Thursday, December 2, 2021

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किसान परेड में हंगामाः मुख्य उपद्रवी दीप सिद्धू के नाम से मीडिया को परहेज

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किसाान आंदोलन के खिलाफ बिल्कुल शुरू से ही दुष्प्रचार फैला रही गोदी मीडिया को कल मानो मुंह मांगी मुराद मिल गई हो। आईटीओ से लाल किले तक दीप सिद्धू और लक्खा सिधाना के नेतृत्व में उपद्रवियों का समूह ट्रैक्टर परेड में शामिल हो कर गोदी मीडिया और सरकार की साजिश को फलीभूत करते दिखे। बावजूद इसके कल की ट्रैक्टर परेड अभूतपूर्व और ऐतिहासिक थी। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो इतना बड़ी और व्यापक ट्रैक्टर परेड शांतिपूर्ण रही। उपद्रवी जिस मंसूबे से किसानों की ट्रैक्टर परेड में शामिल हुए थे, उसे वो उस तरह से पूरा नहीं कर सके और दो घंटे में ही खुद एक्सपोज हो गए।

कॉरपोरेट मीडिया जो किसान आंदोलन को या तो ब्लैकआउट करती आ रही थी या फिर उन्हें खालिस्तानी, अड़ियल, विपक्षी दलों का कार्यकर्ता, गुमराह किसान, विदेशी फंड पर पिकनिक मनाने आए पंजाबी बता रही थी, वो कल दोपहर बाद से अचानक चिल्लाने लगी। कल तकरीबन सभी न्यूज चैनलों की हेडलाइंस एक सी दिख रहीं थीं। हिंदी-अंग्रेजी के सारे न्यूज चैनल किसान यूनियनों पर वादा खिलाफी का आरोप लगा रहे थे।

दरअसल मीडिया कल संयुक्त किसान मोर्चा के ट्रैक्टर परेड को नहीं बल्कि भाजपा एजेंट दीप सिद्धू के ट्रैक्टर परेड को कवर कर रही थी। कल मीडिया लाल किला और आईटीओ की दो घटनाओं के फुटेज को बार-बार बढ़ा चढ़ाकर दिखाती रही। निशान साहिब को खालिस्तानी अलगाववादियों का झंडा तक साबित करने की कोशिश की। आरएसएस-भाजपा समर्थक दीप सिद्धू, लक्खा सिधाना समूह द्वारा आईटीओ पर पुलिस वालों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश को किसान आंदोलन की करतूत बताती रही।

सिर्फ़ दो घटनाओं के वीडियो के दम पर मीडिया ने कल किसान आंदोलन को हिंसा, दंगा साबित करके जनमत को बदलने की पूरी कोशिश की। कल की तमाम मीडिया रिपोर्टें दरअसल किसान आंदोलन को मिल रहे जनसमर्थन को खत्म करने के कोशिशें थीं। किसी भी टीवी चैनल में मुख्य उपद्रवी दीप सिद्धू का कोई जिक्र नहीं मिलेगा। जाहिर है मीडिया का इंट्रेस्ट दीप सिद्धू में हो नहीं सकता।

आज 27 जनवरी को आज तक चैनल के रिपोर्टर लाल किले से रिपोर्टिंग करने गए हैं। वह बता रहे हैं कि कल जो झांकी राजपथ पर निकाली गई थी, उसमें राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर की झांकी को निशाना बनाया है। टीवी-9 बता रहा है कि कल उपद्रवियों के पास ख़तरनाक हथियार थे। एबीपी न्यूज बता रहा है कि किसानों ने धोखा देकर देश के गौरव लाल किले पर हमला किया है।

न्यूज नेशन बता रहा है कि आंदोलन बहाना था, लाल किला निशाना था। कुल मिलाकर आज हर चैनल लाल किले का ज़ख्म गिनने में लगा हुआ है। निश्चित ही जो कल हुआ गलत हुआ पर इस गलत को सरकार की  असफलता के तौर पर नहीं दिखा रही है, कि आखिर कुछ हजार लोग कैसे लाल किले तक पहुंच गए। केंद्र सरकार के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस को आखिर क्यों नहीं पर्याप्त मात्रा में लगाया गया था।

वहीं कल एक जगह किसानों के एक समूह ने इंडिया टुडे समूह के टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई को घेर लिया, और कहा कि आज तक चैनल हमारे खिलाफ़ दिखाता है। इससे पहले भी किसान यूनियन के नेताओं ने मेनस्ट्रीम मीडिया से बराबर दूरी बनाकर रखी। आंदोलन में इससे पहले भी कई न्यूज चैनलों के पत्रकारों को बैरंग लौटा दिया गया था।

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