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वैचारिक प्रतिबद्धता की कमी से राजनीति में आ रही है गिरावट : कुलदीप राय शर्मा

कुलदीप राय शर्मा अण्डमान निकोबार द्वीप समूह से सांसद हैं। इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद नौकरी करने की बजाए उन्होंने अण्डमान निकोबार की जनता का सेवा करना चुना। 10 सितंबर 1967 को पोर्ट ब्लेयर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में जन्मे शर्मा के परिवार का माहौल राजनीतिक था। जादवपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और पंद्रह वर्षों से प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। देश की राजनीति से विचार तत्व का गायब होना उन्हें काफी अखरता है। अण्डमान निकोबार और देश की राजनीति पर जनचौक के राजनीतिक संपादक प्रदीप सिंह ने उनसे लंबी बातचीत की है। पेश है बातचीत का संपादित अंश :

आप राजनीति में कब और कैसे आए, राजनीति में आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?

कुलदीप राय शर्मा: राजनीतिक परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही राजनीति को देखता-समझता रहा हूं। मेरी दादी सक्रिय राजनीति में थी। परिवार में सेवा-भाव का वातावरण था। मैं छात्र जीवन में ही राजनीति में आ गया था। पोर्ट ब्लेयर से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय में बीई में प्रवेश लिया। और विश्वविद्यालय की राजनीति में सक्रिय हो गया। उस समय कैंपस में सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई का दबदबा था। हम लोग जादवपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट एसोसिएशन (JUSA) बनाकर सक्रिय हुए। जूसा से मैं छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। लेकिन सफलता नहीं मिली। 1997 से राजनीति में सक्रिय हूं।

राजनीति करने के लिए कांग्रेस पार्टी को ही क्यों चुना। क्या संगठन में भी सक्रिय रहे?

कुलदीप राय शर्मा: मेरा परिवार कई पीढ़ियों से कांग्रेस में रहा। इसलिए जब मेरी राजनीति में सक्रिय होने की इच्छा हुई तो कांग्रेस प्रथम वरीयता में थी। कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क किया और पार्टी में शामिल हो गया। 2003 में अण्डमान युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना और अगले साल 2004 में अण्डमान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का वर्किंग अध्यक्ष बना दिया गया। और उसके एक साल बाद 2005 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 1998, 2009 और 2014 में लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा। तीन चुनाव हारने के बाद भी मैं जनता के बीच सक्रिय रहा और अब जाकर 2019 में मेरी जीत हुई।

देश के दूसरे हिस्सों की समस्याओं और जरूरतों से अण्डमान-निकोबार की समस्या कितनी अलग है। वहां की राजनीति के मुख्य मुद्दे क्या हैं ?

कुलदीप राय शर्मा: देखिए! देश के दूसरे हिस्सों से अण्डमान निकोबार की तुलना नहीं की जा सकती है। क्योंकि यह द्वीप समूह है। चारों सरफ से समुद्र से घिरा हुआ है। जरूरत के अधिकांश सामान बाहर से आते हैं। लेकिन पेय जल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सवाल यहां की राजनीति के मुख्य मुद्दे हैं। सबसे बड़ी जरूरत यातायात की है। एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए पानी का जहाज और हेलिकॉप्टर का उपयोग होता है। अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह में सुन्दरता में एक से बढ़कर एक कुल 572 द्वीप हैं। अण्डमान का लगभग 86 प्रतिशत क्षेत्रफल जंगलों से ढका हुआ है। 2011 के जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 3,80,581है। अण्डमान और निकोबार में कुल तीन जिले हैं और यह 24 म्यूनिसिपल काउंसिल में विभाजित है।

आज चुनाव बहुत खर्चीला है क्या आम आदमी चुनाव लड़ सकता है ?

कुलदीप राय शर्मा: यह बात सही है कि आज चुनाव बहुत खर्चीला हो गया है। भाजपा ने इसे और महंगा बना दिया है। लेकिन एक बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आज भी चुनाव में पैसे की भूमिका प्रमुख नहीं है। जो नेता जनता के बीच नहीं रहते हैं उनकों तो स्वभाविक रूप से अधिक खर्च करना पड़ता है। लेकिन यदि आप जनता से निरंतर संवाद और संपर्क में हैं तो चुनाव में बहुत अधिक धन नहीं खर्च करना पड़ता है। क्षेत्र में आपको हर व्यक्ति से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए। चुनाव के अधिक खर्चीला होने का कारण राजनीतिक दल हैं। जब तक जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर पैराशूट से प्रत्य़ाशी उतारे जाएंगे तब कर यह होता रहेगा।

आज देश की राजनीति एक ध्रुवीय हो गई है। सत्ता पक्ष विपक्ष के सांसदों-विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करने का अभियान चला रही है। इससे बचने का कांग्रेस के पास क्या रोड मैप है?

कुलदीप राय शर्मा: आज देश बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। राजनीति सेवा करने का माध्यम है लेकिन आज यह पैसा और सत्ता प्राप्त करने का औजार बन गया है। राजनीति में विचार की कमी के कारण यह सब हो रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के समय देश में हजारों-लाखों लोगों ने अपने जान की कुर्बानी देकर आजादी दिलाई। तब देश सेवा भी सर्वोपरि था। आजादी की लड़ाई से निकले नेताओं ने सार्वजिनक और निजी जीवन में विचार एवं आदर्श को सबसे ऊपर रखा। लेकिन राजनीति से उस पीढ़ी के जाने के बाद स्वार्थी तत्वों ने राजनीति को अपने निहित हित में उपयोग करना शुरू कर दिया। बड़े पैमाने पर देखा जाए तो यह विचार के प्रति प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है। अब देखिए भाजपा दूसरे दलों को तोड़ रही है। और कांग्रेस समेत अन्य दलों के नेता टूट रहे हैं। ऐसे लोग न तो कांग्रेस की विचारधारा के प्रति ईमानदार रहे, आगे वे भाजपा की विचारधारा के प्रति भी ईमानदार नहीं रहेंगे। जनता ही उनको सबक सिखाएगी।

आज राजनीति से जनता के मुद्दे गायब हैं। जनता के बुनियादी सवाल से हर दल कन्नी काट रहे हैं,इसका क्या कारण मानते हैं ?

कुलदीप राय शर्मा: भाजपा देश में सांप्रदायिक उन्माद फैला कर बुनियादी मुद्दों को राजनीति से दूर कर दिया है। अब देश की सत्ता और मीडिया उनके हाथ में है। वो जो चाहें उसे मुद्दा बनाए या बिगाड़े। भाजपा हमेशा से आस्था और अतीत के मुद्दों को उठाती रही है। वह वर्तमान के सच से हमेशा मुख मोड़ती रही है। अब जनता को भी उस भ्रम में डाल दिया है। आज राजनीति बदल रही है। राजनीति करने वाली पीढ़ी बदल रही है। ऐसे में भाजपा जनता के सवालों को पीछे करने के षडयंत्र में लगी है।

कांग्रेस में लोकतंत्र का अभाव और एक परिवार के इशारे पर काम करने का आरोप लगता रहा है। इस पर आपका क्या कहना है?

कुलदीप राय शर्मा:
कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। जनता ने सबसे अधिक बार कांग्रेस को चुना है। कांग्रेस में आप हर राज्य, क्षेत्र और धर्म-जाति का प्रतिनिधित्व देख सकते हैं। अगर कांग्रेस पार्टी एक परिवार के इशारे पर चल रही होती तो क्या इतने दिनों तक जनता उसे पसंद करती? क्या देश की जनता अब तक लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती थी या देश में लोकतंत्र नहीं था ? यह आरोप सरासर गलत है।

आज संविधान, उदारवादी मूल्य और तर्कवादी चिंतन खतरे में है। इसे बचाने के लिए कांग्रेस क्या सोचती है?

कुलदीप राय शर्मा: यह बात सही है कि आज देश में कट्टरपंथ काफी मजबूत हो गया है। इसका कारण संघ-भाजपा और केन्द्र सरकार की नीति है। लेकिन जनता ने इसी सरकार को चुना है। हम संविधान और लोकतंत्र पर हो रहे हमले का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

This post was last modified on August 23, 2019 10:12 pm

प्रदीप सिंह

लेखक डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

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