यूसी वेब और क्लब फैक्ट्री के सैकड़ों कर्मचारियों पर चली चीनी ऐप पाबंदी की राष्ट्रवादी कुल्हाड़ी

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अलीबाबा के यूसी वेब ने अपने भारतीय कर्मचारियों की छुट्टी करने का फैसला किया है, वहीं क्लब फैक्ट्री ने भी ऐप पर पाबंदी लगाये जाने के बाद से अपने स्टाफ की सैलरी पर रोक लगा दी है।

यूसी वेब ने अपने बयान में कहा है कि वह सरकार के आदेश का पूरी तरह से पालन कर रही है और इसने अपनी सभी सेवाओं को बंद कर दिया है, लेकिन इस बात पर उसने कोई जवाब नहीं दिया कि क्या वह भारत में अपने संचालन को पूरी तरह से बंद कर चुकी है या करने का इरादा रखती है।

यह बात अपने में गौरतलब है कि गलवान घाटी में पिछले कुछ महीनों से भारत-चीन सेना के बीच में चल रही तनातनी और इसके बाद पिछले महीने भारतीय सेना के 20 जवानों के हताहत होने के चलते दोनों ही देशों के बीच काफी गहमागहमी देखने को मिली थी। यह अलग बात है कि सर्वोच्च स्तर पर किसी भी प्रकार की बयानबाजी को सीधे तौर पर एक दूसरे देश के खिलाफ किये जाते नहीं देखा गया। लेकिन भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ एक से अधिक बार इस पर सार्वजनिक मंच से देश को आश्वस्त किया बल्कि लद्दाख घाटी के बेस कैंप में जाकर सेना के जवानों के बीच समय बिताने से लेकर उन्हें संबोधित भी किया।

पर्दे के पीछे भी लगातार विश्व शक्तियों के साथ सम्पर्कों को साधने और हिन्द महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक की अटकलें इस बीच सुनने को मिली थीं। 

लेकिन कुल मिलाकर भारतीय गुस्से और हताशा का भुगतान 59 चीनी ऐप को भुगतना पड़ा है, जिनमें यूसी न्यूज़ और क्लब फैक्ट्री प्रमुख ऐपों में शामिल हैं। 

रायटर के हवाले से देश और दुनिया भर में इस खबर पर लोगों की निगाहें बनी हुई हैं कि एक समय जो भारत इस आस में बैठा था कि चीन में कोरोना वायरस के चलते और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आह्वान पर अमेरिकी कम्पनियों के चीन से कदम खींचने के बाद उसका पूरा लाभ हासिल करेगा। बाद के घटनाक्रम ने उसके उम्मीदों पर पानी फेर दिया। और अब आलम यह है कि खुद भारत में पहले से मौजूद कम्पनियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो चुके हैं।

रायटर से मिल रही अधिकृत सूचना के आधार पर इस बात का दावा किया जा रहा है कि अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड की सहायक यूसी वेब भारत में अपने कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। अलीबाबा के पास यूसी वेब के अलावा दो और उत्पाद भारतीय बाजार में हैं, जिन पर पिछले दिनों बैन की घोषणा भारतीय सरकार की ओर से की गई थी।

पिछले दिनों यह बैन लगाने के पीछे भारतीय संप्रभुता को खतरा और सुरक्षा में सेंध को वजह बताया गया था। भारतीय संचार मंत्री ने तो इसे “डिजिटल स्ट्राइक” तक की संज्ञा दे डाली थी।

करीब एक दशक से भारतीय बाजार में प्रवेश कर चुकी यूसीवेब का अपना न्यूज़ ऐप काफी लोकप्रिय था और वीमेट के तौर पर इसने छोटे-छोटे वीडियो बनाने वाले ऐप को भी भारत में लांच किया था। इन दोनों ही कम्पनियों के कर्मचारियों ने 15 जुलाई को प्राप्त हुए एक पत्र की बाबत रायटर को इस बात की जानकारी दी थी।

कम्पनी ने अपने पत्र में सूचित करते हुए लिखा है “यह बर्खास्तगी इस बात के मद्देनजर की जा रही है जिसमें भारत सरकार द्वारा यूसी वेब और वीमेट पर प्रतिबन्ध लगाये जाने की स्थिति में कंपनी के पास भारत में अपने संचालन को चला पाने में हो रही परेशानियों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।” 

कम्पनी जहाँ इस बात का दावा कर रही है कि वह भारतीय कानूनों और दिशानिर्देश का लगातार पालन कर रही है, वहीं वह इस डिटेल को साझा नहीं कर रही है कि क्या यह अपने संचालन को पूरी तरह से खत्म करने जा रही है। 

चीनी ई-कामर्स के क्षेत्र में विशालकाय कम्पनी अलीबाबा ने इस बारे में कुछ भी बात करने से इनकार कर दिया है।

यूसी ब्राउज़र के भारत में 13 करोड़ की संख्या में मासिक उपभोक्ता थे। कम्पनी के भारत में सीधे तौर पर लगभग 100 कर्मचारी कार्यरत थे और सैकड़ों की संख्या में परोक्ष तौर पर अन्य कम्पनियों से सम्बद्ध थे। इन सभी का भविष्य अधर में लटक गया है।

एक अन्य प्रतिबंधित ऐप क्लब फैक्ट्री जो कि एक ई कॉमर्स सेवा से सम्बद्ध है, ने अपने भारतीय विक्रेताओं के नाम पत्र में लिखा है कि ‘आकस्मिक मजबूरन कदम’ के तौर पर उसे अपने सभी विक्रेताओं को खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि वह सभी को अपने फर्म में जगह देने में अक्षम है। 

अपने करीब 30,000 भारतीय विक्रेताओं को लिखे पत्र में कहा, “हम यहां यह बताना चाहते हैं कि CF ऐप और वेबसाइट पर फ़िलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी जा रही है, जब तक कि CF ऐप और वेबसाइट पर प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते।”

क्लब फैक्ट्री के अनुसार: ऐप बैन एक अस्थाई प्रतिबन्ध के तौर पर लगाये गए थे जिसमें व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ कम्पनी को इस बीच सरकार के साथ मिल बैठकर सवालों को हल करना था। 

जिन 59 ऐप्स पर अस्थाई प्रतिबंधों को लगाया गया है उनमें टिक टोक भी शामिल है, जिन्हें कुछ 77 सवालों के जवाबों को देना है, जिसमें कंटेंट को सेंसर करने से लेकर विदेशी सरकारों के मार्फत काम करने या लॉबी के तौर पर प्रभाव डालने जैसे सवालों के जवाब देने के लिए कहा गया है।

(रविंद्र सिंह पटवाल स्वतंत्र लेखक हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।) 

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