठ की आख़िर हार हुई/सच की आख़िर जीत/फिर आज़ाद पवन में अपना झंडा है लहराया/आज हिमाला फिर सर को ऊँचा कर के मुस्कराया/गंगा-जमुना के होंठों पे फिर है गीत ख़ुशी के/इस धरती की दौलत अपनी इस अम्बर की छाया/झूम-झूम के नाचो आज।’’

देश की आज़ादी के बाद, जब इप्टा में बिखराव आया, तो प्रेम धवन कुछ समय के लिए इससे अलग हो गए। फ़िल्मों में उन्होंने बतौर गीतकार, संगीतकार काम किया। प्रेम धवन ने अपने फ़िल्मी गीतों में भी अपना सियासी नज़रिया नहीं छोड़ा। जहां उन्हें मौका मिलता, वे अपने गीतों के ज़रिए लोगों को जागरूक करने का काम करते थे। देशभक्ति भरे गीत तो जैसे उनकी पहचान ही बन गए थे। ख़ास तौर से ‘काबुलीवाला’ का ‘‘ए मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन..’’ और ‘हम हिंदुस्तानी’ फ़िल्म के ‘‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी’’ गीतों ने पूरे देश में धूम मचा दी। देश प्रेम में डूबे, यह गीत खूब पसंद किए गए। इन गीतों की कामयाबी ने प्रेम धवन को फ़िल्मी दुनिया में स्थापित कर दिया।

साल 1965 में निर्देशक मनोज कुमार ने प्रेम धवन की क़ाबिलियत पर यक़ीन जताते हुए, अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म ‘शहीद’, जो कि क्रांतिकारी भगत सिंह और उनके साथियों के जीवन पर आधारित थी, एक साथ तीन ज़िम्मेदारी सौंपी। प्रेम धवन को इस फ़िल्म में न सिर्फ गीत लिखने थे, बल्कि संगीत और नृत्य निर्देशन की ज़िम्मेदारी भी उन्हीं की थी। बहरहाल जब ‘शहीद’ रिलीज हुई, तो इस फ़िल्म के गीत-संगीत बच्चे-बच्चे की ज़बान पर चढ़ गया। ‘जट्टा पगड़ी संभाल’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन, हमको तेरी क़सम’ और ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ ग़ज़ब के लोकप्रिय हुए। देशभक्ति से भरे उनके यह गीत आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरे देश में बजते हैं। इन्हें सुनकर हर देशवासी का दिल वतनपरस्ती के जज़्बे से लबरेज हो जाता है। प्रेम धवन ने अपने फ़िल्मी करियर में तक़रीबन 300 फ़िल्मों के लिए गीत लिखे और 50 से ज़्यादा फ़िल्मों में संगीत दिया। अपने बेमिसाल काम के लिए वे कई मान-सम्मानों से नवाज़े गए। अपने जीवन के संध्या काल में वे फ़िल्मों से दूर हो गए और अपना ज़्यादातर वक़्त उन्होंने पढ़ने-लिखने और इप्टा की गतिविधियों में लगाया। देश की नई पीढ़ी को इप्टा के गौरवशाली इतिहास से जोड़ा।

(जाहिद खान वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल मध्य प्रदेश में रहते हैं।)

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

ग्रांउड रिपोर्ट: मिलिए भारत जोड़ो के अनजान नायकों से, जो यात्रा की नींव बने हुए हैं

भारत जोड़ो यात्रा तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू होकर जम्मू-कश्मीर तक जा रही है। जिसका लक्ष्य 150 दिनों में...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x